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Lucknow News : डीजीएमई पद पर आईएएस किन्जल सिंह की तैनाती को चुनौती, जनहित याचिका पर सुनवाई 31 को
Tue, 30 May 2023 09:37 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 30 May 2023 09:37 PM IST
सार
वकील मोतीलाल यादव ने याचिका दायर कर कहा कि डीजीएमई पद पर आईएएस अफसर की तैनाती नहीं की जा सकती है। यह संबंधित नियम कानून के खिलाफ है। याचिका में अधिकार प्रच्छा रिट आदेश जारी करने करने के आग्रह किया गया है।
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लखनऊ हाईकोर्ट
विस्तार
प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा व प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीएमई)पद पर आईएएस किंजल सिंह की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में 31 मई को सुनवाई को होगी।
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एक स्थानीय वकील मोतीलाल यादव ने याचिका दायर कर कहा कि डीजीएमई पद पर आईएएस अफसर की तैनाती नहीं की जा सकती है। यह संबंधित नियम कानून के खिलाफ है। याचिका में अधिकार प्रच्छा रिट आदेश जारी करने करने के आग्रह किया गया है। साथ ही यह पूछने की गुजारिश भी की गई है की आखिर किस अधिकार से किन्जल सिंह डीजीएमई पद धारण किए हैं। उनके पास चिकित्सा की कोई डिग्री न होने की बात कहकर उन्हें इस पद पर कार्य करने से रोकने का निर्देश राज्य सरकार को जारी करने का आग्रह याचिका में किया गया है। याचिका में पांच लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, नियुक्ति एंव कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव, डीजीएमई, आईएएस किंजल सिंह और यूपीपीएससी चेयरमैन प्रयागराज शामिल हैं।
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प्रधानाचार्य कैडर के पद पर आईएएस की तैनाती से विवाद
उत्तर प्रदेश चिकित्सा शिक्षा सेवा नियमावली (प्रथम संशोधन) 1996 के तहत महानिदेशक का पद राजकीय मेडिकल कॉलेजों के आयोग से चयनित प्रधानाचार्य से भरने का नियम है। संबंधित प्रधानाचार्यों के 10 वर्ष के कार्यकाल का मूल्यांकन किया जाता है। चरित्र पंजिका में उत्कृष्ट नंबर हासिल करने वाले को इस पद के लिए योग्य माना जाता है। इसके बाद भी शासन की ओर से बीच-बीच में इस पद पर आईएएस को बैठा दिया जाता है। जब भी यह मामला गरमाता है तो आईएएस को हटाकर कार्यवाहक के रूप में प्रधानाचार्य की तैनाती कर दी जाएगी और फिर इस पद पर आईएएस को तैनात कर दिया जाता है। वर्ष 1995 में पहली बार आईएएस एसके खरे को तैनात किया गया था, जिन्हें न्यायालय के आदेश पर हटाना पड़ा था।
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