UP: रिटायर्ड बुजुर्ग को 25 दिन डिजिटल अरेस्ट कर 90 लाख रुपये वसूले, अपने खातों में ट्रांसफर करा ली रकम
राजधानी लखनऊ में साइबर जालसाजों ने एक बुजुर्ग को जाल में फंसाकर 90 लाख रुपये वसूल लिए। जालसाजों ने उन्हें 25 दिन खौफ के साये में रखा। मामले का खुलासा होने पर परिजनों के होश उड़ गए।
विस्तार
कानपुर रोड स्थित एलडीए कॉलोनी सेक्टर-जी में रहने वाले वित्त विभाग से सेवानिवृत्त बुजुर्ग अमर जीत सिंह को 25 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर जालसाजों ने 90 लाख रुपये हड़प लिए। अमर जीत सिंह के बेटे अमर प्रीत ने साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस का कहना है कि ठगों के बैंक खातों की पड़ताल की जा रही है।
अमर प्रीत के मुताबिक एक दिसंबर को उनके पिता के पास वाट्सएप कॉल आई थी। फोन करने वाले ने खुद को मुंबई साइबर क्राइम सेल का अधिकारी गिरीश कुमार बताया। ठग ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग में आपका नाम सामने आया है। इस संबंध में आपके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज है। यह सुनकर अमर जीत डर गए। ठगों ने अमर जीत को वाट्सएप पर नोटिस और गिरफ्तारी वारंट के जाली कागज भी भेजे। इसके बाद जालसाजों ने उन्हें जांच के नाम पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। कहा कि बैंक खातों में जो भी रकम है उसे सरकार के खाते में जमा करना होगा। जांच के बाद रकम वापस कर दी जाएगी। ऐसा नहीं करने पर गिरफ्तार किया जाएगा। ठगों की बातों में आकर अमर जीत डर गए और उन्होंने अपने अलग-अलग खातों में जमा 90 लाख रुपये ठगों के दिए गए अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए।
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संदेह होने पर बेटे ने की पूछताछ तो खुला मामला
25 दिसंबर को पिता को फोन पर बात करते देख अमर प्रीत ने उनसे पूछताछ की पर अमर जीत ने कुछ नहीं बताया। संदेह होने पर अमरप्रीत ने शाम के समय पिता की काउंसिलिंग की और पूरी बात बताने के लिए कहा। इसके बाद अमर जीत ने पूरी कहानी बताई। पिता की बात सुनकर अमर प्रीत ने फौरन साइबर सेल की हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क किया और साइबर क्राइम थाने में जाकर शिकायत की। छानबीन में पता चला कि अमर जीत ने म्युचुअल फंड में निवेश की गई रकम भी ठगों को ट्रांसफर की थी।
25 दिन तक खौफ के साये में रहे
अमर जीत ने बताया कि वह ठगों को असली पुलिस अफसर मान बैठे थे। ठगों ने परिवार के लोगों को भी जेल भेजने की धमकी दी थी। इस संबंध में किसी से भी चर्चा करने से मना किया था। वह 25 दिन तक खौफ के साये में रहे। उन्होंने बताया कि अगर बेटे ने उनकी परिस्थिति को समझकर उनसे बात नहीं की होती तो शायद ठग उनसे और रकम वसूल लेते।
ठगों के खाते में पुलिस ने फ्रीज कराए 15 लाख
अमर प्रीत की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगों के खातों में 15 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं। पुलिस का कहना है कि पीड़ित को फ्रीज कराई गई रकम वापस दी जाएगी।
साइबर क्राइम सेल के इंस्पेक्टर ब्रजेश यादव ने कहा कि बुजुर्ग से ठगों ने जिन बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर कराए, उनका ब्योरा जुटाकर जांच की जा रही है। कुछ रकम फ्रीज कराने में सफलता मिली है। जांच जारी है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पुलिस फोन पर नहीं मांगती बैंक खातों की जानकारी
- साइबर ठगों के झांसे में न आएं, अंजान लोगों के वाट्स एप वीडियो कॉल न उठाएं
- धमकी मिलने पर परिवार के लोगों से करें साझा, पुलिस को दें सूचना
साइबर क्राइम बढ़ता जा रहा है। थोड़ी सी लापरवाही से जीवन भर की कमाई हाथ से निकल जा रही है। अमर उजाला साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान चला रहा है। लोगों को ठगी से बचाव के उपाय बताकर उन्हें जागरूक किया जा रहा है। आप भी कभी डिजिटल अरेस्ट के शिकार हुए हैं तो हमें अपनी कहानी बता सकते हैं। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
इन बातों का रखें ध्यान
- अक्सर ठग फोन कर खुद को पुलिस, आईबी, कस्टम, ईडी या एटीएस का अफसर बताते हैं।
- पार्सल, आधार कार्ड और आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होने की बात कहकर जेल भेजने की धमकी देते हैं।
- डरा धमकाकर बैंक खातों की जानकारी लेते हैं। डर के कारण लोग ठगों से गोपनीय जानकारी भी साझा करते हैं।
- याद रखें पुलिस कभी भी फोन पर बैंक खातों की जानकारी नहीं मांगती, न ही डिजिटल अरेस्ट कर सकती है।
- यदि अनजान नंबर से आने वाले ऑडियो या वीडियो कॉल को न उठाया जाए तो ज्यादातर लोग ठगी का शिकार होने से बच सकते हैं।
- यदि अहसास हो कि साइबर ठग धमकी दे रहे हैं तो तुरंत नजदीकी थाने में संपर्क करके इसकी जानकारी दें।
- साइबर ठगी के मामलों में जितनी जल्दी हो सके साइबर क्राइम सेल को सूचना दें। इससे आपकी रकम बचने की संभावना बढ़ जाती है।
यहां करें शिकायत: अगर आप ठगी का शिकार होते हैं तो साइबर क्राइम थाने, साइबर सेल, लोकल पुलिस स्टेशन, टोल फ्री नंबर 1930 या www.cybercrime.gov.in वेबसाइट के जरिये शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इनसे भी हो चुकी साइबर ठगी
- इंदिरानगर के लक्ष्मणपुरी विस्तार निवासी निजी कॉलेज की प्रोफेसर प्रमिला मानसिंह से 78.50 लाख रुपये हड़पे गए।
- कनाडा के रहने वालीं सुमन कक्कड़ व उनकी बहन से 1.88 करोड़ ऐंठे गए।
- बाजारखाला के ऐशबाग निवासी सरकारी बैंक के पूर्व कर्मचारी प्रभात कुमार से 1.20 करोड़ हड़प लिए गए।
- एसजीपीजीआई की महिला डॉक्टर रुचिका टंडन से 2.81 करोड़ वसूले गए।
- हजरतगंज के अशोक मार्ग पर रहने वाले डॉक्टर पंकज रस्तोगी की पत्नी दीपा से 2.71 करोड़ की ठगी हुई।
- हजरतगंज निवासी मरीन इंजीनियर एके सिंह से 84 लाख की ठगी हुई।
- ठाकुरगंज के पंचायती राज विभाग से रिटायर कमलकांत मिश्रा से 17.5 लाख वसूले गए थे।