केजीएमयू के डॉक्टरों ने जोड़ा बच्ची का कटा हाथ
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केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जन प्रो. विजय कुमार और उनकी टीम ने एक 10 वर्षीय बच्ची के कलाई से कटकर अलग हो चुके हाथ के पंजे को जोड़ दिया। बच्ची का हाथ चारा काटने वाली मशीन से कट गया था।
कटे पंजे को छह घंटे तक चली माइक्रो सर्जरी से जोड़ दिया। अब बच्ची हाथ से पहले की तरह की काम कर सकेगी।प्रो. विजय कुमार ने बताया कि रायबरेली के गुरुबख्शगंज निवासी श्वेता के दाहिने हाथ का पंजा चारा मशीन में फंस कर कलाई से अलग हो गया था।
परिवारीजन तुरंत ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। रायबरेली से चार घंटे के सफर के बाद वह रात को 10 बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। प्लास्टिक सर्जन ने छह घंटे तक चली सर्जरी के बाद उसके हाथ के पंजे को कलाई से जोड़ दिया गया।
हाथ कटने से लेकर केजीएमयू तक पहुंचने में काफी खून बह चुका था। पहले उसे खून चढ़ाया गया। इसी दौरान उसकी कलाई के घाव और कटे पंजे को विसंक्रमित किया गया।
खून चढ़ाने के बाद जरूरी जांचें की गईं। इसके बाद पहले शिराओं और धमनियों को जोड़ा गया। जिससे कटे हाथ में खून की दौड़ान शुरू हो सके। इसके बाद पंजे में संचालन हो सके इसलिए नर्व को जोड़ा गया। रात को 10.30 बजे ओटी में ले जई गई बच्ची को सुबह 4 बजे बाहर निकाला गया।
प्रो. विजय कुमार ने बताया कि बच्ची एक फरवरी को ट्रॉमा सेंटर आई थी। सर्जरी के बाद अब उसे भर्ती हुए 24 दिन हो चुके हैं। हाथ पूरी तरह से जुड़ने के बाद उसे उंगलियों की कसरत कराई जा रही है।
कटे अंगों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाना जरूरी
हाथ की नर्व चूंकि एक एमएम रोज बढ़ती है। तीन से चार माह में पूरी तरह से नर्व भी बन जाएगी। इससे पंजे से वह पहले की तरह ही काम सकेगी। बच्ची की उम्र कम होने के कारण सर्जरी की सफलता की दर काफी अच्छी रहेगी।
कटे हुए अंगों को माइक्रोसर्जरी से जोड़ा जा सके इसके लिए जरूरी है कि उस अंग को सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाना। यदि किसी भी दुर्घटना में शरीर का कोई अंग कटकर अलग हो जाता है तो सबसे पहले कटे अंग के घाव को साफ कपड़े या पट्टी से बांधना चाहिए।
जिससे उसमें खून का बहाव बंद हो जाए। इसके बाद कटे हुए अंग को साफ पॉलीथीन में रखकर बर्फ में रखकर लाना चाहिए। जिससे अंग सुरक्षित रह सके। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि कटा अंग सीधे बर्फ में न रखें।
इससे संक्रमण हो सकता है। 4 से 6 घंटे में यदि मरीज अस्पताल पहुंच जाता है तो उसके अंग को जोड़ने और सर्जरी की सफलता की उम्मीद बढ़ जाती है।
केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक व प्लास्टिक सर्जन प्रो. विजय कुमार, सीनियर रेजीडेंट डॉ. रविंद्र, डॉ. पवन कुमार दीक्षित, डॉ. समीर ने सर्जरी की।
यदि किसी व्यक्ति का कोई अंग दुर्घटना में कट जाता है तो उसके परिवारीजन केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के इमरजेंसी मोबाइल फोन नंबर 9415200444 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। इस नंबर पर मौजूद डॉक्टर अंग को सुरक्षित अस्पताल लाने में दिशा-निर्देश देगा साथ ही सर्जरी की तैयारी भी कर लेगा। इससे समय की बचत होगी।