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Lucknow  : बजट पर चर्चा के दौरान विधान परिषद में नोंकझोंक, विपक्ष ने कमजोर तो सत्ता पक्ष ने बहुआयामी बजट बताया

Mon, 27 Feb 2023 08:20 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 27 Feb 2023 08:20 PM IST
सार

विधानमंडल के दोनों ही सदन के वर्ष 2016 से पहले दिवंगत हो चुके सदस्य की पत्नी या पति को अब 25 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलेगी। अब तक ऐसे परिवारों को 10 हजार रुपये महीना ही पेंशन मिल रही थी।

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Lucknow: During the discussion on the budget, there was a ruckus in the Legislative Council
यूपी विधानसभा - फोटो : amar ujala

विस्तार

विधान परिषद में सोमवार दोपहर बाद वित्तीय वर्ष 2023-24 के आय व्ययक पर सामान्य चर्चा के दौरान सदन में जमकर नोंकझोंक हुई। विपक्ष ने अब तक का सबसे कमजोर बजट बताया तो सत्ता पक्ष ने बहुआयामी बजट बताते हुए कहा कि इससे हर वर्ग का कल्याण होगा। टोकाटाकी के बीच अधिष्ठाता डा. महेंद्र सिंह के सभापतित्व में चल रही कार्यवाही शाम पांच बजे स्थगित की गई।

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सोमवार को आय-व्ययक सामान्य चर्चा की शुरुआत बसपा के एमएलसी भीमराव अंबेडकर ने की। उन्होंने बजट में किए गए प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार बताए कि पिछले बजट की बची धनराशि एक माह में कैसे खर्च करेंगे? जिन विभागों में पिछले साल दो से पांच करोड़ तक का बजट दिया गया और अभी तक संबंधित कार्य के लिए नियमावली नहीं बनी है, उनके लिए जारी बजट का क्या प्रावधान होगा। उन्होंने न्यूनतम मजदूरी का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि न्यूनतम मजदूरी नियमावली अभी तक नहीं बनाई गई है। आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की नियमावली जानबूझकर नहीं बनाई गई। इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने अंबेडकर के बगल में बैठे स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से इशारा करते हुए कहा कि उस वक्त मौर्य ही मंत्री थे। इसका विपक्ष ने विरोध किया। इस मुद्दे पर दोनों तरफ से नोंकझोंक हुई। बसपा एमएलसी ने कहा सभी जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में बदला जा रहा है। ऐसे में क्या नए जिला अस्पताल बनाने की कोई योजना है? उन्होंने इटावा के महेवा को नगर पंचायत का दर्जा नहीं देने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार जनप्रतिनिधियों के साथ भेदभाव बरतने की कोशिश करती है, जबकि यह भेदभाव जनता के साथ है। इटावा में हर वर्ग के लोग हैं। भाजपा के भी सदस्य हैं। फिर उसके विकास में भेदभाव द्वेश को उजागर करती है।
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एमएलसी ध्रूव कुमार त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि ग्रामीण इलाके के विद्यालयों में पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं है। तीन साल के लिए कम्प्यूटर शिक्षक रखे गए थे। सत्ता बदलने के बाद उन्हें हटा दिया गया। इस बजट में भी इसका कोई प्रावधान नहीं किया गया है। जब विधानसभा और विधान परिषद तक डिजिटल हो रही है तो भी माध्यमिक विद्यालयों में कम्यूटर शिक्षक रखने का प्रावधान बजट में क्यों नहीं किया गया? उन्होंने अफसरों पर मनमर्जी से कार्य करने का आरोप लगाया। एमएलसी राजबहादुर सिंह चंदेल ने कहा कि बजट में कुछ नया नहीं है। 
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उन्होंने पुरानी पेंशन, शिक्षकों की भर्ती और स्कूलों अध्यापकों की तैनाती में लापरवाही होने का मुद्दा उठाया। कहा कि स्कूलों में छात्रों की संख्या के अनुसार अध्यापकों की तैनाती नहीं की जा रही है। चर्चा में हिस्सा लेते हुए सत्ता पक्ष के एमएलसी अश्वनी त्यागी ने कहा कि वर्ष 2012-2017 तक बेरोजगारी दर 14.7 फीसदी थी, जो अब 4.2 रह गई है। बसपा शासनकाल में 21 चीनी मिलें बेची गई और 19 बंद की गईं। सपा शासनकाल में 11 चीनें मिले बंद की गई। अब इन चीनी मिलों को भाजपा सरकार लगातार अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त कर रही है। सपा- रालोद का गठबंधन है, लेकिन बागपत की रमाला चीनी मिल का सुदृढ़ीकरण भाजपा सरकार में हुआ। 

