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यूपी का रण : कानपुर मंडल की रिपोर्ट, उद्योग नगरी में दिलचस्प सियासी जंग, भाजपा के सामने प्रदर्शन दोहराने की चुुनौती तो विपक्षी दलों के पास भी मौका 

Fri, 10 Dec 2021 08:00 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव पंकज प्रसून, अमर उजाला, कानपुर
पंकज प्रसून, अमर उजाला, कानपुर Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 10 Dec 2021 08:00 AM IST
सार

2017 में समीकरण कुछ ऐसे बने कि 6 जनपदों वाले इस मंडल की 27 सीटों में से 22 पर भगवा परचम फहराने लगा। कानपुर के शहरी क्षेत्र को छोड़कर बाकी पूरे मंडल में सपा-बसपा का ही दबदबा होता था, सब धराशायी हो गए।

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Kanpur divisional report, interesting political battle in the city of industry, if the challenge of repeating the performance in front of the BJP, then the opposition parties also have a chance
कानपुर मेट्रो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साल 2017 की भगवा आंधी में कानपुर मंडल का सियासी मिजाज भी बदल गया। समीकरण कुछ ऐसे बने कि 6 जनपदों वाले इस मंडल की 27 सीटों में से 22 पर भगवा परचम फहराने लगा। कानपुर के शहरी क्षेत्र को छोड़कर बाकी पूरे मंडल में सपा-बसपा का ही दबदबा होता था, सब धराशायी हो गए। जबकि इन स्थानों पर भाजपा इक्का-दुक्का ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाती थी। पर, अब हालात बदले हैं। जनता के सामने विधायकों के रिपोर्ट कार्ड हैं। सवाल हैं। उद्योग नगरी में भाजपा के सामने पिछले प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है, तो सपा, बसपा और कांग्रेस के पास यहां पाने के लिए काफी मौके हैं।

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 चुनावी बिसात सज रही है। पाले बदले जा रहे हैं। कल जो इधर थे, अब उधर का राग अलाप रहे हैं। दल बदले तो दिल भी बदल गए। सुर भी बदल गए। इस पर आने से पहले बात करते हैं 2017 की। भगवा खेमे ने मैदान का रंग ही बदल दिया। 27 सीटों में से 22 फतह कर लीं। यह वही भाजपा थी, जो 2012 में महज पांच सीटों पर सिमट गई थी। इटावा और कन्नौज में सपा का तिलिस्म टूट गया तो बसपा से उन्हीं के लोगों का भ्रम चकनाचूर हो गया। यही वजह रही कि पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा से टूटकर भाजपा में आए 11 लोग विधायक बन गए। 

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आंधी तो 2019 में भी चली। मुलायम सिंह यादव के गढ़ कन्नौज की एकमात्र बची लोकसभा सीट भी सपा के हाथ से चली गई। चुनावी चर्चा छिड़ते ही यहां के लोग कहते हैं कि शायद इसका ही असर रहा कि पिछली सरकारों में स्थानीय स्तर पर जो भू-माफिया, खनन माफिया अपनी अलग सरकार चला रहे थे, उनका भी काफी हद तक पटाक्षेप हो गया। 

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मंत्रियों से सियासी कद बढ़ा
चुनावी चर्चाओं में लोग गिनाने लगते हैं कि उनके मंडल का सियासी कद कितना बड़ा है। कितने मंत्री हैं...। बहरहाल, मंडल से प्रदेश सरकार में पांच और केंद्र सरकार में दो मंत्री हैं। केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में साध्वी निरंजन ज्योति खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री और भानुप्रताप वर्मा को सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली है। जबकि प्रदेश सरकार में सतीश महाना कैबिनेट मंत्री, बाकी राज्य मंत्रियों में नीलिमा कटियार, जयकुमार जैकी, सतीश पाल और रणवेंद्र सिंह धुन्नी शामिल हैं। 


कानपुर से पीएम चुनावी रैली शुरू करते हैं...। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी यहीं से अपने चुनावी रथ को आगे बढ़ाया...। ठेठ कनपुरिया अंदाज में जब यहां के लोग चाय पर गपशप करते हैं, तो साफ हो जाता है कि इस इलाके का मिजाज सियासी है। 


