बाबू सिंह कुशवाहा सहित कई अफसरों पर केस
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बसपा सरकार में हुए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) में करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले में आखिरकार पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ मुकदमा चलाने को सरकार ने हरी झंडी दे दी।
इस मामले में कुशवाहा समेत 11 के खिलाफ केस दर्ज होगा। इनमें से चार आईएएस अफसर हैं। केस की विवेचना करीब एक साल पहले पूरी हो चुकी है। अदालत के आदेश के बाद विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) ने इस घोटाले की जांच की थी।
इसमें तत्कालीन मंत्री और यूपीएसआईडीसी के अध्यक्ष बाबू सिंह कुशवाहा और अफसरों ने गाजियाबाद में 18 व्यावसायिक भूखंडों के भू-उपयोग परिवर्तन में धांधली सामने आई। एसआईटी ने मुकदमा दर्ज करने की इजाजत मांगी थी।
प्रमुख सचिव (गृह) देवाशीष पांडा की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक के बाद कुशवाहा और अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मंजूरी दे दी गई है।
ये लोग होंगे नामजद
घोटाले के दौरान तैनात रहे विशेष सचिव खनन अनवारुल हक, विशेष सचिव खनन मुकेश गुप्ता (आईएएस), संयुक्त प्रबंध निदेशक तपेंद्र प्रसाद (आईएएस), प्रबंध निदेशक एसके वर्मा ,वरिष्ठ प्रबंधक केके यादव, सीडा प्रभारी मनमोहन, अधिशासी अभियंता संजय तिवारी और गाजियाबाद के क्षेत्रीय प्रबंधक व मुख्य अभियंता आरके चौहान।
बसपा सरकार में हुए यूपीएसआईडीसी में करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले में एसआईटी ने एक बार पहले भी राज्य सरकार से मुकदमा दर्ज करने की इजाजत मांग चुकी है। इजाजत तो नहीं दी गई अलबत्ता उससे विभिन्न बिंदुओं पर रिपोर्ट मांग ली गई थी।
वहीं जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद से एक साल से एसआईटी इजाजत मिलने का इंतजार कर रही थी। अदालत ने इस मामले में छह माह में जांच पूरा करने को कहा था। जांच में हो रही देरी पर अदालत ने नाराजगी भी जताई थी।
तपेन्द्र सिंह रह चुके हैं मंत्री
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी कई महीनों तक इसे दबाए रखने पर तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव को जुलाई में अदालत में हाजिर होकर सफाई देनी पड़ी थी।
आरोपी सेवानिवृत्त आईएएस तपेन्द्र प्रसाद दर्जाधारी मंत्री भी रह चुके हैं। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। उन्हें प्रशासनिक सुधार विभाग का सलाहकार बनाकर मंत्री का दर्जा दिया गया था।
यूपीएसआईडीसी द्वारा आवंटित किए वाने वाले भूखंडों का भू-उपयोग परिवर्तित करने का अधिकार सरकार ने यूपी स्टेट इंडस्ट्रियल डवलपमेंट अथॉरिटी को सौंपा हुआ था। जिन 18 भूखंडों के भू-उपयोग परिवर्तन में अनियमितता पाई गई वह सभी यूपीएसआईडीसी से जारी आदेश पर हुए।
इसके लिए बुलाई जाने वाली बैठकों में शासन का एक प्रतिनिधि भी शामिल होता था। बाबू सिंह कुशवाहा तत्कालीन खनन मंत्री भी थे और वह विभाग के विशेष सचिव को इसमें शामिल होने के लिए भेज देते थे।