एंटी भू माफिया अभियान के तहत 70 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि कब्जा मुक्त कराई गई है। केंद्र सरकार पावर फॉर आल प्रोजेक्ट लेकर आई, लेकिन सपा सरकार ने एग्रीमेंट नहीं किया। भाजपा सरकार बनते ही इस पर एग्रीमेंट हुआ और अब हर गांव को 18 से 20 घंटे बिजली मिल रही है। एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने सरकार की योजनाओं की तारीफ करते हुए कहा कि बेरोजगारी दर लगातार कम हो रही है। सरकार हर हाथ में टैबलेट पहुंचा रही है। सपा सरकार में सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए योजना बनाई जाती थी, लेकिन भाजपा सरकार हर योजना में हर वर्ग को लाभ दे रही है। उन्होंने भीमराव अंबेडकर की ओर मुखातिब होते हुए हा कि हर विभाग के आय-व्यय का ब्यौरा उनकी बेवसाइट पर मौजूद है। सभी विभागों का बजट भी लगातार बढ़ाया जा रहा है।

शर्म आने के मुद्दे पर हंगामा
सत्ता पक्ष के एमएलसी अश्वनी त्यागी कई बार विपक्ष के सदस्यों को शर्म आनी चाहिए, बोल गए। इस पर विपक्ष के लाल बिहारी यादव ने एतराज जताया। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा का ध्यान रखें। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच जमकर नोंकझोंक हुई।

किसानों का सहारा लेकर कसाइयों को बचा रहा है विपक्ष : धर्मपाल
पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि विपक्ष आवारा पशु्ओं के मुद्दे पर किसानों का सहारा लेकर कसाइयों को बचाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आवारा पशुओं के कारण फसलों को नुकसान नहीं हो रहा है। आवारा पशुओं के जानलेवा हमलों से किसानों की मौत और चोटिल होने का तो प्रश्न ही नहीं उठता।

विधानसभा में सोमवार को छुट्टा पशुओं से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए धर्मपाल सिंह ने कहा कि सरकार ने कंटीले तारों से गाएं चोटिल होने और उनकी मौत होने के कारण खेतों पर कंटीले तार लगाने पर रोक लगाई है। लेकिन किसान गुम्मेदार तार खेतों में लगा सकते है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 302 स्थायी और 5723 अस्थायी गौ आश्रय स्थलों में 10,76,053 गोवंश आश्रय पा रहा है। धर्मपाल सिंह ने कहा कि सरकार को बदनाम करने की नियत से विपक्ष के लोग स्कूलों और तहसीलों में गोवंश को बंद करते है।

इससे पहले कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि प्रदेश सरकार गौशालाओं को केवल 30 रुपये प्रतिदिन की दर से गायों का पोषण भत्ता दे रही है इतनी कम राशि में उनका पालन मुश्किल है। गौशालाओं में गायों की मौत हो रही है। सरकार की ओर से विधायकों के सवाल पर असंवेदनशील जवाब दिया जा रहा है।

इकबाल बोले अब नफरत का माहौल, संजय बोले अपने दिन भूल गए
बजट पर चर्चा के दौरान सोमवार को भी खूब आरोप प्रत्यारोप के तीर चले। संभल से सपा विधायक इकबाल महमूद ने कहा कि अब केवल नफरत की बातें हो रही हैं तो गन्ना राज्यमंत्री संजय गंगवार ने कहा कि अपनी सरकार के दिन भूल गए क्या ?

इकबाल बोले कि प्रदेश में जैसा माहौल इस समय चल रहा है ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया। भाईचारे की कोई बात नहीं हो रही। केवल नफरत की बातें हो रही हैं। खास जाति को आगे रखकर बात की जा रही। आरोप प्रत्यारोप चल रहे हैं। कांवड़ यात्रा निकली तो सीएम ने उसका सम्मान किया। हमने भी किया पर रोजों, नमाज पर पाबंदी लगा दी गई। पहले सभी रोजा इफ्तार पार्टी रखते थे। वर्ष 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने अपने आवास पर इफ्तार पार्टी रखी। वहीं पर ही मैदान में नमाज भी पढ़ी गई। यह सोचना चाहिए।

इस पर गन्ना राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार ने कहा कि आज आपको भाईचारे की बात याद आ रही है। अच्छी बात है कि आपको यह अहसास तो हुआ। वह दिन भी याद करें जब आपकी सरकार में कब्रिस्तानों की तो चारदीवारी की जा रही थीं और शमशान घाटों पर एक ईंट भी नहीं लगाई जा रही थी। विधायक निधि को भी अपनी निधि न समझा जाए। यह जनता की निधि है। बजट पर चर्चा फिरोजाबाद से भाजपा विधायक मनीष असीजा, कायमगंज फर्रुखाबाद से अपना दल (सोनेलाल) डा. सुरभि, मनकापुर भाजपा विधायक रमापति शास्त्री, सिवालखास रालोद विधायक गुलाम मोहम्मद ने भी अपनी बात रखी।

