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रेयर सर्जरीः बच्चे के हाथ की नस से निकाला ट्यूमर

Fri, 15 Apr 2016 03:59 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Fri, 15 Apr 2016 03:59 PM IST
सार

  • छह महीने से बच्चे के बाएं हाथ में था असनीय दर्द 
  • रायबरेली में इलाज कराने के बाद पहुंचा केजीएमयू 
  • केजीएमयू के सीटीवीएस विभाग में दो घंटे तक चली सर्जरी

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kgmu doctors operated nerve tumor
इसी बच्चे को दिलाया दर्द से छुटकारा - फोटो : amar ujala

विस्तार

दर्द से कराहते बच्चे के हाथ की नर्व से ट्यूमर निकाल कर डॉक्टरों ने उसे असहनीय पीड़ा से मुक्ति दिला दी। केजीएमयू के सीटीवीएस विभाग में दो घंटे तक चली सर्जरी के बाद अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। 

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रायबरेली निवासी अंबिका (12) के बाएं हाथ में छह माह पहले अचानक असहनीय हुआ। रायबरेली में इलाज कराने के बावजूद जब कोई आराम नहीं मिला तो परिवारीजन उसे लेकर केजीएमयू आए। वहां उसे न्यूरो सर्जरी विभाग में दिखाया गया।
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सीटी स्कैन और एमआरआई से पता चला कि अंबिका के हाथ की ब्रेकियल फ्लेक्सस नर्व के पीछे ट्यूमर है। इसी के दबाव से उसके हाथ में दर्द होता है। न्यूरो सर्जरी विभाग के सर्जन ने अंबिका की सर्जरी कर ट्यूमर निकालने का प्रयास किया लेकिन कंधे के अंदर होने के कारण वह पूरी तरह से सफल नहीं हो पाए। 
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इसके बाद अंबिका को सीटीवीएस (कार्डियो थोरेसिक वस्कुलर सर्जरी) विभाग के लिए रेफर कर दिया गया। सीटीवीएस विभाग में सर्जन और कार्यकारी रजिस्ट्रार डॉ. शैलेंद्र कुमार यादव ने अंबिका का सीटी स्कैन और एमआरआई देखा। 

हाथ की मांसपेशियां भी हो रही थीं कमजोर

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बच्चे की हाथ का आपरेशन कर पायी सफलता - फोटो : amar ujala

जांच में पता चला कि ब्रेकियल फ्लेक्सस नर्व से ट्यूमर निकला नहीं था। इसके बाद सर्जरी की योजना बनायी गई। डॉ. शैलेंद्र ने बताया कि लगभग दो घंटे तक चली सर्जरी के बाद ट्यूमर को निकाल दिया गया।

ये ट्यूमर गले के क्लेविकल बोन (सामान्य भाषा में हंसली) के पीछे और ब्रेकियल फ्लेक्सस नर्व से जुड़ा हुआ था। इसकी वजह से अंबिका को दर्द तो हो ही रहा था उसके हाथ की मांसपेशियां भी कमजोर हो रही थीं। 

ट्यूमर पूरी तरह से निकालने के बाद अंबिका को दर्द से राहत मिल गई। यही नहीं उसका हाथ भी पूरी तरह से कार्य कर रहा है। डॉ. शैलेंद्र ने बताया कि ब्रेकियल फ्लेक्सस में ट्यूमर होना बहुत रेयर है। 

उन्होंने इस तरह के ट्यूमर को पहली बार सर्जरी से निकाला है। बाएं हिस्से में गले के निचले और कंधे के बीच में ये ट्यूमर था। नर्व से जुड़ा होने के कारण सर्जरी बहुत आसान नहीं थी क्योंकि नर्व के क्षतिग्रस्त होने से अंबिका का हाथ भी खराब हो सकता था। सर्जरी के बाद से अंबिका पूरी तरह से स्वस्थ है। 

एक्सीडेंट या प्रसव के समय इस नर्व को होता है नुकसान

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ब्रेकियल फ्लेक्सस नर्व - फोटो : amar ujala

हाथ को गति प्रदान करने, किसी वस्तु, ठंडा, गरम या चोट को महसूस करने वाली ये नर्व दिमाग से निकलती हैं। इसके बाद स्पाइनल कॉर्ड से होते हुए कॉलर बोन के नीचे से पूरे हाथ में फैल जाती हैं। 

पांच नर्व के इन गुच्छों को ब्रेकियल फ्लेक्सस कहा जाता है। एक-एक नर्व में 30 हजार से ज्यादा फाइबर होते हैं। जब ये क्षतिग्रस्त हो जाते हैं तो हाथ काम करना बंद कर देता है। एक्सीडेंट या प्रसव के समय ये नर्व क्षतिग्रस्त हो जाती है। 

जब मरीज डॉक्टर के पास आता है तो उसकी जांच के कम से कम छह सप्ताह के बाद ही सर्जरी प्लान की जाती है। जिससे नर्व अपने आप जितनी जुड़ सकती है जुड़ जाए। फिर क्षतिग्रस्त नर्व को माइक्रोसर्जरी से जोड़ दिया जाता है।

इसके अलवा ट्यूमर की वजह से नर्व पर दबाव पड़ता है इससे भी अहसनीय दर्द होता है। डॉ. शैलेंद्र कुमार यादव, रेजीडेंट डॉ. प्रभदीप, डॉ. अजय, डॉ. वेदप्रकाश, एनस्थेसिस डॉ. कौसर और उनकी टीम ने इस सर्जरी को किया।

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