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बजट मिलता तो कुकरैल को मिल जाता नया जीवन, नदी में नालों का बहाव रोक प्राकृतिक तरीके से दिया जाना था पुनर्जीवन
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कुदरती सफाई के बाद कुकरैल वनक्षेत्र में कुकरैल नाले की तस्वीर, फोटो वन अधिकारी के सौजन्य से
- फोटो : LKO CITY
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कुकरैल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 2020 की शुरुआत में तत्कालीन मंडलायुक्त मुकेश मेश्राम ने नदी में नाले गिरने से रोकने व प्राकृतिक तरीके से पानी साफ करने की कार्ययोजना बनाई थी। इस पर काम शुरू होता तो कुकरैल को नया जीवन मिलता और गोमती की भी हालत कुछ सुधर जाती।
गोमती की सहायक कुकरैल नदी अब नगर निगम के रिकॉर्ड में नाला बन चुकी है। यह मौके पर तो नदी के स्वरूप में ही है, लेकिन इसमें साफ पानी की जगह नालों का गंदा पानी, साफ सुथरे तटों की जगह अतिक्रमण, जानवरों के तबेलेे और हरियाली की जगह कूड़ा पटा पड़ा है। इन हालात को प्राकृतिक तरीकों से ठीक करना था। इसमें पानी साफ करने वाले पौधों से लेकर अतिक्रमण हटाने जैसे काम होते, लेकिन मंडलायुक्त के तबादले के साथ यह कार्ययोजना फाइलों में दब गई। इसे अब भी बहुत कम बजट में शुरू किया जा सकता है।
तीन चरणों में होना था काम
पहले चरण में कुकरैल के दोनों किनारों को अतिक्रमण व अवैध कब्जे से मुक्त कराते हुए समतलीकरण कराना था। दूसरे चरण में दोनों किनारों पर पौधरोपण कर ग्रीन बेल्ट जोन विकसित कराने और वाटर रिचार्जिंग के साथ कुकरैल में नालों का गंदा पानी रोकना था। तीसरे चरण में इसमें पानी के बहाव में निरंतरता बनाए रखने का का होना था। तीनों चरण का काम करीब एक साल में पूरा हो जाता और अब तक नदी कलकल बह रही होती।
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डीपीआर तक नहीं बन सकी
तत्कालीन मंडलायुक्त मुकेश मेश्राम ने 2020 में इस कार्ययोजना का डीपीआर तैयार कर आवास विभाग को सौंपने की जिम्मेदारी संयुक्त तौर पर गठित जिला प्रशासन, नगर निगम, सिंचाई विभाग व वन विभाग की समन्वय समिति को सौंपी थी। ताकि खर्च का आकलन कर राशि का प्रावधान प्रस्तावित बजट में कराया जा सके, लेकिन यह डीपीआर अभी तक नहीं बन सकी। सिंचाई विभाग के अभियंताओं को नदी के बहाव स्थल का निरीक्षण कर इसकी निरंतरता बनाए रखने की जिम्मेदारी संभाल बहाव मार्ग में अड़ंगा बनने वाली रुकावट को दूर कराना था।
कोरोना काल नें लगाया पूरी योजना पर ब्रेक
डीपीआर तैयार होने से पहले ही कोरोना की दस्तक से कार्ययोजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। आवास विभाग से लेकर क्रियान्वयन की निगरानी से जुड़ा मंडलायुक्त कार्यालय भी इस प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ा सका। अब फिर से इस प्रोजेक्ट को जमीन पर लाने की कवायद शुरू हुई है।
गोमती की सहयोगी है कुकरैल
