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कटेहरी : समीकरणों की बिसात पर सवर्ण निर्णायक भूमिका में, हाथी की सवारी छोड़कर साइकिल पर सवार लालजी वर्मा पर सबकी नजर

Wed, 02 Mar 2022 01:48 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अश्विनी मिश्र, अमर उजाला, अंबेडकरनगर
अश्विनी मिश्र, अमर उजाला, अंबेडकरनगर Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 02 Mar 2022 01:48 PM IST
सार

दल बदल व टिकट वितरण के खेल में समीकरण कुछ ऐसे बन गए कि यहां सवर्ण मतदाता निर्णायक की भूमिका में आ गए हैं।

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Katehri: In the decisive role of the upper caste on the board of equations, everyone's eyes are on Lalji Verma riding a bicycle, leaving the elephant ride
सपाः लालजी वर्मा, निषाद पार्टीः अवधेश द्विवेदी, बसपाः प्रतीक पांडेय, कांग्रेसः निशात फातिमा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

कटेहरी सीट पर बसपा विधानमंडल दल के नेता रहे लालजी वर्मा की साख दांव पर है। पिछली बार वे हाथी पर सवार होकर जीते थे, तो अबकी बार साइकिल दौड़ा रहे हैं। दल बदल व टिकट वितरण के खेल में समीकरण कुछ ऐसे बन गए कि यहां सवर्ण मतदाता निर्णायक की भूमिका में आ गए हैं।

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लालजी पहले बतौर बसपा प्रत्याशी टांडा सीट से चुनाव जीतते रहे। परिसीमन के बाद उन्होंने कटेहरी को अपना कर्म क्षेत्र बना लिया। हालांकि, यहां से वे पहला चुनाव सपा के शंखलाल मांझी से हार गए थे। पर, 2017 में वे फिर मैदान में आ डटे और जीतने में कामयाब रहे। बतौर सपा प्रत्याशी उनकी चुनावी नैया को पार न होने देने के लिए बसपा के प्रतीक पांडेय व भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी के अवधेश द्विवेदी ताल ठोक रहे हैं। प्रतीक के पिता पवन पांडेय अकबरपुर से शिवसेना के टिकट पर लगभग दो दशक पहले विधायक रह चुके हैं। प्रतीक पार्टी के परंपरागत मतदाताओं के साथ ही ब्राह्मणों को लुभाने में जुटे हैं। हालांकि, ओबीसी के अलावा मुस्लिम मतों के बिखराव पर प्रतीक खेमे ने पूरा ध्यान केंद्रित कर रखा है। वहीं, कांग्रेस की निशात फातिमा ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ मुहिम को लेकर मैदान में हैं। वे इस मुहिम का सम्मान बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं।
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पिछले चुनाव में अवधेश द्विवेदी भाजपा से उतरे थे। यहां से निषाद पार्टी ने भी अपना उम्मीदवार उतार दिया था। निषाद पार्टी के प्रत्याशी को 18,721 मत मिले थे। अगर ये वोट भी जुड़े होते तो जीत द्विवेदी की होती। बहरहाल, निषाद पार्टी प्रत्याशी अवधेश द्विवेदी पिछले चुनाव में मिली पराजय के कारणों से सबक लेते हुए ब्राह्मण मतों का बिखराव नहीं होने देने के लिए पूरा जोर लगाए हुए हैं। पिछली बार भी सपा के जयशंकर पांडेय के चलते ब्राह्मण मतों में बिखराव हो गया था।
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पिछले चुनाव में निषाद पार्टी से लड़ने वाले अजय सिंह सिपाही इस बार अवधेश के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशों में लगे हैं, लेकिन क्षत्रिय मतदाताओं का रुख अब तक बहुत साफ नहीं हो पाया है। वे तीसरे विकल्प की तरफ भी देख रहे हैं। जबकि, ब्राह्मण मतदाताओं की एकजुटता ही बसपा या निषाद पार्टी प्रत्याशी की जीत का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। इसी के चलते ब्राह्मणों को अपने पाले में लाने के लिए इन तीनों प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक रखी है। उधर, सपा की कोशिशें है कि वह मुस्लिम मतों में बिखराव न होने दे। सपा परंपरागत मतदाता यादव और एकमात्र सजातीय प्रत्याशी होने के चलते कुर्मी मतों के सहारे लीडिंग पंच तैयार करने की जुगत में है। इसके साथ ही राजभर व ओबीसी के मिलने वाले अतिरिक्त मत लालजी के लिए दलबदल के बाद भी जीत की राह तय कर सकते हैं। इसके लिए पूरा जोर लगाया जा रहा है।

एससी 90 हजार
मुस्लिम 50 हजार
कुर्मी 45 हजार
यादव 28 हजार
ब्राह्मण 50 हजार
क्षत्रिय 23 हजार
राजभर 19 हजार
वैश्य  15 हजार
2017 का चुनाव परिणाम
लालजी वर्मा, बसपा 84,358
अवधेश द्विवेदी, भाजपा  78,071
जयशंकर पांडेय, सपा 45,532
अजय सिंह सिपाही, निषाद पार्टी 18,721

 

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