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प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में भी प्लाज्मा थेरेपी शुरू कराएगा केजीएमयू
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प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में भी प्लाज्मा थेरेपी शुरू कराएगा केजीएमयू
प्लाज्मा थेरेपी के नतीजों से उत्साहित प्रदेश सरकार ने केजीएमयू को स्टेट नोडल सेंटर बनाया है। अब यह प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों के साथ निजी मेडिकल कॉलेजों में भी प्लाज्मा थेरेपी शुरू कराएगा।
पहले चरण में सेंटर से चार संस्थान और छह मेडिकल कॉलेज जोड़े गए हैं। धीरे-धीरे इसमें विस्तार होगा। केजीएमयू सभी सेंटरों को गाइडलाइन देने के साथ थेरेपी के प्रभाव का डाटाबेस भी तैयार करेगा।
प्रदेश में प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत 26 अप्रैल को केजीएमयू से हुई। पहली थेरेपी उरई के डॉक्टर को दी गई। हालांकि उसे बचाया नहीं जा सका।
लेकिन इसके बाद केजीएमयू को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से कराए प्लाज्मा थेरेपी के ट्रायल में शामिल होने का मौका मिला।
इसके पूरा होने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों को प्लाज्मा थेरेपी देने की अनुमति दे दी है। राजधानी में केजीएमयू सहित कई चिकित्सा संस्थानों में थेरेपी दी जा रही है।
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इससे 60 से 80 फीसदी तक गंभीर मरीजों को लाभ मिला है। जिनका उपचार चल रहा है, उनकी रिकवरी की स्थिति बेहतर हुई है।
कहां, कितने को दी गई थेरेपी
केजीएमयू में 155 लोग प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं। यहां 80 मरीजों को थेरेपी दी गई है। वहीं, 15 यूनिट पीजीआई, छह यूनिट बीएचयू, एक यूनिट आगरा के अलावा कई अस्पतालों को प्लाज्मा उपलब्ध कराया गया। पीजीआई में 28 लोगों ने प्लाज्मा दान किया है, लेकिन यहां 46 मरीजों को थेरेपी दी जा चुकी है। लोहिया संस्थान में 10 को प्लाज्मा थेरेपी दी गई है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर में 110 लोगों ने प्लाज्मा डोनेशन किया है, जिसमें 100 मरीजों को थेरेपी दी जा चुकी है।
सेंटर बनने से यह होगा फायदा
अभी तक सभी मेडिकल कॉलेज और चिकित्सा संस्थान अपने हिसाब से मरीजों की स्थिति अनुसार प्लाज्मा थेरेपी दे रहे हैं। प्रदेश सरकार चाहती है कि थेरेपी की पुख्ता गाइडलाइन तैयार की जाए और इसके नतीजों का नए सिरे से मूल्यांकन हो। इसके लिए केजीएमयू को नोडल सेंटर बनाना है। यह सभी मेडिकल कॉलेजों को टेक्निकल गाइडेंस देगा। प्लाज्मा थेरेपी की मॉनिटरिंग और उसके आधार पर बेस्ट प्रैक्टिस को विकसित करने, प्रदेश में प्लाज्मा बैंक स्थापित कराने, डाटाबेस तैयार करने, थेरेपी की नई नीति तैयार कराने में योगदान देगा। सेंटर हर सप्ताह चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक को रिपोर्ट देंगे।
पहले चरण में ये सेंटर होंगे शामिल
केजीएमयू, पीजीआई, लोहिया संस्थान, जिम्स नोएडा के अलावा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर, एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा, एमएलएन मेडिकल कॉलेज प्रयागराज, एमएलबी मेडिकल कॉलेज झांसी, बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ पहले चरण में शामिल हैं। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई को भी शामिल किया जाएगा। बाद में प्रदेश के कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों में भी प्लाज्मा बैंक बनाया जाएगा।