कुकरैल नदी एक प्राकृतिक जल स्रोत है। यह गोमती की सहायक नदी है। कुकरैल वन क्षेत्र से निकलकर निशातगंज के पास यह गोमती में मिलती है। दो दशक पहले तक इसमें साफ पानी बहता था। इससे गोमती को जहां पानी मिलता, वहीं भूगर्भ जल रीचार्ज में भी मदद मिलती थी। अब यह नाले में तब्दील हो चुकी है। इसका पुनर्जीवन जरूरी है।
- प्रो. वेंकटेश दत्ता, पर्यावरण विज्ञान विभाग, बीबीएयू
पानी में थे औषधीय गुण
15 साल पहले जब किसी को कुत्ता काट लेता था तो उसे कुकरैल नदी के पानी से नहलाया जाता था। इससे लोग ठीक भी हो जाते थे। नदी के आसपास आबादी बढ़ने व इसमें नाला और कूड़ा गिराने से इसकी हालत बदतर हो गई है। शारदा नहर से यहां पानी भी छोड़ा जाता हैं, लेकिन इसका फायदा कुकरैल नदी को नहीं मिलता है।
- ऋद्धि गौड़, एक्टिविस्ट, गोमती नदी
पुनर्जीवित की जाए नदी
कुकरैल के सौंदर्यीकरण से जुड़े इस ड्रीम प्रोजेक्ट का खाका नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन की प्रेरणा से तैयार हुआ था। इस पर खर्च होने वाली राशि को बजट प्रावधान में शामिल कराने की जिम्मेदारी आवास विभाग की थी। बीते साल कोरोना के चलते इस प्रोजेक्ट पर ज्यादा कुछ नहीं हो पाया, लेकिन इस बार उम्मीद है कि कुकरैल नदी के पुनर्जीवन की इस योजना के खर्च को बजट में स्वीकृति मिल जाएगी। बीते साल इस प्रोजेक्ट के तहत कुकरैल के दोनों किनारों पर डामरयुक्त रोड बनाने को ही कुछ धनराशि मिल पाई थी।
मुकेश मेश्राम, प्रमुख सचिव पर्यटन व तत्कालीन मंडलायुक्त
जल्दी शुरू होगा प्रोजेक्ट पर काम
कुकरैल सौंदर्यीकरण की पूरी कार्ययोजना का क्रियान्वयन आवास विभाग के स्तर पर स्वीकृत बजट प्रावधान के बाद नगर निगम को कार्यदायी संस्था के बतौर कराना था। बीते साल बजट प्रावधान न हो पाने से इसकी शुरुआत नहीं हो सकी। प्रस्तावित बजट सत्र में इस कार्ययोजना के अनुमोदन बाद प्रोजेक्ट शुरू कराया जा सकेगा।
रंजन कुमार, मंडलायुक्त
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गोमती की सहायक कुकरैल नदी अब नगर निगम के रिकॉर्ड में नाला बन चुकी है। यह मौके पर तो नदी के स्वरूप में ही है, लेकिन इसमें साफ पानी की जगह नालों का गंदा पानी, साफ सुथरे तटों की जगह अतिक्रमण, जानवरों के तबेलेे और हरियाली की जगह कूड़ा पटा पड़ा है। इन हालात को प्राकृतिक तरीकों से ठीक करना था। इसमें पानी साफ करने वाले पौधों से लेकर अतिक्रमण हटाने जैसे काम होते, लेकिन मंडलायुक्त के तबादले के साथ यह कार्ययोजना फाइलों में दब गई। इसे अब भी बहुत कम बजट में शुरू किया जा सकता है।
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तीन चरणों में होना था काम
पहले चरण में कुकरैल के दोनों किनारों को अतिक्रमण व अवैध कब्जे से मुक्त कराते हुए समतलीकरण कराना था। दूसरे चरण में दोनों किनारों पर पौधरोपण कर ग्रीन बेल्ट जोन विकसित कराने और वाटर रिचार्जिंग के साथ कुकरैल में नालों का गंदा पानी रोकना था। तीसरे चरण में इसमें पानी के बहाव में निरंतरता बनाए रखने का का होना था। तीनों चरण का काम करीब एक साल में पूरा हो जाता और अब तक नदी कलकल बह रही होती।
