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नया यूरिन ब्लैडर बनाकर कैंसर मरीज को दिया नया जीवन

Fri, 29 Apr 2016 01:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 29 Apr 2016 01:57 PM IST
सार

  • मरीज को रुक-रुक कर होती थी पेशाब
  • पेट की आंत का छोटा सा हिस्सा लेकर बनाया नया यूरिन ब्लैडर 
  • संक्रमण का समय पर इलाज न कराने के कारण ही रोग बढ़कर कैंसर में बदला 

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kgmu doctors treated cancer patient
प्रो. एसएन शंखवार - फोटो : amar ujala

विस्तार

केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के सर्जन ने पेशाब की थैली(यूरिन ब्लैडर) के कैंसर से जूझ रहे मरीज की सर्जरी कर उसकी जान बचा ली।

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कैंसर के कारण मरीज को रुक-रुक कर पेशाब होती थी। जांच में कैंसर का पता चलने पर थैली को बाहर निकाल दिया गया और पेट की आंत का छोटा सा हिस्सा लेकर नया यूरिन ब्लैडर बना दिया गया। 
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मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है। अंबेडकर नगर निवासी एमएल वर्मा (62) को पेशाब रुक-रुककर होती थी। वह इसे नजरअंदाज करते रहे।

जब दिक्कत ज्यादा बढ़ गई तो गोरखपुर में एक डॉक्टर से इलाज कराया। जब कोई फायदा नहीं हुआ तो केजीएमयू में यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो.एसएन शंखवार को दिखाया। 
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उन्होंने मरीज के लक्षण देखकर जांचें करायी तो पता चला कि एमएल वर्मा की पेशाब की थैली में कैंसर है। इसकी जानकारी मरीज के परिवारीजनों को देते हुए जल्दी से जल्दी सर्जरी कराने की सलाह दी।

प्रो.शंखवार ने बताया कि संक्रमण का समय पर इलाज न कराने के कारण ही रोग बढ़कर कैंसर में बदल गया था। परिवारीजनों की मंजूरी के बाद मरीज की सर्जरी कर उसकी कैंसरग्रस्त थैली को निकाल दिया गया।
 

पेशाब की थैली में तंबाकू, धूम्रपान और शराब है कैंसर का कारण

kgmu doctors treated cancer patient
डेमो

इसके अलावा छोटी आंत से एक कृत्रिम थैली का निर्माणकर मरीज को लगा दिया गया। प्रो.शंखवार ने बताया कि पूरी तरह से सही हो जाने के बाद यूरिन ब्लैडर को गुर्दों से जोड़ दिया जाएगा। 

अभी उसे एक यूरिन बैग लगाया गया है, जिसमें यूरिन इकठ्ठा होता रहता है। पेशाब की थैली में कैंसर का कारण तंबाकू, धूम्रपान और शराब का सेवन है।

इन चीजों का सेवन करने के कारण मुंह में लगा निकोटीन पानी का सेवन करते समय पेट में चला जाता है और यूरिन ब्लैडर को संक्रमित करता है। इससे कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। केजीएमयू में इस तरह की सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है।

प्रो. एसएन शंखवार, डॉ. मनोज कुमार यादव, डॉ. गौतम कनौडिया, डॉ. विमलेश, डॉ. राम निवास, एनेस्थेटिस्ट डॉ. सरिता सिंह और डॉ. रमन की टीम ने सर्जरी की।

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