{"_id":"638d0404bd451a6f53487925","slug":"lucknow-news-lucknow-news-lko6602973142","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: नहीं रहे 48 साल से रावण का किरदार निभाने वाले विष्णु त्रिपाठी, पूर्व राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने दी थी लंकेश की उपाधि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: नहीं रहे 48 साल से रावण का किरदार निभाने वाले विष्णु त्रिपाठी, पूर्व राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने दी थी लंकेश की उपाधि
विज्ञापन
बीजेपी नेता व पूर्व पार्षद विष्णु त्रिपाठी उर्फ लंकेश की फाइल फोटो।
लखनऊ। ‘मेरे भय से कांपते, आकाश पृथ्वी मौन हैं। मैं हूं नारायण जगत का, मुझसे बढ़कर कौन है।’ श्री पब्लिक बाल रामलीला समिति के मंच पर 48 सालों तक इन स्वरचित पंक्तियों और अट्टहास से अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने वाले विष्णु त्रिपाठी ‘लंकेश’ का रविवार को निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे और उन्हें कैंसर था। खुद को शिव के साथ-साथ रावण का भक्त कहने वाले लंकेश 1978 से लगातार रावण का किरदार निभाते रहे।
नामित पार्षत अनुराग मिश्रा कहते हैं कि वे 2007 से 12 तक पार्षद रहे। चौपटिया में आते-जाते वे चौक की पब्लिक रामलीला से जुड़ गए और ऐसा जुड़े कि उनके बिना रावण की भूमिका की परिकल्पना नामुमकिन हो गई थी। 5 मई 2003 को लक्ष्मण मेला मैदान में तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने उन्हें लंकेश की उपाधि दी थी।
किरदार में ऐसा खोए कि विष्णु त्रिपाठी गुम हो गए
रावण के किरदार को उन्होंने इस तरह से जीया कि लोगों की जुबान पर सिर्फ लंकेश रह गया, विष्णु त्रिपाठी तो महापंडित लंकापति के व्यक्तित्व में कहीं खो गया। खास बात है कि विष्णु त्रिपाठी इस गुमनामी को ही अपनी सफलता बताते थे। रामकुमार वर्मा कहते हैं कि रावण के किरदार को समझने के लिए उन्होंने उसके बारे में खूब पढ़ा। 2008 से पत्नी रेनू त्रिपाठी उनके साथ मंदोदरी की भूमिका निभाती आ रही थीं। विगत दो वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी कारणों से वे मंच पर नहीं आ सके।
विज्ञापन
‘सीता तो मोक्ष की पुड़िया है...’
एक बार उन्होंने कहा था कि लोगों ने रावण की सिर्फ बुराई देखी पर वो तो अच्छाइयों की खान था। वो शिव भक्त था। उसे ज्योतिष, रसायन, भौतिक विज्ञान का ज्ञान था। जन्मांग को पढ़ना जानता था और संगीतज्ञ भी था। लोग कहते हैं कि रावण के लिए सीता तो मोक्ष की पुड़िया थी और इसीलिए वो उन्हें हर लाया था।
अंतिम संस्कार आज गुलाला घाट पर
रविवार को निवाजगंज ठाकुरगंज स्थित उनके आवास पर लोग शोक संवेदना व्यक्त करने आते रहे। नामित पार्षद अनु मिश्रा ने बताया की अंतिम संस्कार सोमवार को सुबह 11 बजे गुलाला घाट पर होगा। परिवार में पत्नी रेनु त्रिपाठी, एक बेटा व दो बेटियां हैं।
विज्ञापन
नामित पार्षत अनुराग मिश्रा कहते हैं कि वे 2007 से 12 तक पार्षद रहे। चौपटिया में आते-जाते वे चौक की पब्लिक रामलीला से जुड़ गए और ऐसा जुड़े कि उनके बिना रावण की भूमिका की परिकल्पना नामुमकिन हो गई थी। 5 मई 2003 को लक्ष्मण मेला मैदान में तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने उन्हें लंकेश की उपाधि दी थी।
विज्ञापन
किरदार में ऐसा खोए कि विष्णु त्रिपाठी गुम हो गए
रावण के किरदार को उन्होंने इस तरह से जीया कि लोगों की जुबान पर सिर्फ लंकेश रह गया, विष्णु त्रिपाठी तो महापंडित लंकापति के व्यक्तित्व में कहीं खो गया। खास बात है कि विष्णु त्रिपाठी इस गुमनामी को ही अपनी सफलता बताते थे। रामकुमार वर्मा कहते हैं कि रावण के किरदार को समझने के लिए उन्होंने उसके बारे में खूब पढ़ा। 2008 से पत्नी रेनू त्रिपाठी उनके साथ मंदोदरी की भूमिका निभाती आ रही थीं। विगत दो वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी कारणों से वे मंच पर नहीं आ सके।
विज्ञापन
‘सीता तो मोक्ष की पुड़िया है...’
एक बार उन्होंने कहा था कि लोगों ने रावण की सिर्फ बुराई देखी पर वो तो अच्छाइयों की खान था। वो शिव भक्त था। उसे ज्योतिष, रसायन, भौतिक विज्ञान का ज्ञान था। जन्मांग को पढ़ना जानता था और संगीतज्ञ भी था। लोग कहते हैं कि रावण के लिए सीता तो मोक्ष की पुड़िया थी और इसीलिए वो उन्हें हर लाया था।
अंतिम संस्कार आज गुलाला घाट पर
रविवार को निवाजगंज ठाकुरगंज स्थित उनके आवास पर लोग शोक संवेदना व्यक्त करने आते रहे। नामित पार्षद अनु मिश्रा ने बताया की अंतिम संस्कार सोमवार को सुबह 11 बजे गुलाला घाट पर होगा। परिवार में पत्नी रेनु त्रिपाठी, एक बेटा व दो बेटियां हैं।