लखनऊ गैंगरेप: कश्मकश में CBI, कैसे करे जांच?
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अगर सूत्रों की मानें तो मोहनलालगंज में गैंगरेप के बाद हत्या के मामले की जांच सीबीआई करने मूड में नहीं है।
जांच एजेंसी के अफसर बात से खिन्न हैं कि राज्य सरकार कई बार ऐसे मामलों की सिफारिश करती है, जिसमें पुलिस कई दिनों तक तफ्तीश कर चुकी होती है।
ऐसे में साक्ष्यों का मिलना काफी मुश्किल हो जाता है। इसके चलते सीबीआई के पास जांच के लिए ठोस आधार नहीं होते। इस बार भी स्थितियां अलग नहीं हैं।
शव का अंतिम संस्कार हो चुका है और पुलिस ने तफ्तीश की, उसे लेकर पहले ही तमाम विवाद खड़े हो चुके हैं।
पुलिस हो गई बेपरवाह
राज्य सरकार ने चौतरफा दबाव के बाद गत सोमवार को सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। सीबीआई ने भले ही अभी जांच शुरू न की हो लेकिन इसकी सिफारिश मात्र ने राजधानी पुलिस ने हाथ-पांव छोड़ दिए हैं। इसी के चलते पिछले तीन दिनों से मामला जहां का तहां अटका हुआ है।
राज्य सरकार द्वारा भेजे गए पत्र पर कार्मिक मंत्रालय से सीबीआई की जांच के लिए अधिसूचना जारी की जाती है। हालांकि इससे पहले सीबीआई से सहमति ली जाती है।
अधिसूचना जारी होने के बाद ही सीबीआई औपचारिक तौर पर तफ्तीश अपने हाथ में लेती है। जबकि मोहनलालगंज कांड को लेकर अभी तक ऐसी कोई कवायद नहीं हो सकी है।
केंद्रीय टीम करेगी जांच का फैसला
सीबीआई के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय मुख्यालय के अधिकारियों ने कहा कि जांच का फैसला केंद्रीय मुख्यालय में होना है। अगर जांच दिल्ली मुख्यालय से कराए जाने का निर्णय होता है तो वहां की टीम पड़ताल करेगी और अगर जांच क्षेत्रीय कार्यालय के सुपुर्द की जाती है, तो यहां की टीम मैदान में उतरेगी।
अधिकारियों ने कहा कि अभी तक केंद्र से इस मामले को लेकर कोई निर्देश नहीं आए हैं और न ही अधिसूचना जारी होने की ही जानकारी मिली है।
गृह विभाग को भी नहीं जानकारी
सीबीआई जांच को लेकर उठे सवाल पर एनेक्सी के मीडिया सेंटर में गृह सचिव कमल सक्सेना ने कहा कि उन्हें इस सिलसिले में कोई जानकारी नहीं मिली है। बताया कि इस मामले में राज्य सरकार की ओर से जांच का सिफारिशी लेटर सोमवार को ही केंद्र को भेज दिया गया था।
उठे विवादों पर नहीं पुलिस का ध्यान
शहर के आला पुलिस अफसरों ने भी सीबीआई जांच की सिफारिश की जानकारी होने के बाद से अपना ध्यान मामले से हटा लिया है। न किसी उच्च अधिकारी ने इस प्रकरण में मातहतों से कोई विमर्श किया न ही स्थानीय स्तर पर पुलिस द्वारा पड़ताल को आगे बढ़ाने की कोशिश हुई।
जांच को लेकर कोतवाली से लेकर डीआईजी स्तर तक के अधिकारियों ने किसी भी तरह की कोई कवायद नहीं की। यहां तक कि पुलिस की तफ्तीश में अभी तक सामने आए विवादों या खामियों को दूर करने की भी कोशिश होती नहीं दिख रही।
जानकारों के मुताबिक अब पुलिस अफसर खुद इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जांच के लिए सीबीआई हां करें और उनके सिर की मुसीबत टले।