गंगा का कलंक मिटा, रक्षा व यातायात में हुआ बड़ा निवेश 
पिछले काफी समय से औद्योगिक नगरी की धूमल हो रही पहचान को फिर से उजाला देने के लिए यहां पर बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है। इसी तरह सीसामऊ नाले को भी गंगा में गिरने से रोका गया है। यह नाला चुनावी मुद्दा भी बना था। डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी मिलने से पूरे मंडल की पहचान फिर से राष्ट्रीय स्तर पर होने लगी है। इसी तरह स्मार्ट सिटी के बाद मेट्रो सिटी के रूप में भी औद्योगिक नगरी ने प्रगति की है। घाटमपुर में लगभग तैयार हो चुका सोलर पावर प्लांट सिर्फ कानपुर मंडल ही नहीं, पूरे प्रदेश को रोशन करने की क्षमता रखता है। 
यह भी पहली बार हुआ है कि कानपुर से दिल्ली, मुंबई, बंगलुरू और कोलकाता को हवाई मार्ग से जोड़ दिया गया। इतना जरूर है कि मंडल के कई ऐसे भी जिले हैं, जहां पर अभी मेेडिकल कॉलेज के रूप में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरत है तो उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थान की कमी भी कई जिलों में महसूस की जा रही है। 


कानपुर महानगर : मेट्रो, ओवरब्रिज फिर भी जाम से किचकिच
कानपुर महानगर की बात करें तो यहां कुल 10 विधानसभा सीटें हैं। मोदी लहर में भी भाजपा इनमें से तीन सीटों पर जीत हासिल नहीं कर पाई थी। जबकि 2012 के चुनाव में शहरी क्षेत्र की कैंट और आर्यनगर विधानसभा सीटें भाजपा के पास थीं। चुनावी चर्चा शुरू होते ही समाज सेवी दर्शन सिंह कहते हैं, विकास तो हुआ है। इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। मेट्रो शहर में आ गई। सड़कों की हालत भी पहले से सुधरी है। शहर में फ्लाईओवर भी हैं। पर, इस सबके बावजूद जाम की समस्या रहती है। तो शिवकुमार दिवाकर प्रदूषण की समस्या को लेकर सवाल खड़ा करते हैं। वह कहते हैं, यहां की सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण की रही है। इसेे कम करने को लेकर अक्सर बैठकें होती हैं। व्यवस्थाएं बनाई जाती हैं। पर, बैठकों और व्यवस्थाओं का कोई असर नहीं दिखता है।


औरैया : डॉक्टरों की कमी से मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है
चुनावी मुद्दों को लेकर हमने इलाके के रमेश सोनकर से सवाल किए। वह कहते हैं, यहां लंबे समय से ब्लड बैंक की जरूरत है। डॉक्टरों की कमी तो है ही। इसके लिए मांगें भी की गईं। पर, कुछ हुआ नहीं। आलम यह है कि इलाज के लिए मरीजों को भटकना पड़ता है। पर, वह उम्मीद भी जताते हैं कि यहां बन रहे मेेडिकल कॉलेज से इन समस्याओं का समाधान हो जाएगा। वह कहते हैं, एक और बड़ी समस्या है। वह है जलनिकासी की। इससे लोग परेशान रहते हैं, पर समाधान नहीं हो रहा। इन सबको लेकर सवाल तो उठेंगे ही।


इटावा : विकास कार्य तो शुरू हुए, पर अंजाम पर अब तक नहीं पहुंचे
पिछले पांच वर्षों में क्या बदलाव आए, इस सवाल पर सूरत सिंह यादव कहते हैं-इटावा क्षेत्र में विकास कार्य शुरू तो कराए गए, लेकिन अब तक कोई अंजाम तक नहीं पहुंच पाए। सैफई आयुर्विज्ञान संस्थान में 500 बेड के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का निर्माण अभी अधूरा पड़ा है। वह कहते हैं, इसके अलावा बुनकर उद्योग से जुड़े लोगों की स्थिति ठीक नहीं है। आलू उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र होने के बावजूद अभी यहां पर इससे आधारित कोई उद्योग नहीं लग सका। किसानों को अपने उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। यह सब चुनावी मुद्दे बनेंगे। 

