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केजीएमयू में लेजर विधि से होगा गुर्दे की पथरी का ऑपरेशन
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केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में एक बार फिर से गुर्दे की पथरी का लेजर विधि से ऑपरेशन हो सकेगा। विभाग में पीपीपी मॉडल पर स्थापित लीथोट्रिप्सी मशीन संचालन के लिए टेंडर होने के बाद अब इसे स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पूर्व में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर स्थापित मशीन का संचालन टेंडर फीस बंटवारे की राशि को लेकर फंसा हुआ था। इसका समाधान होने के बाद अब मशीन स्थापित की जा रही है। इसी महीने से इसका संचालन शुरू होने की उम्मीद है।
अभी लखनऊ के किसी भी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में स्थापित लीथोट्रिप्सी मशीन से हर महीने 50 से 60 मरीजों का लेजर विधि से ऑपरेशन हो रहा था। मशीन बंद होने की वजह से मरीज या तो ओपन सर्जरी कराते हैं या फिर निजी संस्थानों का रुख कर रहे हैं। पूर्व की शर्तों के अनुसार इससे होने वाली आय तीन हिस्सों कंपनी, केजीएमयू और विभाग में बांटी जाती थी। विवि के विभागों में लागू व्यवस्था के अनुसार पीपीपी मॉडल पर हुए काम से मिली फीस का बंटवारा सिर्फ केजीएमयू और संबंधित कंपनी के बीच ही होता है। इसका समाधान होने के बाद अब इसके स्थापित होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस मशीन के माध्यम से बिना चीरा लगाए आसानी से स्टोन को बाहर निकाला जा सकता है। लीथोट्रिप्सी तकनीक में ध्वनि तरंगों का उपयोग करके किडनी की पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर दवाई देकर पेशाब के रास्ते निकाल दिया जाता है।
छोटी पथरी के लिए दूरबीन विधि का उपयोग
मशीन खराब होने की वजह से संस्थान में छोटे आकार की पथरी दूरबीन विधि से निकाल ली जाती है, लेकिन बड़ी पथरी निकालने के लिए ओपन सर्जरी की जाती है। इससे परहेज करने वालों को अन्य संस्थान जाने के लिए कहा जा रहा है।
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लीथोट्रिप्सी मशीन स्थापित करने का काम शुरू हो गया है। इस महीने के आखिर तक इसका संचालन शुरू हो जाएगा। इसके बाद मरीजों को काफी सहूलियत हो जाएगी।
- डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू
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अभी लखनऊ के किसी भी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में स्थापित लीथोट्रिप्सी मशीन से हर महीने 50 से 60 मरीजों का लेजर विधि से ऑपरेशन हो रहा था। मशीन बंद होने की वजह से मरीज या तो ओपन सर्जरी कराते हैं या फिर निजी संस्थानों का रुख कर रहे हैं। पूर्व की शर्तों के अनुसार इससे होने वाली आय तीन हिस्सों कंपनी, केजीएमयू और विभाग में बांटी जाती थी। विवि के विभागों में लागू व्यवस्था के अनुसार पीपीपी मॉडल पर हुए काम से मिली फीस का बंटवारा सिर्फ केजीएमयू और संबंधित कंपनी के बीच ही होता है। इसका समाधान होने के बाद अब इसके स्थापित होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस मशीन के माध्यम से बिना चीरा लगाए आसानी से स्टोन को बाहर निकाला जा सकता है। लीथोट्रिप्सी तकनीक में ध्वनि तरंगों का उपयोग करके किडनी की पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर दवाई देकर पेशाब के रास्ते निकाल दिया जाता है।
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छोटी पथरी के लिए दूरबीन विधि का उपयोग
मशीन खराब होने की वजह से संस्थान में छोटे आकार की पथरी दूरबीन विधि से निकाल ली जाती है, लेकिन बड़ी पथरी निकालने के लिए ओपन सर्जरी की जाती है। इससे परहेज करने वालों को अन्य संस्थान जाने के लिए कहा जा रहा है।
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लीथोट्रिप्सी मशीन स्थापित करने का काम शुरू हो गया है। इस महीने के आखिर तक इसका संचालन शुरू हो जाएगा। इसके बाद मरीजों को काफी सहूलियत हो जाएगी।
- डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू