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हार्ट अटैक, कैंसर के बाद सर्वाधिक मौतों की वजह सड़क हादसे
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हार्ट अटैक, कैंसर के बाद सर्वाधिक मौतों की वजह सड़क हादसे
विश्व ट्रॉमा दिवस के अवसर पर वॉकाथन के आयोजन पर केजीएमयू के कुलपति
दुनिया में हरसाल दस लाख लोगों की मौत सड़क हादसों में होती हैं। हृदयाघात व कैंसर के बाद सर्वाधिक मौतों की वजह सड़क दुर्घटनाएं ही हैं। हादसे के चलते पांच-छह लाख लोग दिव्यांग हो जाते हैं। ये बातें केजीएमयू के कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने कहीं। मौका था विश्व ट्रॉमा दिवस के अवसर पर आयोजित वॉकाथन का।
कुलपति ने हरी झंडी दिखाकर 1090 चौराहे से वॉकाथन को रवाना किया। वॉकाथन राम मनोहर लोहिया पार्क होते हुए वापस 1090 चौराहे पर खत्म हुई। इस दौरान डॉक्टरों ने ट्रामा सेवाओं के प्रति जागरूक किया। मौके पर ट्रॉमा सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि देश में यदि लोग सीट बेल्ट और हेलमेट का इस्तेमाल करें तो सड़क हादसे में होने वाली मौतों में 70 प्रतिशत तक कमी हो सकती है। देश में डेढ़ लाख से अधिक मौतें सड़क दुर्घटना की वजह से ही होती हैं। इनमें सबसे अधिक 5 से 40 वर्ष की आयु वाले होते हैं। जागरूकता और सतर्कता से लोगों की जान बच सकती हैं। अगर हादसे के 20 मिनट से आधे घंटे तक मरीज को प्राथमिक उपचार मिल गया तो उसकी जान बचाना संभव हो जाता है। कार्यक्रम में ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ. समीर मिश्रा ने भी हिस्सा लिया।
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विश्व ट्रॉमा दिवस के अवसर पर वॉकाथन के आयोजन पर केजीएमयू के कुलपति
दुनिया में हरसाल दस लाख लोगों की मौत सड़क हादसों में होती हैं। हृदयाघात व कैंसर के बाद सर्वाधिक मौतों की वजह सड़क दुर्घटनाएं ही हैं। हादसे के चलते पांच-छह लाख लोग दिव्यांग हो जाते हैं। ये बातें केजीएमयू के कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने कहीं। मौका था विश्व ट्रॉमा दिवस के अवसर पर आयोजित वॉकाथन का।
कुलपति ने हरी झंडी दिखाकर 1090 चौराहे से वॉकाथन को रवाना किया। वॉकाथन राम मनोहर लोहिया पार्क होते हुए वापस 1090 चौराहे पर खत्म हुई। इस दौरान डॉक्टरों ने ट्रामा सेवाओं के प्रति जागरूक किया। मौके पर ट्रॉमा सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि देश में यदि लोग सीट बेल्ट और हेलमेट का इस्तेमाल करें तो सड़क हादसे में होने वाली मौतों में 70 प्रतिशत तक कमी हो सकती है। देश में डेढ़ लाख से अधिक मौतें सड़क दुर्घटना की वजह से ही होती हैं। इनमें सबसे अधिक 5 से 40 वर्ष की आयु वाले होते हैं। जागरूकता और सतर्कता से लोगों की जान बच सकती हैं। अगर हादसे के 20 मिनट से आधे घंटे तक मरीज को प्राथमिक उपचार मिल गया तो उसकी जान बचाना संभव हो जाता है। कार्यक्रम में ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ. समीर मिश्रा ने भी हिस्सा लिया।
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