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UP: बस्ती के बाहुबली नेता राजकिशोर सिंह भाजपा में शामिल, सदस्यता लेने से पहले अमित शाह से मिले
Fri, 03 May 2024 12:09 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 03 May 2024 12:09 AM IST
सार
राजकिशोर सिंह ने भाजपा की सदस्यता लेने से पहले गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उन्हें व उनके भाई बृज किशोर सिंह व समर्थकों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई।
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भाजपा में शामिल हुए नेता।
- फोटो : यूपी भाजपा फेसबुक पेज से
विस्तार
बस्ती के बाहुबली छवि वाले पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह अपने भाई बृज किशोर सिंह डिंपल और समर्थकों के साथ बृहस्पतिवार को भाजपा में शामिल हो गए। इससे पहले राजकिशोर और उनके भाई बस्ती से मौजूदा सांसद व लोकसभा प्रत्याशी हरीश द्विवेदी के साथ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। इसके बाद भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में भगवा पट्टा पहनकर पार्टी की सदस्यता ली। उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक और प्रदेश भूपेंद्र चौधरी ने राजकिशोर समेत सभी नए लोगों को सदस्यता दिलाई।
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बता दें कि करीब 22 साल के राजनीतिक सफर में राजकिशोर सपा, बसपा और कांग्रेस में कई बार आए और गए। वह बसपा और सपा सरकार में तीन बार मंत्री भी रहे। वर्ष 2019 के बस्ती सीट से लोकसभा चुनाव भी लड़े थे और करीब 56 हजार मत पाए थे, जब कांग्रेस की सियासी स्थिति काफी कमजोर थी। इस चुनाव में अपने दम पर 56 हजार वोट पाकर राजकिशोर ने अपनी पकड़ का आभास कराया था। हालांकि चुनाव हारने के बाद राजकिशोर कांग्रेस छोड़ वर्ष 2020 में दोबारा बसपा में शामिल हो गए। लेकिन पिछले साल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से हुई उनकी मुलाकात के बाद बसपा ने राजकिशोर से निष्कासित कर दिया था।
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बसपा से निकाले जाने के बाद से ही राजकिशोर नए सियासी ठिकाने की तलाश कर रहे थे। उनके भाजपा में शामिल होने को लेकर कयास तो बहुत पहले ही लग रहे थे लेकिन अब जाकर उनको भाजपा में शामिल कराया गया है। सूत्रों का कहना है कि राजकिशोर पहले बस्ती से ही लोकसभा का टिकट का आश्वासन चाहते थे, पर भाजपा नेतृत्व तैयार नहीं हुआ। फिलहाल सिर्फ उन्हें पार्टी में शामिल कराने पर ही सहमति बनी है।
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बृज किशोर भी लड़ चुके हैं चुनाव
छात्रसंघ का चुनाव लड़कर राजनीति की शुरुआत करने वाले बृजकिशोर भी वर्ष 2014 में सपा के टिकट पर बस्ती चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन चुनाव हार गए थे। इसके बाद सपा सरकार ने उन्हें ऊर्जा मंत्रालय में सलाहकार बना दिया गया था। बाद में दोनों भाई सपा छोड़कर वर्ष 2019 में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद वर्ष 2020 में फिर से बसपा में शामिल हो गए थे।