कानपुर देहात : ग्रामीण इलाकों की सड़कें खस्ताहाल
कौन से मुद्दे चुनाव में प्रत्याशियों का इम्तिहान लेंगे, इस सवाल पर रामनरेश कठेरिया कहते हैं-ग्रामीण इलाकों में कहीं भी चले जाइए, सड़कें खराब ही मिलेंगी। मुख्य मार्ग तक पहुंचना किसी मुसीबत से कम नहीं। बारिश के दिनों में स्थिति काफी खराब हो जाती है। इसपर ध्यान दिया जाना चाहिए। जहां तक क्या अच्छा हुआ यह सवाल है, तो अमराहट कैनाल पंप लग रहा है। इससे सिंचाई के लिए बेहतर सुविधा की उम्मीद है। वहीं, क्षेत्र के ही शिवम दुबे कहते हैं, जिले में    ट्रॉमा सेंटर बन गया। बर्न यूनिट भी तैयार हो गई। पर, आज तक यह सब शुरू नहीं हो पाईं।


फर्रुखाबाद : अधूरी है अब तक आस
विवेक सचान बताते हैं, यह जिला किसी भी नेशनल हाईवे व एक्सप्रेसवे से सीधा कनेक्ट नहीं है। विनय कुशवाहा भी इसी को लेकर सवाल उठाते हैं। उनका कहना है, इटावा-बरेली हाईवे को नेशनल हाईवे बनाने की घोषणा हुए एक साल से अधिक समय हो गया है। पर, अभी निर्माण शुरू नहीं हो सका है। इसी तरह भोलेपुर में रेलवे क्रॉसिंग व शुकरुल्लाहपुर रेलवे क्रॉसिंग पर एक साल से अधिक समय से ओवरब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है। पर, अभी तक दोनों ही ओवरब्रिज का काम पूरा नहीं हो सका। जिले में मेडिकल कॉलेज नहीं होने से यहां की चिकित्सा व्यवस्था बदहाल है।


कन्नौज  : जिला अस्पताल तो सिर्फ रेफरल यूनिट
कन्नौज में क्या मुद्दे इस चुनाव में होंगे, इस सवाल    पर मनोज शाक्य कहते हैं, यहां तो मुद्दे ही मुद्दे हैं। सवाल ही सवाल हैं। जिला अस्पताल को ले लीजिए   तो यह महज रेफरल यूनिट है। मरीज आया रेफर कर दिया, काम खत्म। शहरी क्षेत्र में हर जगह सीवर लाइन नहीं होने से भी दिक्कत आ रही है। इत्र पार्क का निर्माण योजना बनने के बावजूद अधर में पड़ा है। तो वहीं, अनुराग दीक्षित बताते हैं, काऊ मिल्क प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल रहा। सराय मीसा निवासी सुशील कटियार जाम की समस्या पर सवाल उठाते हैं। वह कहते हैं, जीटी रोड पर अक्सर जाम रहता है। लोग परेशान होते रहते हैं। हालांकि, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनने    से आवागमन काफी सुगम हुआ है।

दलबदल के साथ हो रही मोर्चेबंदी
सियासी समीकरणों में आ रहे बदलावों की बात करें तो यहां कांग्रेस के कद्दावर नेता राजाराम पाल पाला बदलकर सपा के खेमे में पहुंच गए हैं। राजाराम बसपा और फिर कांग्रेस से सांसद रहे। एक बार विधायक भी रहे हैं। वह कहते हैं, जिस उद्देश्य और अभियान को लेकर कांग्रेस से जुड़े थे, उसे पूरा करने के लिए पार्टी से पूरा सहयोग नहीं मिला। इसलिए अब मैंने सपा का झंडा बुलंद करने की शपथ ली है। मंडल में सिर्फ राजाराम ही नहीं, कई और नेता दल बदलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। बसपा के बड़े चेहरे के रूप में पहचान बनाने वाले आरपी कुशवाहा भी सपाई हो गए हंै। वहीं, बसपा के जोनल को-ऑर्डिनेटर रहे मनोज दिवाकर अब भाजपा के खेमे में आ गए हैं।

कानपुर नगर (10 सीटें)