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डीपीआर तक नहीं बन सकी
तत्कालीन मंडलायुक्त मुकेश मेश्राम ने 2020 में इस कार्ययोजना का डीपीआर तैयार कर आवास विभाग को सौंपने की जिम्मेदारी संयुक्त तौर पर गठित जिला प्रशासन, नगर निगम, सिंचाई विभाग व वन विभाग की समन्वय समिति को सौंपी थी। ताकि खर्च का आकलन कर राशि का प्रावधान प्रस्तावित बजट में कराया जा सके, लेकिन यह डीपीआर अभी तक नहीं बन सकी। सिंचाई विभाग के अभियंताओं को नदी के बहाव स्थल का निरीक्षण कर इसकी निरंतरता बनाए रखने की जिम्मेदारी संभाल बहाव मार्ग में अड़ंगा बनने वाली रुकावट को दूर कराना था।
कोरोना काल नें लगाया पूरी योजना पर ब्रेक
डीपीआर तैयार होने से पहले ही कोरोना की दस्तक से कार्ययोजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। आवास विभाग से लेकर क्रियान्वयन की निगरानी से जुड़ा मंडलायुक्त कार्यालय भी इस प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ा सका। अब फिर से इस प्रोजेक्ट को जमीन पर लाने की कवायद शुरू हुई है।
गोमती की सहयोगी है कुकरैल
कुकरैल नदी एक प्राकृतिक जल स्रोत है। यह गोमती की सहायक नदी है। कुकरैल वन क्षेत्र से निकलकर निशातगंज के पास यह गोमती में मिलती है। दो दशक पहले तक इसमें साफ पानी बहता था। इससे गोमती को जहां पानी मिलता, वहीं भूगर्भ जल रीचार्ज में भी मदद मिलती थी। अब यह नाले में तब्दील हो चुकी है। इसका पुनर्जीवन जरूरी है।
- प्रो. वेंकटेश दत्ता, पर्यावरण विज्ञान विभाग, बीबीएयू
पानी में थे औषधीय गुण
15 साल पहले जब किसी को कुत्ता काट लेता था तो उसे कुकरैल नदी के पानी से नहलाया जाता था। इससे लोग ठीक भी हो जाते थे। नदी के आसपास आबादी बढ़ने व इसमें नाला और कूड़ा गिराने से इसकी हालत बदतर हो गई है। शारदा नहर से यहां पानी भी छोड़ा जाता हैं, लेकिन इसका फायदा कुकरैल नदी को नहीं मिलता है।
- ऋद्धि गौड़, एक्टिविस्ट, गोमती नदी
पुनर्जीवित की जाए नदी
कुकरैल के सौंदर्यीकरण से जुड़े इस ड्रीम प्रोजेक्ट का खाका नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन की प्रेरणा से तैयार हुआ था। इस पर खर्च होने वाली राशि को बजट प्रावधान में शामिल कराने की जिम्मेदारी आवास विभाग की थी। बीते साल कोरोना के चलते इस प्रोजेक्ट पर ज्यादा कुछ नहीं हो पाया, लेकिन इस बार उम्मीद है कि कुकरैल नदी के पुनर्जीवन की इस योजना के खर्च को बजट में स्वीकृति मिल जाएगी। बीते साल इस प्रोजेक्ट के तहत कुकरैल के दोनों किनारों पर डामरयुक्त रोड बनाने को ही कुछ धनराशि मिल पाई थी।
मुकेश मेश्राम, प्रमुख सचिव पर्यटन व तत्कालीन मंडलायुक्त
जल्दी शुरू होगा प्रोजेक्ट पर काम
कुकरैल सौंदर्यीकरण की पूरी कार्ययोजना का क्रियान्वयन आवास विभाग के स्तर पर स्वीकृत बजट प्रावधान के बाद नगर निगम को कार्यदायी संस्था के बतौर कराना था। बीते साल बजट प्रावधान न हो पाने से इसकी शुरुआत नहीं हो सकी। प्रस्तावित बजट सत्र में इस कार्ययोजना के अनुमोदन बाद प्रोजेक्ट शुरू कराया जा सकेगा।
रंजन कुमार, मंडलायुक्त