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Lucknow: इंजीनियर और सेवानिवृत्त अफसर से निवेश के नाम पर 1.54 करोड़ ठगे, ऐसे फंस गए जाल में
Fri, 27 Sep 2024 11:04 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 27 Sep 2024 11:04 AM IST
सार
इंजीनियर और सेवानिवृत्त अफसर से निवेश के नाम पर 1.54 करोड़ की ठगी की गई है। उन्हें पहले व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया फिर भारी मुनाफे का लालच देकर जाल में फंसाया गया।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
शेयर मार्केट में भारी मुनाफे का लालच देकर साइबर अपराधियों ने शहर के इंजीनियर और इंश्योरेंस कंपनी के सेवानिवृत्त अफसर को जाल में फंसाया व 1.54 करोड़ रुपये पार कर दिए। साइबर क्राइम थाने में दोनों मामलों की रिपोर्ट दर्ज की गई हैं।
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इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव ने बताया कि सीतापुर रोड स्थित एल्डिको इटरनिया अपार्टमेंट निवासी अमित कुमार श्रीवास्तव पेशे से इंजीनियर हैं। उनकी एफआईआर के मुताबिक 14 मई को उनको एचडीएफसी सिक्योरिटीज वीआईपी मेंबरशिप ग्रुप में निवेश के लिए करन बिरला नाम के शख्स ने जुड़ने के लिए कहा।
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28 जून को ग्रुप (वीआई 13 हाई नेट वर्थ स्टॉक डिस्कशन) में जोड़ा गया। उसी में पीएम एचडीएफसी नाम के एप को डाउनलोड करने के लिए लिंक डाला गया। उस एप पर उन्होंने तीन जुलाई से निवेश करना शुरू किया। काफी रकम निवेश करने के बाद एप में 1.74 करोड़ रुपये दिखने लगे। जब यह रकम निकालने की कोशिश की तो खाता फ्रीज बताने लगा। ग्रुप में इस संबंध में जब जानकारी मांगी तो रकम रिलीज करने के एवज में कई बार में लाखों रुपये जमा कराए। फिर एप क्रैश करवा दिया और उनको ग्रुप से हटा दिया। अमित का कुल 90 लाख रुपये ठगों ने पार कर दिया।
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एक दिन में 21 लाख का फायदा लेने के फेर में गंवाए 64 लाख
एल्डिको उद्यान निवासी महेंद्र कुमार शर्मा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से क्षेत्रीय प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हैं। उनकी एफआईआर के मुताबिक 20 अगस्त को उनके पास व्हाट्सएप पर लिंक आया। जो अलंकित सिक्योरिटी नाम की कंपनी का था। कंपनी के एमडी अंकित अग्रवाल और असिस्टेंट मीरा ने निवेश करने को कहा। 33 लाख रुपये उन्होंने निवेश किए। एक ही दिन में एप पर 21 लाख रुपये का लाभ दिखने लगा। लेकिन, रकम निकालने की प्रक्रिया नहीं हो सकी। रकम रिलीज करने के लिए कई बार में कुल 31 लाख रुपये और महेंद्र से जमा करवा लिए गए। फिर उनको ग्रुप से हटा दिया गया। जो खाता था वह भी बंद हो गया।