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गाजियाबाद में जमीन घोटाले का मामला : कम रेट में निजी सोसायटियों को दे दी गई जमीन, जांच में हुआ खुलासा

Mon, 17 Jul 2023 10:52 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 17 Jul 2023 10:52 PM IST
सार

आवास विकास परिषद की गाजियाबाद स्थित सिद्धार्थ विहार योजना में आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने खुले हाथ से निजी सोसाटियों को जमीन कम रेट पर दे दी। इसका इसका जिक्र मेरठ की मंडलायुक्त की रिपोर्ट में भी है। 

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Land scam case in Ghaziabad: Land given to private societies at low rate
जमीन घोटाला (सांकेतिक तस्वीर)

विस्तार

आवास विकास परिषद की गाजियाबाद स्थित सिद्धार्थ विहार योजना में आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने खुले हाथ से निजी सोसाइटियों को जमीन कम रेट पर दे दी। इसका जिक्र मेरठ की मंडलायुक्त की रिपोर्ट में भी है। रिपोर्ट में आवास विकास परिषद के कई अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। लेकिन, हैरानी की बात ये है कि 23 मार्च को भेजी गई रिपोर्ट का आवास आयुक्त ने अभी तक अध्ययन तक नहीं किया है। इसी आधार पर उन्होंने सोमवार को अपर मुख्य सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण द्वारा बुलाई गई बैठक में समय मांग लिया है। आवास आयुक्त ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए एसीएस से 15 दिन का और समय मांगा है ।

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इस प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए एसीएस आवास ने एसआईटी गठित कर दी है। इससे आवास विकास परिषद के अधिकारियों में खलबली मच गई है । वहीं, गोकर्ण ने सोमवार को इस मामले में आगे की कार्रवाई के संबंध में बैठक बुलाई थी। अपर मुख्य सचिव आवास ने सोमवार को आवास आयुक्त को इस पर आगे की कार्रवाई के लिए बैठक में बुलाया था, लेकिन बताया जा रहा है कि आवास आयुक्त ने पूरी रिपोर्ट का अध्ययन न कर पाने की वजह से 15 दिन का समय मांग लिया है।
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बता दें कि गाजियाबाद में आवास विकास परिषद की सिद्धार्थ विहार योजना में सहकारी आवास, आदर्श सहकारिता आवास, आदर्श नगर प्रगतिशील, लोकसभा कर्मचारी, एनएमएस, केन्द्रीय जल आयोग, उत्तर रेलवे, काश्मो सहकारिता, दूर संचार समेत कई निजी सोसायटियों को जमीन का आवटंन किया गया था । इस संबंध में शिकायत की गई थी कि इन सोसायटियों को तय अनुपात से अधिक जमीन दी गई है वह भी कम रेट पर । शासन से की गई शिकायत में में आवास विकास परिषद के कई अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे ।
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शिकायतों के आधार शासन ने बीते साल मई में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। जिसमें तत्कालीन अपर आवास आयुक्त उदयभानु त्रिपाठी, डीएम गाजियाबाद और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के वित्त नियंत्रक और संयुक्त आवास आयुक्त शामिल थे। समिति ने प्रकरण की जांच करके जुलाई के अंत में शासन को रिपोर्ट सौंप दी थी । प्रारंभिक जांच में शिकायतों की पुष्टि होने के बाद अपर मुख्य सचिव आवास ने मेरठ के मंडलायुक्त को जांच सौंपते हुए रिपोर्ट मांगी थी। मंडलायुक्त ने भी इसी वर्ष 22 मार्च को रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी, जिसका परीक्षण करने के लिए आवास आयुक्त को भेज दिया गया था।

इसी कड़ी में अपर मुख्य सचिव आवास ने बैठक बुलाई थी, लेकिन आवास आयुक्त ने अब तक रिपोर्ट का अध्ययन न करने की बात कहकर समय मांग लिया है। उधर सूत्रों का कहना है कि इस प्रकरण में एसीएस की सख्ती को देखते हुए अब लीपापोती शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि इस प्रकरण में आवास विकास परिषद के कई अफसरों की गर्दन फंस रही है।


'इस संबंध में बैठक बुलाई थी, लेकिन आवास विकास परिषद के अधिकारी तैयारी से नहीं आए थे। आवास आयुक्त ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए समय मांग लिया है। इस प्रकरण में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ' - नितिन रमेश गोकर्ण, अपर मुख्य सचिव आवास

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