यूपी का ये शहर कहीं किडनी रैकेट का केंद्र तो नहीं बन रहा?
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जालंधर के एक होटल में किडनी बेचने के आरोप में लखनऊ के दो युवकों के पकड़े जाने के बाद यह आशंका गहराने लगी है कि लखनऊ कहीं किडनी रैकेट का केंद्र तो नहीं बन रहा।
चोरी-छिपे किडनी का धंधा कर रहे इन धंधेबाजों के सामने आने के बाद ऐसे सवाल जवाब मांग रहे हैं। दरअसल,किडनी बेचने के चोरी-छिपे चल रहे मामले पहले भी सामने आ चुके हैं पर प्रशासन और पुलिस के लचर रवैये के चलते कोई एक्शन नहीं हुआ तो ऐसे धंधेबाजों ने अपना खेल फिर शुरू कर दिया है।
जालंधर में शुक्रवार को एक होटल के बाहर पकड़े गए चार लोगों में लखनऊ के सदर कैंट निवासी साबुर अहमद खान और वरदान शामिल थे। इनमें फरीदाबाद का जुनैद अहमद खान और कुलदीप कुमार भी थे।
जुनैद किडनी रैकेट के गिरोह का सरगना है जबकि कुलदीप और साबुर धंधे में उसकी मदद करते थे। वहीं,वरदान को इन लोगों ने जाल में फंसाकर किडनी बेचने के लिए जालंधर ले गए थे। हालांकि जालंधर पुलिस ने वरदान को इस रैकेट का शिकार होने से पहले ही बचा लिया।
जुनैद ने बताया कि पैसों का लालच देकर लोगों को फांसते थे। इसके बाद मोटी रकम पर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को 10 से 15 लाख रुपये में बेच देते थे। इसके लिए जाली दस्तावेज तैयार किए जाते थे। हालांकि किडनी देने वाले व्यक्ति को 30 से 80 हजार रुपये तक ही मिलते थे।
मुफ्त किडनी ट्रांसप्लांट की आड़ में हो रही है किडनी चो
कुछ समय पहले एसजीपीआई में ट्रांसप्लांट के लिए फ्री में गुर्दा उपलब्ध कराने के पर्चे चिपके मिले थे। इसमें एक मोबाइल नंबर लिखा था जो किसी रवि सचान नाम के युवक का था।
पर्चा के आधार पर जब रवि सचान को पकड़ा गया तो पूछताछ में कुछ खास सामने नहीं आया। हालांकि उसके पास मरीजों के पंजीकरण,मोबाइल नंबर मिले थे। रवि सचान ने पूछताछ में सुरेश नाम के कर्मचारी का नाम लिया था। इसके बावजूद पूरा मामला अभी तक दबा हुआ है।
ह्यूमन आर्गन ट्रांसप्लांट एक्ट (होटा) को बेहद कड़ा बना देने के बावजूद मानव तस्करी नहीं थम रही। एसजीपीआई के विशेषज्ञों के अनुसार होटा में फंसने वाले डॉक्टर को 5 से 10 साल की जेल और 20 लाख से एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
इसके अलावा रुपये का लेनदेन करने वालों को भी 1 से 3 साल की कैद और 5 से 25 लाख रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है।
क्या कहता है नियम
अंग प्रत्यारोपण के लिए एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश जाने पर एनओसी ली जाती है। मानव अंगों की तस्करी और व्यापार को रोकने के लिए हर जिले और प्रदेश में ऑथराइजेशन कमेटी है।
अगर यूपी का व्यक्ति दूसरे प्रदेश में प्रत्यारोपण कराता है तो उसे यूपी से एनओसी लेकर दूसरे प्रदेश की ऑथराइजेशन कमेटी को देना होता है।