प्लाज्मा थेरेपी से मृत्युदर में नहीं आई कमी
आईसीएमआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्लाज्मा थेरेपी से मृत्युदर में कमी नहीं आई है। हालांकि, अभी तक साइड इफेक्ट नहीं मिले हैं। इसके बाद थेरेपी को लेकर सवाल खड़े किए गए, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट उस आधार पर है, जब देश में प्लाज्मा थेरेपी शुरुआती दौर में थी। नतीजे डोनर सलेक्शन, मरीजों की स्थिति, प्लाज्मा देने की अवधि सहित कई पहलुओं पर निर्भर करता है। समय बीतने के साथ थेरेपी के बारे में विशेषज्ञों की भी जानकारी बढ़ी है। ऐसे में अब नतीजे बेहतर आ रहे हैं। एसजीपीजीआई के डॉ. अनुपम वर्मा ने बताया कि जो मरीज मध्यम स्थिति में पहुंच रहे हैं, ऑक्सीजन की जरूरत लगातार बढ़ रही है। फेफड़ों में संक्रमण लगातार बढ़ रहा है और अंदेशा है कि अब वेंटिलेटर पर लेना पड़ेगा, उन्हें तत्काल प्लाज्मा थेरेपी मिल जाए तो रिकवरी बेहतर हो रही है। जो मरीज वेंटिलेटर पर चले जा रहे हैं और फिर थेरेपी दी जा रही है तो उन्हें बचाना कठिन हो जाता है।
यूएस की रिपोर्ट में सकारात्मक नतीजे
लॉसेट में प्रकाशित यूएसए की शोध रिपोर्ट में कहा गया कि प्लाज्मा थेरेपी के बाद 49 फीसदी मरीजों की स्थिति में सुधार हुआ। 18 प्रतिशत की मौत हो गई। इसी तरह करीब 26 फीसदी मरीजों को वेंटिलेटर पर जाने से रोकने में मदद मिली।
डाटाबेस तैयार कराने में होगी आसानी
केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि केजीएमयू को नोडल सेंटर बनाने से प्लाज्मा थेरेपी का डाटाबेस तैयार कराने में आसानी होगी। मुझे स्टेट फोकल प्वाइंट के रूप में काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रयास होगा कि ज्यादा से ज्यादा सेंटरों पर प्लाज्मा बैंक बने। प्लाज्मा के नतीजे सकारात्मक हैं। इसका इस्तेमाल अन्य दवाओं की तरह ही किया जा रहा है। प्लाज्मा देने का मतलब यह नहीं है कि जान शत प्रतिशत बचना तय है।
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प्लाज्मा थेरेपी के नतीजों से उत्साहित प्रदेश सरकार ने केजीएमयू को स्टेट नोडल सेंटर बनाया है। अब यह प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों के साथ निजी मेडिकल कॉलेजों में भी प्लाज्मा थेरेपी शुरू कराएगा।
पहले चरण में सेंटर से चार संस्थान और छह मेडिकल कॉलेज जोड़े गए हैं। धीरे-धीरे इसमें विस्तार होगा। केजीएमयू सभी सेंटरों को गाइडलाइन देने के साथ थेरेपी के प्रभाव का डाटाबेस भी तैयार करेगा।
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प्रदेश में प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत 26 अप्रैल को केजीएमयू से हुई। पहली थेरेपी उरई के डॉक्टर को दी गई। हालांकि उसे बचाया नहीं जा सका।
लेकिन इसके बाद केजीएमयू को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से कराए प्लाज्मा थेरेपी के ट्रायल में शामिल होने का मौका मिला।
इसके पूरा होने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों को प्लाज्मा थेरेपी देने की अनुमति दे दी है। राजधानी में केजीएमयू सहित कई चिकित्सा संस्थानों में थेरेपी दी जा रही है।
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इससे 60 से 80 फीसदी तक गंभीर मरीजों को लाभ मिला है। जिनका उपचार चल रहा है, उनकी रिकवरी की स्थिति बेहतर हुई है।
कहां, कितने को दी गई थेरेपी
