बच्ची के सीने में लगी गोली, निकाल कर दी नई जिंदगी
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केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रो.जेडी रावत ने 10 साल की एक बच्ची के सीने में लगी गोली निकालकर उसका जीवन बचा लिया। इटावा निवासी इस बच्ची को बारात देखने के दौरान अचानक गोली लगी थी। दो दिन तक सैफई रिम्स में इलाज के बाद पता चला कि उसे गोली लगी है।
इसके बाद वहां से बच्ची को केजीएमयू रेफर कर दिया था। यहां बीती 4 मई को उसका ऑपरेशन कर गोली को निकाल दिया गया। अब बच्ची ठीक है और उसे जल्दी ही डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
प्रो. जेडी रावत ने बताया कि इटावा गांव के किसान की बेटी वर्षा(10) परिवार के साथ पड़ोस में आई बारात देख रही थी। बाराती बीच-बीच में फायरिंग कर रहे थे। इसी दौरान अचानक वर्षा चीखते हुए गिर पड़ी।
उसके मां-बाप ने देखा की सीने से खून निकल रहा है। इस पर वह स्थानीय अस्पताल पहुंचे, जहां घाव की सफाईकर पट्टी कर दी गई। जब उसे कोई फायदा नहीं हुआ तो सैफई स्थित रूरल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज लेकर लाया गया।
एक्स-रे में पता चला कि फंसी है गोली
वहां एक्स-रे जांच में पता चला कि वर्षा के दाहिने तरफ सीने में गोली फंसी हुई है। इसके बाद उसे तुरंत केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में रेफर कर दिया गया। यहां 29 अप्रैल को वर्षा को लेकर उसके माता-पिता केजीएमयू पहुंचे थे।
दिल के कुछ सेंटीमीटर पहले रुक गई थी गोली
प्रो.जेडी रावत ने बताया कि वर्षा का एक्स-रे देखकर नहीं लगा रहा था कि गोली कहां पर है। सीना खोलने के पता चला कि दाहिने निपल के पास से गोली अंदर घुसी थी और एक पसली को तोड़ते हुए छाती के बीच हड्डी (स्टरनम) के नीचे और दिल के कुछ सेंटीमीटर पहले रुक गई।
सीने में चीरा लगाने के बाद गोली को खोजने में ही कई मिनट लग गए। लगभग दो घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद वर्षा के सीने से गोली को निकाल दिया गया। अब वह पूरी तरह सुरक्षित है।
पसली ने बचा ली जान
प्रो. जेडी रावत ने बताया कि गोली के प्रेशर को वर्षा की पसली ने कम कर दिया। इसी वजह से गोली अंदर जाकर मांसपेशियों में फंस गई। यदि बीच में हड्डी न आयी होती तो हो सकता था कि वह सीधे दिल में लगती। उन्होंने बताया कि गोली दिल के ठीक ऊपर फंसी हुई थी।