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केजीएमयू के डॉक्टरों ने सात माह की बच्ची को दी नई जिंदंगी, आंखों की इस बीमारी से थी ग्रस्त
Fri, 20 Sep 2019 03:28 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 20 Sep 2019 03:28 PM IST
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केजीएमयू
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केजीएमयू के डॉक्टरों ने रूबेला वायरस की चपेट में आई सात माह की मासूम की आंखों की रोशनी बचाकर उसे नई जिंदगी दी है। बाराबंकी निवासी मो. अबरार की सात माह की बेटी रिदा फ ातिमा की आंखों से पानी आ रहा था। उसकी नजर भी कमजोर हो गई थी। परिवारीजनों ने जुलाई में उसे केजीएमयू के नेत्ररोग विभाग में दिखाया।
जांच में पता चला कि रूबेला वायरस के कारण मासूम की आंखों की रोशनी करीब जा चुकी है। इसके बाद डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल की देखरेख में इलाज शुरू हुआ। वायरस से कॉर्निया का आकार छोटा हो गया था। सामान्य बच्चों में कॉर्निया 11 मिमी की होती है, लेकिन रिदा की आंख की कॉर्निया साढ़े सात मिमी की ही रह गई थी।
उसकी दोनों आंखों में मोतियाबिंद था। डॉ. सिद्धार्थ के मुताबिक, यह दुर्लभ बीमारी एक लाख में से 14 बच्चों में पाई जाती है।दायीं आंख का ऑपरेशन 10 व बायीं आंख का ऑपरेशन 16 जुलाई को हुआ। इसमें आंखों में कस्टमाइज लेंस प्रत्यारोपित किए गए। एक ऑपरेशन में आधे घंटे का समय लगा।
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केजीएमयू में आठ से दस हजार रुपये लेंस का खर्च आया। निजी अस्पताल में यह ऑपरेशन कराने पर 50 से 70 हजार रुपये का खर्च आता। ऑपरेशन में डॉ. सूर्या, डॉ. अनुप्रिया, डॉ. रीना समेत अन्य स्टाफ का सहयोग रहा।
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जांच में पता चला कि रूबेला वायरस के कारण मासूम की आंखों की रोशनी करीब जा चुकी है। इसके बाद डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल की देखरेख में इलाज शुरू हुआ। वायरस से कॉर्निया का आकार छोटा हो गया था। सामान्य बच्चों में कॉर्निया 11 मिमी की होती है, लेकिन रिदा की आंख की कॉर्निया साढ़े सात मिमी की ही रह गई थी।
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उसकी दोनों आंखों में मोतियाबिंद था। डॉ. सिद्धार्थ के मुताबिक, यह दुर्लभ बीमारी एक लाख में से 14 बच्चों में पाई जाती है।दायीं आंख का ऑपरेशन 10 व बायीं आंख का ऑपरेशन 16 जुलाई को हुआ। इसमें आंखों में कस्टमाइज लेंस प्रत्यारोपित किए गए। एक ऑपरेशन में आधे घंटे का समय लगा।
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केजीएमयू में आठ से दस हजार रुपये लेंस का खर्च आया। निजी अस्पताल में यह ऑपरेशन कराने पर 50 से 70 हजार रुपये का खर्च आता। ऑपरेशन में डॉ. सूर्या, डॉ. अनुप्रिया, डॉ. रीना समेत अन्य स्टाफ का सहयोग रहा।