केजीएमयू में 155 लोग प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं। यहां 80 मरीजों को थेरेपी दी गई है। वहीं, 15 यूनिट पीजीआई, छह यूनिट बीएचयू, एक यूनिट आगरा के अलावा कई अस्पतालों को प्लाज्मा उपलब्ध कराया गया। पीजीआई में 28 लोगों ने प्लाज्मा दान किया है, लेकिन यहां 46 मरीजों को थेरेपी दी जा चुकी है। लोहिया संस्थान में 10 को प्लाज्मा थेरेपी दी गई है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर में 110 लोगों ने प्लाज्मा डोनेशन किया है, जिसमें 100 मरीजों को थेरेपी दी जा चुकी है।
सेंटर बनने से यह होगा फायदा
अभी तक सभी मेडिकल कॉलेज और चिकित्सा संस्थान अपने हिसाब से मरीजों की स्थिति अनुसार प्लाज्मा थेरेपी दे रहे हैं। प्रदेश सरकार चाहती है कि थेरेपी की पुख्ता गाइडलाइन तैयार की जाए और इसके नतीजों का नए सिरे से मूल्यांकन हो। इसके लिए केजीएमयू को नोडल सेंटर बनाना है। यह सभी मेडिकल कॉलेजों को टेक्निकल गाइडेंस देगा। प्लाज्मा थेरेपी की मॉनिटरिंग और उसके आधार पर बेस्ट प्रैक्टिस को विकसित करने, प्रदेश में प्लाज्मा बैंक स्थापित कराने, डाटाबेस तैयार करने, थेरेपी की नई नीति तैयार कराने में योगदान देगा। सेंटर हर सप्ताह चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक को रिपोर्ट देंगे।
पहले चरण में ये सेंटर होंगे शामिल
केजीएमयू, पीजीआई, लोहिया संस्थान, जिम्स नोएडा के अलावा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर, एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा, एमएलएन मेडिकल कॉलेज प्रयागराज, एमएलबी मेडिकल कॉलेज झांसी, बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ पहले चरण में शामिल हैं। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई को भी शामिल किया जाएगा। बाद में प्रदेश के कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों में भी प्लाज्मा बैंक बनाया जाएगा।
प्लाज्मा थेरेपी से मृत्युदर में नहीं आई कमी
आईसीएमआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्लाज्मा थेरेपी से मृत्युदर में कमी नहीं आई है। हालांकि, अभी तक साइड इफेक्ट नहीं मिले हैं। इसके बाद थेरेपी को लेकर सवाल खड़े किए गए, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट उस आधार पर है, जब देश में प्लाज्मा थेरेपी शुरुआती दौर में थी। नतीजे डोनर सलेक्शन, मरीजों की स्थिति, प्लाज्मा देने की अवधि सहित कई पहलुओं पर निर्भर करता है। समय बीतने के साथ थेरेपी के बारे में विशेषज्ञों की भी जानकारी बढ़ी है। ऐसे में अब नतीजे बेहतर आ रहे हैं। एसजीपीजीआई के डॉ. अनुपम वर्मा ने बताया कि जो मरीज मध्यम स्थिति में पहुंच रहे हैं, ऑक्सीजन की जरूरत लगातार बढ़ रही है। फेफड़ों में संक्रमण लगातार बढ़ रहा है और अंदेशा है कि अब वेंटिलेटर पर लेना पड़ेगा, उन्हें तत्काल प्लाज्मा थेरेपी मिल जाए तो रिकवरी बेहतर हो रही है। जो मरीज वेंटिलेटर पर चले जा रहे हैं और फिर थेरेपी दी जा रही है तो उन्हें बचाना कठिन हो जाता है।
यूएस की रिपोर्ट में सकारात्मक नतीजे
लॉसेट में प्रकाशित यूएसए की शोध रिपोर्ट में कहा गया कि प्लाज्मा थेरेपी के बाद 49 फीसदी मरीजों की स्थिति में सुधार हुआ। 18 प्रतिशत की मौत हो गई। इसी तरह करीब 26 फीसदी मरीजों को वेंटिलेटर पर जाने से रोकने में मदद मिली।
डाटाबेस तैयार कराने में होगी आसानी
केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि केजीएमयू को नोडल सेंटर बनाने से प्लाज्मा थेरेपी का डाटाबेस तैयार कराने में आसानी होगी। मुझे स्टेट फोकल प्वाइंट के रूप में काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रयास होगा कि ज्यादा से ज्यादा सेंटरों पर प्लाज्मा बैंक बने। प्लाज्मा के नतीजे सकारात्मक हैं। इसका इस्तेमाल अन्य दवाओं की तरह ही किया जा रहा है। प्लाज्मा देने का मतलब यह नहीं है कि जान शत प्रतिशत बचना तय है।