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कम हुआ लखनऊ का दबदबा: उप मुख्यमंत्री पद तो मिला पर छिन गए छह मंत्री

Sat, 26 Mar 2022 02:14 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव राजन परिहार, अमर उजाला, लखनऊ
राजन परिहार, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sat, 26 Mar 2022 02:14 PM IST
सार

लखनऊ की कैंट विधानसभा सीट से विधायक ब्रजेश पाठक को उप मुख्यमंत्री पद तो मिला पर लखनऊ का दबदबा इस बार कम हो गया है। पिछली बार योगी सरकार के कार्यकाल की शुरुआत में चार कैबिनेट मंत्री, दो राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और एक राज्य मंत्री लखनऊ के थे।

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Lucknow got Deputy CM, but the dominance decreased
उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ब्रजेश पाठक। - फोटो : amar ujala

विस्तार

योगी सरकार के पहले कार्यकाल में दबदबा रखने वाले लखनऊ का जलवा दूसरे कार्यकाल में कम हो गया। राजधानी को डिप्टी सीएम तो मिला, लेकिन छह मंत्री पद छिन गए। इनमें एक कैबिनेट मंत्री का पद रीता बहुगुणा जोशी के केंद्र में जाने पर पिछली सरकार के आधे कार्यकाल में ही चला गया था बाकी तीन कैबिनेट, दो राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और एक राज्य मंत्री का पद इस बार कम हो गया। खास बात यह है कि पद गंवाने वाले जन प्रतिनिधि भी पार्टी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में एक तरफ उनके समर्थक निराश हैं तो दूसरी तरफ इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या वजह रही कि संगठन ने यहां सिर्फ एक ब्रजेश पाठक का ही कद बढ़ाया। बाकी के भविष्य के लिए कोई इशारा तक नहीं किया गया। हालांकि भविष्य में कुछ बड़े नेताओं के समायोजन को लेकर कयास जरूर लगाए जा रहे हैं।

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मंत्रिमंडल में राजधानी का प्रतिनिधित्व इतना कम होने की उम्मीद किसी को नहीं थी। क्योंकि चुनाव में इस बार जिले का प्रदर्शन भी बहुत खराब नहीं रहा था। पिछली बार नौ में से आठ सीटों पर जीत हुई थी तो इस बार सात सीटों पर भगवा परचम लहराया। यही नहीं चुनाव लड़ने वाले दोनों कैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक व आशुतोष टंडन जीते भी। डॉ. दिनेश शर्मा, महेंद्र सिंह व मोहसिन रजा एमएलसी हैं। सिर्फ एक स्वाति सिंह इस बार चुनाव मैदान में नहीं थीं।
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पार्टी ने उनके स्थान पर सरकारी सेवा छोड़कर राजनीति में आए राजेश्वर सिंह को चुनाव लड़ाया और वह जीते भी। इसलिए सभी को उम्मीद थी कि स्वाति सिंह के स्थान पर राजेश्वर मंत्री बनेंगे। डॉ. दिनेश शर्मा और आशुतोष टंडन को लेकर भी स्थानीय स्तर पर किसी को अंदाजा नहीं था कि ये मंत्रिमंडल से बाहर होंगे। उप मुख्यमंत्री पद पर बदलाव को लेकर चर्चाएं और कयासबाजी जरूर आम थी। हुआ भी वही कि कानून मंत्री रहे ब्रजेश पाठक को यह अहम जिम्मेदारी दे दी गई। सर्व सुलभ छवि वाले ब्रजेश पाठक फिलहाल अकेले जिले का प्रतिनिधित्व करेंगे। पार्टी से जुड़े लोग मंत्री न बनने वाले नेताओं की परफार्मेंस व लोगों के बीच उनकी सर्व सुलभता न होने को कारण मान रहे हैं। इनमें से कई नेताओं की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में रही है।
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...लेकिन उम्मीदें अभी कायम हैं
डॉ.दिनेश शर्मा और आशुतोष टंडन जैसे नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से उनके समर्थकों में निराशा तो है, लेकिन उम्मीदें अभी कायम हैं। सभी अपने-अपने तर्कों से इन नेताओं को भविष्य में अच्छा पद मिलने को लेकर आशान्वित हैं। कहा जा रहा है कि प्रदेश या फिर राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में इन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। या फिर सरकार कोई अन्य जिम्मेदारी देकर भी इनका सम्मान बरकरार रख सकती है। तेज तर्रार अफसर रहे राजेश्वर सिंह को भी पार्टी कोई न कोई अहम जिम्मेदारी जरूर सौंपेगी। हालांकि अंतिम निर्णय तो पार्टी का ही होगा कि उसके पैरामीटर कौन, कहां, कितना खरा उतर रहा है?

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