कैंट : कांग्रेस के सोहिल अंसारी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.25 लाख, अनुसूचित जातियां 80 हजार, ब्राह्मण 38 हजार, यादव व अन्य पिछड़ा वर्ग 36 हजार, क्षत्रिय, निषाद 9-9 हजार, पंजाबी सिंधी 7 हजार।
किदवई नगर : भाजपा के महेश त्रिवेदी विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 73 हजार, ब्राह्मण 52 हजार, मुस्लिम 32 हजार, वैश्य 22 हजार, पंजाबी सिंधी 19 हजार, क्षत्रिय 17.5 हजार, कुशवाहा 10 हजार, एवं अन्य।
आर्यनगर : सपा के अमिताभ बाजपेई विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : वैश्य व मुस्लिम करीब 72-72 हजार, अनुसूचित जातियां 60 हजार, ब्राह्मण 36 हजार, ओबीसी 25 हजार एवं अन्य।
सीसामऊ : सपा के इरफान सोलंकी विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 84 हजार, मुस्लिम 72 हजार, ब्राह्मण 32 हजार, पंजाबी सिंधी 16 हजार, वैश्य 12.5 हजार 
गोविंदनगर : भाजपा के सुरेंद्र मैथानी विधायक हैं। उपचुनाव मेंे जीते।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां 85 हजार, ब्राह्मण 43 हजार, मुस्लिम 29 हजार, बढ़ई 22 हजार, पाल 17 हजार, यादव 16 हजार, पंजाबी सिंधी 14 हजार, क्षत्रिय व वैश्य 13-13 हजार, कुशवाहा 11 हजार।
घाटमपुर (सु.) : भाजपा के उपेंद्र पासवान विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : जाटव करीब 55 हजार, कुर्मी 35 हजार, ब्राह्मण 27 हजार, कुशवाहा 26 हजार, पाल व यादव 18-18 हजार, मुस्लिम 17 हजार। 
महाराजपुर : कैबिनेट मंत्री सतीश महाना यहां से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 52 हजार, पासी 41 हजार, क्षत्रिय 38 हजार, जाटव 36 हजार, कुशवाहा 27 हजार, मुस्लिम 26 हजार, निषाद व तेली 21-21 हजार, यादव व पाल 26-26 हजार।
बिठूर (सु.) : भाजपा के अभिजीत सिंह सांगा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : क्षत्रिय करीब 47 हजार, जाटव 46 हजार, यादव व कुशवाहा 36-36 हजार, ब्राह्मण 32 हजार, मुस्लिम 23 हजार, पासी 21 हजार।
बिल्हौर : भाजपा के भगवती सागर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : जाटव करीब 63 हजार, कुर्मी 45 हजार, ब्राह्मण 40 हजार, पाल 37 हजार, यादव 35 हजार, मुस्लिम 30 हजार, कोरी 29 हजार, लोधी 25 हजार, दिवाकर 22 हजार।
कल्याणपुर  : राज्यमंत्री नीलिमा कटियार यहां से विधायक हैं
जातिगत समीकरण : जातिगत समीकरण: ब्राह्मण करीब 1.22 लाख, पिछड़ा वर्ग 1.15 लाख, अनुसूचित जातियां 60 हजार, मुस्लिम 20 हजार, क्षत्रिय 10 हजार।


इटावा (3 सीटें)
इटावा : भाजपा की सरिता भदौरिया विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 55 हजार, यादव 48 हजार, शाक्य, कुशवाहा, काछी 42 हजार, मुस्लिम 35 हजार, पाल,़ बघेल 30 हजार, जाटव 40 हजार।
भरथना (सु.) : भाजपा की सावित्री कठेरिया विधायक हैं।  
जातिगत समीकरण : यादव करीब 65 हजार, जाटव 55 हजार, ब्राह्मण 45 हजार, शाक्य, कुशवाहा, काछी 25 हजार, क्षत्रिय 22 हजार, वैश्य 18 हजार, मुस्लिम व पाल 15-15 हजार। 
जसवंतनगर : प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव यहां से विधायक हैं। यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में दर्ज है।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 1.40 लाख, अनुसूचित जातियां 77 हजार, शाक्य, कुशवाहा, काछी 45 हजार, ब्राह्मण 18 हजार।


