{"_id":"63a48edb42dfb6133d5b208f","slug":"lucknow-news-high-court-ordered-35-years-old-verified-copy-of-the-order-will-be-forensically-examined","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News : हाईकोर्ट ने दिया आदेश, आदेश की 35 वर्ष पुरानी सत्यापित कॉपी की होगी फोरेंसिक जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News : हाईकोर्ट ने दिया आदेश, आदेश की 35 वर्ष पुरानी सत्यापित कॉपी की होगी फोरेंसिक जांच
Thu, 22 Dec 2022 10:38 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 22 Dec 2022 10:38 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चकबंदी के एक मामले में 67 साल पहले के आदेश को चुनौती दी गई है। मामले में 35 साल पुराने सत्यापित आदेश की प्रति प्रस्तुत की गई है। कोर्ट ने आदेश की प्रति की फोरेंसिक जांच के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
लखनऊ हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चकबंदी के एक मामले में 67 साल पहले के आदेश को चुनौती दी गई है। मामले में 35 साल पुराने सत्यापित आदेश की प्रति प्रस्तुत की गई है। कोर्ट ने आदेश की प्रति की फोरेंसिक जांच के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश ओम पाल की याचिका पर दिया। उन्होंने जिलाधिकारी, उन्नाव को यह भी आदेश दिया कि वह पता करे कि क्या कथित आदेश की प्रति चकबंदी कार्यालय से जारी की गई है। पूछा कि क्या वर्ष 1987 व इसके पूर्व उन्नाव के चकबंदी कार्यालय में टाइप राइटर का प्रयोग होता था। याची ने उप संचालक चकबंदी, उन्नाव के 22 जुलाई 1955 के कथित आदेश को विधि विरुद्ध बताते हुए इसकी सत्यापित प्रति याचिका के साथ दाखिल की है।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार व ग्राम सभा के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि आदेश की प्रति कूटरचित तरीके से बनाई गई है। याची ने बताया कि आदेश की सत्यापित कॉपी वर्ष 1987 में जारी की गई थी। सरकार व ग्राम सभा की ओर से कोर्ट में कहा गया कि वर्ष 1955 में चकबंदी कार्यवाही के लिए टाइप राइटर का प्रयोग नहीं होता था। ऐसे में वर्ष 1955 के आदेश की सत्यापित प्रति 32 साल बाद वर्ष 1987 में जारी ही नहीं की जा सकती है। क्योंकि चकबंदी के रेग्युलेशन्स के तहत 12 साल बाद अनावश्यक रिकॉर्ड नष्ट कर दिए जाते हैं। कोर्ट ने कथित आदेश की सत्यापित प्रति को फोरेंसिक साइंस लैबोरेट्री, लखनऊ भेजकर जांच कराने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 31 जनवरी को होगी।
विज्ञापन