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Lucknow News: खादी... स्वदेशी की खुशबू, आत्मनिर्भरता की पहचान
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लखनऊ। भदोही के कालीन हों या वाराणसी की रेशमी साड़ियां, प्रतापगढ़ का आंवला मुरब्बा हो या माटी कला के आकर्षक बर्तन... स्वदेशी उत्पादों की यह विविधता गोमती नगर स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में सजी 10 दिवसीय मंडल स्तरीय खादी एवं ग्रामोद्योग प्रदर्शनी-2025 में देखने को मिल रही है।
प्रदर्शनी का शुभारंभ वित्त एवं प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने फीता काटकर किया। उन्होंने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और कारीगरों से संवाद भी किया। कहा कि खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि देश की आजादी, स्वदेशी सोच और स्वावलंबन का प्रतीक है। महात्मा गांधी के विचार आज ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प में साकार हो रहे हैं। सरकार खादी एवं ग्रामोद्योग के माध्यम से रोजगार सृजन और स्वरोजगार को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से आयोजित यह प्रदर्शनी 27 दिसंबर तक चलेगी। इसमें खादी, ग्रामोद्योग और माटी कला से जुड़े कुल 130 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से आए उद्यमी अपने हस्तनिर्मित और स्वदेशी उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। प्रदर्शनी का उद्देश्य कारीगरों और छोटे उद्यमियों को सीधे बाजार से जोड़ना और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाना है।
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कार्यक्रम में बोर्ड के संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी अजय पाल यादव, वित्तीय सलाहकार मानवेंद्र सिंह, परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी अजयपाल, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी अवधेश गौतम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
बीकानेरी पापड़ से लेकर बनारसी रेशम तक
प्रदर्शनी में बीकानेरी पापड़-नमकीन, ऊनी कोट-चादरें, हस्तकला आधारित वस्त्र, लेदर उत्पाद दर्शकों को खूब लुभा रहे हैं।
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प्रदर्शनी का शुभारंभ वित्त एवं प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने फीता काटकर किया। उन्होंने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और कारीगरों से संवाद भी किया। कहा कि खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि देश की आजादी, स्वदेशी सोच और स्वावलंबन का प्रतीक है। महात्मा गांधी के विचार आज ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प में साकार हो रहे हैं। सरकार खादी एवं ग्रामोद्योग के माध्यम से रोजगार सृजन और स्वरोजगार को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
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उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से आयोजित यह प्रदर्शनी 27 दिसंबर तक चलेगी। इसमें खादी, ग्रामोद्योग और माटी कला से जुड़े कुल 130 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से आए उद्यमी अपने हस्तनिर्मित और स्वदेशी उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। प्रदर्शनी का उद्देश्य कारीगरों और छोटे उद्यमियों को सीधे बाजार से जोड़ना और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाना है।
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कार्यक्रम में बोर्ड के संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी अजय पाल यादव, वित्तीय सलाहकार मानवेंद्र सिंह, परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी अजयपाल, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी अवधेश गौतम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
बीकानेरी पापड़ से लेकर बनारसी रेशम तक
प्रदर्शनी में बीकानेरी पापड़-नमकीन, ऊनी कोट-चादरें, हस्तकला आधारित वस्त्र, लेदर उत्पाद दर्शकों को खूब लुभा रहे हैं।