कानपुर देहात (4 सीटें)
अकबरपुर-रनियां : भाजपा की प्रतिभा शुक्ला विधायक हैं।  
जातिगत आंकड़े : अनुसूचित जातियां 69 हजार, ब्राह्मण व यादव 50-50 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, लोनिया व पाल 25 हजार, वैश्य व मुस्लिम 22-22 हजार।
रसूलाबाद (सु.) : भाजपा की निर्मला संखवार विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां 1.10 लाख, लोधी 60 हजार, ब्राह्मण 37 हजार, क्षत्रिय व यादव 25-25 हजार, पाल 22 हजार, मुस्लिम 20 हजार।
भोगनीपुर : भाजपा के विनोद कटियार विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 1.04 लाख,  यादव 57 हजार, मुस्लिम 37.5 हजार, ब्राह्मण व कुर्मी 26-26 हजार, क्षत्रिय 25.5 हजार।  
सिकंदरा : भाजपा के अजीत पाल विधायक हैं। उपचुनाव में जीते हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 65 हजार, ब्राह्मण 45 हजार, कुर्मी 40 हजार, क्षत्रिय 28 हजार, पाल 25 हजार, मुस्लिम 22 हजार।

औरैया (3 सीटें)
बिधूना : भाजपा के विनय शाक्य विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  यादव करीब 55 हजार, जाटव 46 हजार, लोधी 39 हजार, शाक्य 30 हजार, क्षत्रिय 28 हजार, ब्राह्मण 24 हजार, मुस्लिम 21 हजार, पाल 20 हजार, कठेरिया 16 हजार, बाथम 12 हजार।
औरैया : भाजपा से रमेश दिवाकर जीते थे। उनके निधन के बाद सीट खाली है।
जातिगत समीकरण : जाटव करीब 66 हजार, ब्राह्मण 37 हजार, मुस्लिम 27 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, यादव 16 हजार, पाल 14 हजार, लोधी 23 हजार।
दिबियापुर : लाखन सिंह राजपूत भाजपा से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 77 हजार, लोधी 38 हजार, यादव 36 हजार, वैश्य 18 हजार, ब्राह्मण 16 हजार, शाक्य 15 हजार, क्षत्रिय 14 हजार, पाल व मुस्लिम 13-13 हजार।

फर्रुखाबाद (4) सीटें
फर्रुखाबाद सदर : भाजपा के मेजर सुनील दत्त द्विवेदी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 65 हजार, मुस्लिम 55 हजार, अनुसूचित जातियां 32 हजार, लोधी 30 हजार, वैश्य 30 हजार, यादव 25 हजार। 
भोजपुर : भाजपा के नागेंद्र सिंह राठौर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : लोधी करीब 70 हजार, क्षत्रिय 65 हजार, मुस्लिम 60 हजार, कुर्मी व अनुसूचित जातियां 30-30 हजार, ब्राह्मण 25 हजार।
अमृतपुर : भाजपा के सुशील शाक्य विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 70 हजार, शाक्य 65 हजार, ब्राह्मण 32 हजार, क्षत्रिय, लोधी, अनुसूचित जातियां व मुस्लिम 30-30 हजार।
कायमगंज : भाजपा के अमर सिंह विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण :  यादव 75 हजार, लोधी 45 हजार, कुर्मी 40 हजार, वैश्य, अनुसूचित जातियां व मुस्लिम 35-35 हजार, ब्राह्मण व शाक्य 30-30 हजार

कन्नौज (3 सीटें)
कन्नौज सदर (सु.) : सपा के अनिल दोहरे विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब एक लाख, मुस्लिम 65 हजार, ब्राह्मण व यादव 45-45 हजार, लोधी 30 हजार, कुशवाहा 40 हजार।
तिर्वा : भाजपा के कैलाश राजपूत विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : लोधी करीब 1.20 लाख, यादव 65 हजार, क्षत्रिय 45 हजार, पाल 40 हजार, अनुसूचित जातियां 35 हजार।
छिबरामऊ : भाजपा की अर्चना पांडेय विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 90 हजार, मुस्लिम 65 हजार, ब्राह्मण 60 हजार, कुशवाहा-शाक्य 55 हजार, अनुसूचित जातियां 55 हजार, लोधी 35 हजार, पाल 30 हजार, कटियार 25 हजार, क्षत्रिय 20 हजार।

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