321 दिवंगत विधायकों के परिवारों को भी मिलेगी अब 25 हजार रुपये मासिक पेंशन

विधानमंडल के दोनों ही सदन के वर्ष 2016 से पहले दिवंगत हो चुके सदस्य की पत्नी या पति को अब 25 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलेगी। अब तक ऐसे परिवारों को 10 हजार रुपये महीना ही पेंशन मिल रही थी। सोमवार को विधानसभा में उप्र राज्य विधानमंडल (सदस्यों की उपलब्धियां और पेंशन) संशोधन विधेयक 2023 पारित किया गया। इस संशोधन का लाभ 312 दिवंगत विधायकों के परिजनों को मिलेगा।

सदन में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि वर्ष 2016 में इस नियम में संशोधन किया गया था। इसमें तय हुआ था कि विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य के दिवंगत होने पर उनकी पत्नी या पति को दस हजार रुपये की बजाय 25 हजार रुपये माहवार पेंशन मिलेगी। वर्ष 2016 से पहले दिवंगत हुए सदस्यों के परिवार इससे छूट गए थे। उन्हें दस हजार रुपये ही मिल रहे थे। ऐसे में अब यह संशोधन विधेयक लाना जरूरी था। प्रदेश के 287 विधानसभा सदस्य और 25 विधान परिषद सदस्यों के परिवारों को इस संशोधन का लाभ मिलेगा।

माननीयों के सड़क से सदन तक आचरण के आधार पर मिलेगा उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार

विधानसभा अध्यक्ष या पीठासीन अधिकारी के आदेशों की अवहेलना करने और सदन में व्यवस्था एवं शांति बनाए रखने में सहयोग नहीं किया तो विधायक, उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार से वंचित हो जाएंगे। पुरस्कार के लिए माननीयों के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सड़क से सदन तक के व्यवहार का आकलन भी किया जाएगा। सोमवार को विधानसभा में विधायक राजेश त्रिपाठी ने उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार की नियम समिति (2022-23) का प्रथम प्रतिवेदन पेश किया। पुरस्कार के लिए चयन करते हुए विधायक के सार्वजनिक जीवन में योगदान से लेकर सदन में प्रस्तुतीकरण और भाषा की प्रवीणता प्रमुख मानक होगी।

विधायक को कार्यकाल में एक ही बार पुरस्कार मिलेगा। वर्ष 2023 के पुरस्कार 2024 में प्रदान किए जाएंगे। पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार के चयन के लिए निर्धारित मानकों में विधायक का अपने निर्वाचन क्षेत्र में सक्रिय रहना, सार्वजनिक जीवन में योगदान, प्रतिष्ठा, सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी, अनुभव, जनहित के मुद्दों के बारे में जागरुकता, सदन में उठाए गए मुद्दों की प्रासंगिकता और गंभीरता का भी आकलन किया जाएगा। विधायक को विधानसभा के नियमों और प्रक्रिया का ज्ञान, सदन के अंदर और बाहर नियमों का पालन, सदस्य की ओर से पीठासीन अधिकारी की ओर से दिए गए आदेशों का पालन, विभिन्न समितियों में कार्य और उपलब्धियां, सदन की प्रथा और रीति रिवाज के प्रति विधायक का दृष्टिकोण, सदन की व्यवस्था और शांति बनाए रखने में सहयोग, सदन में उपस्थिति, अन्य समूहों और राजनीतिक दलों के प्रति सहिष्णुता , सदन में पूछे गए प्रश्नों की गुणवत्ता, व्यापकता और महत्ता को भी मापदंड में शामिल किया गया है।

विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में चयन समिति गठित होगी
उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार के लिए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में चयन समिति का गठन किया जाएगा। समिति में विधानसभा के उपाध्यक्ष, नेता सदन, नेता प्रतिपक्ष, संसदीय कार्य मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष की ओर से नामित वरिष्ठ विधायक, एक पत्रकार को सदस्य नियुक्त किया जाएगा। विधानसभा के प्रमुख सचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे।

समिति पुरस्कार के लिए मिले नामांकन सर्वसम्मति से निर्णय लेगी। सर्वसम्मति नहीं बनने पर विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा। पुरस्कार के लिए नेता सदन और नेता प्रतिपक्ष से पांच पांच नामांकन लिए जाएंगे। समिति स्वयं के स्तर पर भी कुछ नामों पर विचार कर सकती है। पुरस्कार से संबंधित किसी भी मामले में कोई पत्राचार नहीं होगा। समिति के निर्णय पर न्यायालय परीक्षण भी नहीं कर सकेंगे।

... तो किसी भी विधायक को नहीं मिलेगा पुरस्कार
यदि समिति किसी वर्ष में किसी भी विधायक को पुरस्कार के लिए योग्य नहीं मानती है तो उस वर्ष किसी भी विधायक को पुरस्कार नहीं दिया जाएगा। समिति के निर्णय पर किसी भी सदस्य को प्रश्न उठाने का अधिकार नहीं होगा।

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