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Lucknow News: केजीएमयू में लिवर के प्रेशर की जांच शुरू
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केजीएमयू।
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लखनऊ। केजीएमयू में लिवर के प्रेशर की जांच शुरू हो गई है। मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने एक मरीज के लिवर प्रेशर की जांच कर दवाओं की डोज तय की। इससे मरीज के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ है। अभी तक लिवर के गंभीर मरीजों का लक्षणों के आधार पर इलाज किया जा रहा था। केजीएमयू के इतिहास में पहली बार लिवर के प्रेशर की माप की गई।
लखनऊ निवासी 40 वर्षीय मरीज को लिवर की गंभीर बीमारी थी। पीलिया, पेट में पानी और खून की उल्टियों समेत दूसरे लक्षणों के साथ उसे जनरल मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया था। मेडिसिन विभाग के डॉ. सुधीर वर्मा की निगरानी में मरीज का इलाज शुरू किया गया। शराब के अधिक पीने से लिवर की गंभीर बीमारी हुई थी। डॉक्टर ने मरीज के लिवर का हेपेटिक वेनस प्रेशर ग्रेडिएंट (एचवीपीजी) प्रेशर मापने की जरूरत बताई। जरूरी संसाधन जुटाने के बाद लिवर के प्रेशर जांचने की प्रक्रिया शुरू की।
डॉ. सुधीर ने बताया कि मरीज के गर्दन के पास कैथेटर डाला गया। कैथेटर लिवर तक पहुंचाया गया। लिवर के भीतर खून की प्रमुख नस की सेहत की जांच की गई। इसमें लिवर का प्रेशर पांच के बजाय 17 एमएमएचजी पाया गया, जो सामान्य से काफी अधिक था। साथ ही फेफड़े और दिल की सेहत की भी जांच की गई। वह ठीक पाया गया। लिवर की बीमारी की गंभीरता का आंकलन करने के बाद दवाओं की डोज तय की गई। धीरे-धीरे मरीजों की पीलिया का स्तर कम हुआ। पेट में पानी बनने की प्रक्रिया भी खत्म हो गई। साथ ही खून की उल्टियां भी नहीं हुई।
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लखनऊ निवासी 40 वर्षीय मरीज को लिवर की गंभीर बीमारी थी। पीलिया, पेट में पानी और खून की उल्टियों समेत दूसरे लक्षणों के साथ उसे जनरल मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया था। मेडिसिन विभाग के डॉ. सुधीर वर्मा की निगरानी में मरीज का इलाज शुरू किया गया। शराब के अधिक पीने से लिवर की गंभीर बीमारी हुई थी। डॉक्टर ने मरीज के लिवर का हेपेटिक वेनस प्रेशर ग्रेडिएंट (एचवीपीजी) प्रेशर मापने की जरूरत बताई। जरूरी संसाधन जुटाने के बाद लिवर के प्रेशर जांचने की प्रक्रिया शुरू की।
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डॉ. सुधीर ने बताया कि मरीज के गर्दन के पास कैथेटर डाला गया। कैथेटर लिवर तक पहुंचाया गया। लिवर के भीतर खून की प्रमुख नस की सेहत की जांच की गई। इसमें लिवर का प्रेशर पांच के बजाय 17 एमएमएचजी पाया गया, जो सामान्य से काफी अधिक था। साथ ही फेफड़े और दिल की सेहत की भी जांच की गई। वह ठीक पाया गया। लिवर की बीमारी की गंभीरता का आंकलन करने के बाद दवाओं की डोज तय की गई। धीरे-धीरे मरीजों की पीलिया का स्तर कम हुआ। पेट में पानी बनने की प्रक्रिया भी खत्म हो गई। साथ ही खून की उल्टियां भी नहीं हुई।
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