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Lucknow: अकबरनगर में दुकान व मकानों पर बुलडोजर चलाने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, बुलडोजर पहुंचा तो छलके आंसू

Fri, 22 Dec 2023 12:21 AM IST
ishwar ashish माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 22 Dec 2023 12:21 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अकबरनगर में दुकान व मकानों को ढहाने की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए अगले चार सप्ताह तक यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी।

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LDA and District administration buldozed the shops and houses in Akbarpur Lucknow.
दुकानों को तोड़ता बुलडोजर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से बृहस्पतिवार को शहर के अकबरनगर निवासियों को बड़ी राहत मिली। कोर्ट ने अकबर नगर एक व दो में एलडीए की ध्वस्तीकरण कारवाई पर रोक लगा दी। कोर्ट ने एलडीए को आदेश दिया कि वहां के लोगों को पुनर्वास योजना में आवेदन करने को समय दे। विस्थापित होने वालों के पुनर्वास की करवाई पूरी होने के बाद ही उनके खाली होने वाले परिसरों का कब्जा लिया जाए। इसके लिए 4 सप्ताह का समय देकर कोर्ट ने तबतक वहां ढहाने की करवाई पर रोक लगा दी। कोर्ट ने मामले में एलडीए व अन्य पक्षकारों को जवाब दाखिल करने का समय देकर अगली सुनवाई 22 जनवरी की नियत की है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि निवासियों के जीवन की स्वतंत्रता और जीविका के अधिकार का उल्लंघन न किया जाय।

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न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह आदेश अकबरनगर के करीब 50 लोगों की दाखिल 26 याचिकाओं पर दिया। इनमें मंडलायुक्त लखनऊ द्वारा याचियों की अपीलों को खारिज करने के आदेशों को चुनौती दी गई थी। साथ ही विस्थापित होने वाले निवासियों के पुनर्वास तक उन्हें बेदखल न करने और उनके परिसरों को ढहाने की जारी कारवाई पर रोक लगाने का आग्रह किया गया।

याचियों के वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप नारायण माथुर का कहना था कि अकबर नगर में लोग 40 - 50 साल से रह रहे हैं। वहां सड़कें बनी हैं, बिजली पानी की व्यवस्था की गई है। निवासी भवन कर भी अदा कर रहे हैं। ऐसे में उनके पुनर्वास के बगैर जल्दबाजी में उनके परिसरों का ध्वस्तीकरण किया जाना कानून की मंशा के खिलाफ है। इससे वहां के लोगों के जीवन और जीविका के अधिकार प्रभावित होते हैं। उधर, राज्य सरकार और एलडीए के वकीलों ने कहा कि अकबर नगर, नदी की तलछट वाली जमीन पर अवैध रूप से बसा है। जहां के लोगों का जमीन पर कोई मालिकाना हक नहीं है। ऐसे में वहां से लोगों को हटाकर परिसरों का ध्वस्तीकरण किया जा सकता है। काफी देर तक सुनवाई के बाद कोर्ट ने अकबर नगर एक व दो में जारी ध्वस्तीकरण की करवाई पर फिलहाल रोक लगा दी।
 

बुलडोजर पहुंचा तो छलके आंसू, हाईकोर्ट के आदेश ने दूर की उदासी

हजारों लोग और आशियाना छोड़कर जाने का गम। हर तरफ चेहरे पर मायूसी। मानो रात भर सो नहीं पाए हों। बृहस्पतिवार सुबह जिला प्रशासन, एलडीए, नगर निगम और पुलिस विभाग के अफसर बुलडोजर लेकर अकबरनगर पहुंचे तो लोग घरों से बाहर निकल आए। घरों की महिलाएं बिलखने लगीं और बोझिल मन से सामान समेटने में लग गईं। दोपहर बाद बस्ती को हाईकोर्ट का फैसला आया। इसकी जानकारी स्थानीय लोगों सहित महिलाओं को हुई तो मायूसी दूर हुई और इस बार खुशी से उनकी आंखें छलक पड़ीं।

अकबरनगर में सुबह से ही स्थानीय व्यापारी दुकानों के बाहर डटे थे। दुकानों के कर्मचारी भी मौजूद थे। प्रशासन ने सामान हटाने का दबाव बनाया, जिसके बाद दुकानें खुलने लगीं। यही नहीं बस्तियों से भी लोग सामान निकालने लगे। बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ अकबरनगर में जुटी रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस, पीएसी बल और सीआरपीएफ के जवान तैनात किए गए थे। पुलिस ने अकबरनगर के दोनों तरफ फैजाबाद रोड पर बैरिकेडिंग लगा दी और यातायात डायवर्ट कर दिया। अचानक से मुख्य मार्ग बंद करने से वाहनों की लंबी कतार लग गई। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने वाहनों को बंधे वाली सड़क की ओर मोड़ दिया। इसके बाद जाम खुलवाया।

अधिवक्ता ने सुनाया हाईकोर्ट का आदेश तो बजने लगे ढोल
हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी लेकर अधिवक्ता अकबरनगर पहुंचे। उन्होंने लोगों को बताया कि चार सप्ताह तक कार्रवाई पर रोक लग गई है और 22 जनवरी को अगली सुनवाई होगी। आदेश की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। यही नहीं, बड़ी संख्या में लोग घरों से निकलकर कॉलोनी की गली में एकत्र हो गए। लोगों ने हाथ में तिरंगा लेकर मुख्य मार्ग पर निकलने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस बल की सख्ती के कारण ये मुख्य मार्ग पर नहीं आ सके। कॉलोनी के भीतर लोगों ने पटाखे भी फोड़े। यही नहीं, ढोल नगाड़े बजाकर हाईकोर्ट के फैसले पर खुशी जताई।

भीड़ को खदेड़ा, कायम रही शांति व्यवस्था
इलाके में पूरे दिन सुरक्षा बल सक्रिय नजर आया। स्थानीय अभिसूचना इकाई भी अलर्ट रही। बीच-बीच में लोग मुख्य मार्ग पर इकट्ठा हुए, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने खदेड़ दिया। एलडीए वीसी इंद्रमणि त्रिपाठी माइक पर एनाउंस करते दिखे। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। उधर, डीसीपी मध्य अपर्णा रजत कौशिक, एडीसीपी पूर्वी अली अब्बास व एडीएम वित्त-राजस्व राकेश कुमार सिंह ने व्यापारियों से बात कर दुकानों से सामान निकालने के लिए कहा, ताकि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सके। हालांकि, हाईकोर्ट के फैसले के बाद अमला वापस लौट गया।

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