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बैंक आंखें मूंदे रहे, बंटी-बबली ने लगाया 90 लाख का चूना

Mon, 15 May 2017 08:34 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Mon, 15 May 2017 08:34 PM IST
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loan fraud by couple in lucknow
डेमो प‌िक

आम आदमी बैंक से कर्ज लेने जाए तो इतनी फॉर्मेलिटीज और जांचें की जाती हैं कि वह कर्ज से पहले ही टूट जाता है। पर, राजधानी में एक ही संपत्ति को बंधक रख दंपती को पहले केनरा और एचडीएफसी ने कर्ज दिया। 

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यही नहीं एचडीएफसी से लिया 90 लाख का कर्ज बैंक ऑफ बड़ौदा में ट्रांसफर भी करा लिया। किस्तें नहीं चुकाई गईं तो बैंक ऑफ बड़ौदा ने नीलामी की प्रक्रिया शुरू की तब सामने आया कि केनरा बैंक भी उस संपत्ति की नीलामी का इश्तहार दे चुका है। 
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मामला थाने पहुंचा तो वहां से टरका दिया गया। सीओ ने जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब एसएसपी के आदेश पर केस दर्ज किया गया है।
 
पुलिस के मुताबिक, बैंक ऑफ बड़ौदा की चौक शाखा के मुख्य प्रबंधक रूपेश सिंघल ने हजरतगंज के रोहतास पशुपति अपार्टमेंट निवासी व शुतुर मकबूलगंज में त्रिवेणी सेल्स फर्म की प्रोपराइटर भावना रस्तोगी और उनके पति देवल रस्तोगी पर जालसाजी व धोखाधड़ी कर 90 लाख रुपये हड़पने का केस दर्ज कराया है। 
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रूपेश सिंघल का कहना है कि देवल रस्तोगी ने चार मार्च 2014 को बैंक ऑफ बड़ौदा की चौक शाखा में संपर्क किया। देवल ने कहा कि व्यवसाय चलाने के लिए उन्होंने एचडीएफसी बैंक की इंदिरानगर शाखा से कर्ज लिया था। रोहतास पशुपति अपार्टमेंट का फ्लैट नंबर-511 बैंक में बंधक है। 

वह कर्ज एचडीएफसी बैंक से बैंक ऑफ बड़ौदा में ट्रांसफर कराना चाहता है। इस पर बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों ने फॉर्मेलिटीज पूरी कर 30 मार्च को आरटीजीएस से एचडीएफसी बैंक में देवल-भावना के कर्ज वाले खाते में रकम ट्रांसफर करने के साथ बंधक संपत्ति के मूल दस्तावेज मांगे।

यूं किया गया खेल

loan fraud by couple in lucknow
FRAUD SHIMLA

एचडीएफसी बैंक के अधिकारी ने बंधक संपत्ति के मूल दस्तावेज मुंबई स्थित हेड ऑफिस में होने की बात कही। बताया कि ऋण खाता बंद होने के 15-20 दिन बाद बंधक संपत्ति के दस्तावेज की सूचना संपत्ति मालिक को दी जाती है। 

रूपेश का कहना है कि देवल व भावना रस्तोगी 26 अप्रैल 2014 को बैंक ऑफ बड़ौदा की चौक शाखा पहुंचकर बंधक बने फ्लैट के दस्तावेज सौंपते हुए बताया कि एचडीएफसी बैंक से मूल दस्तावेज मिल गए हैं। 

दोनों ने बैंक में कागजी खानापूरी की। कई महीनों बाद जब किस्तें अदा नहीं हुईं तो बैंक ऑफ बड़ौदा ने 90 लाख के बकाया का नोटिस भेजा। कोई नतीजा न निकलने पर नॉन प्रॉफिट एसेट करके पिछले साल 19 अक्तूबर 2016 को बंधक संपत्ति की नीलामी का इश्तहार छपवाया। 

बगैर मिलीभगत के ऐसा संभव नहीं

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डेमो प‌िक - फोटो : demo pic
बैंक ऑफ बड़ौदा की तरफ से बंधक संपत्ति की नीलामी की कार्रवाई चल ही रही थी तभी केनरा बैंक की अमीनाबाद शाखा द्वारा 18 दिसंबर 2016 को उसी संपत्ति की नीलामी का इश्तहार छपवाया गया। इस पर बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों ने छानबीन शुरू कराई। 

पता चला कि देवल व भावना रस्तोगी ने बैंक में फर्जी दस्तावेज जमा किए थे। बैंक ऑफ बड़ौदा की टीम ने केनरा बैंक में तहकीकात की। पता चला कि दोनों ने वहां भी फ्लैट बंधक रखकर कर्ज लिया था और किस्तें अदा नहीं करने पर नीलामी की कार्रवाई की जा रही है। 

बैंक ऑफ बड़ौदा की चौक शाखा के मुख्य प्रबंधक रूपेश सिंघल का कहना है कि 90 लाख की धोखाधड़ी का पता चलने पर उन्होंने 20 अप्रैल को चौक कोतवाली में तहरीर दी। पुलिसकर्मियों ने सीओ की मंजूरी के बगैर केस दर्ज करने से इन्कार कर दिया। अगले दिन सीओ चौक से शिकायत की। 

उन्होंने जांच के बाद कार्रवाई की बात कहकर चलता कर दिया। दो हफ्ते बाद भी कोई नतीजा न निकलने पर एसएसपी को अर्जी दी। इस पर केस दर्ज करके तफ्तीश एसआई अमरजीत सिंह को सौंपी गई।  

जानकारों के मुताबिक बैंक कर्ज देने से पहले ऑनलाइन चेक करते हैं। पैन कार्ड, एड्रेस, फोन नंबर के जरिये ट्रैक किया जा सकता है कि संबंधित शख्स और कहीं तो कर्ज नहीं ले रखा है। जानकारों का कहना है कि बिना मिलीभगत के एक ही संपत्ति पर तीन बैंकों से कर्ज हासिल कर पाना संभव नहीं है।
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