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आवासीय योजनाओं में वर्षा जल संचयन पर जवाब दे एलडीए : हाईकोर्ट
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हाईकोर्ट।
लखनऊ। राजधानी के 88 गांवों में भूगर्भ जल की गंभीर कमी के मामले में हाईकोर्ट ने एलडीए से जवाब मांगा है। कोर्ट ने एलडीए से विभिन्न आवासीय योजनाओं में वर्षा जल संचयन के उपायों पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला उत्कर्ष लोकसेवा संस्थान की वर्ष 2016 में दायर जनहित याचिका से जुड़ा है, जो लखनऊ के कई इलाकों में पीने के पानी की आपूर्ति और भूगर्भ जल के घटते स्तर की समस्या को उजागर करती है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ कर रही है। केंद्रीय जल आयोग सहित अन्य पक्षकारों ने अपने जवाबी हलफनामे दाखिल कर दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि इनकी प्रतियां एलडीए के अधिवक्ता को उपलब्ध कराई जाएं। कोर्ट ने इन हलफनामों पर गौर करते हुए प्राधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और विशेष रूप से एलडीए से उसकी आवासीय योजनाओं में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था पर विस्तृत जानकारी मांगी है।
वहीं, राज्य सरकार ने अदालत को बताया है कि भूगर्भ जल की कमी की समस्या के अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान के लिए एक बैठक में प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकारी वकील ने अन्य विभागों की भूमिका को भी रेखांकित किया, जिसके बाद कोर्ट ने आवास एवं शहरी नियोजन विभाग व राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिवों को मामले में पक्षकार बनाने और उनसे जवाब तलब करने का निर्देश दिया है।
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न्यायालय का निर्देश और अगली सुनवाई
अक्टूबर 2025 में पिछली सुनवाई के दौरान, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित जल निगम के प्रबंध निदेशक रमाकांत पांडेय ने अदालत को बताया था कि लखनऊ के 88 गांवों में पीने के पानी की आपूर्ति के लिए उपलब्ध भूगर्भ जल अपर्याप्त है।
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मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ कर रही है। केंद्रीय जल आयोग सहित अन्य पक्षकारों ने अपने जवाबी हलफनामे दाखिल कर दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि इनकी प्रतियां एलडीए के अधिवक्ता को उपलब्ध कराई जाएं। कोर्ट ने इन हलफनामों पर गौर करते हुए प्राधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और विशेष रूप से एलडीए से उसकी आवासीय योजनाओं में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था पर विस्तृत जानकारी मांगी है।
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वहीं, राज्य सरकार ने अदालत को बताया है कि भूगर्भ जल की कमी की समस्या के अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान के लिए एक बैठक में प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकारी वकील ने अन्य विभागों की भूमिका को भी रेखांकित किया, जिसके बाद कोर्ट ने आवास एवं शहरी नियोजन विभाग व राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिवों को मामले में पक्षकार बनाने और उनसे जवाब तलब करने का निर्देश दिया है।
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न्यायालय का निर्देश और अगली सुनवाई
अक्टूबर 2025 में पिछली सुनवाई के दौरान, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित जल निगम के प्रबंध निदेशक रमाकांत पांडेय ने अदालत को बताया था कि लखनऊ के 88 गांवों में पीने के पानी की आपूर्ति के लिए उपलब्ध भूगर्भ जल अपर्याप्त है।