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अलीगंज अग्निकांड: सुप्रीम कोर्ट में आज खुलेगी एसआईटी रिपोर्ट

Tue, 22 Sep 2026 02:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 02:48 AM IST
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Aliganj Fire Incident: SIT Report to be Opened in Supreme Court Today
अलीगंज अ​ग्निकांड की फाइल फोटो।
लखनऊ। अलीगंज अग्निकांड मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इस दौरान घटना की जांच के लिए गठित एसआईटी की रिपोर्ट भी कोर्ट के सामनो रखी जाएगी। अगस्त में हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी रिपोर्ट तलब की थी। रिपोर्ट इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब तक शासन की ओर से यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि जांच में किन अफसरों और इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय की गई है।
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22 जून को अलीगंज के सेक्टर-डी में आवासीय भूखंड पर बने अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में आग लगने से 15 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अलीगंज में अवैध निर्माणों की स्थिति की पड़ताल के लिए टीम भेजी थी। टीम ने पांच और छह सितंबर को शहर में सर्वे किया। इस दौरान अलीगंज में चिह्नित 51 अवैध इमारतों के अलावा गोमतीनगर क्षेत्र की कुछ इमारतों का भी मौके पर निरीक्षण किया गया। टीम की रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई है। उसी के आधार पर अब सुनवाई होगी।
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अलीगंज अग्निकांड से जुड़ी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही जनहित याचिका लोकनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य सरकार के साथ जोड़ी गई है। दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी भवन ढहने की घटना के बाद अवैध और असुरक्षित निर्माण से जुड़े मामलों को भी इस सुनवाई के दायरे में लाया गया है।
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प्रारंभिक जांच में 17 अफसर-इंजीनियर पाए गए थे दोषी
अग्निकांड के बाद एलडीए की प्रारंभिक जांच में तत्कालीन विहित प्राधिकारी के साथ प्रवर्तन जोन-चार में तैनात पांच जोनल अफसरों, छह सहायक अभियंताओं और छह अवर अभियंताओं की लापरवाही सामने आने की बात कही गई थी। इनमें अधिशासी अभियंता अवनींद्र सिंह, बीपी मौर्या, पीसी पांडेय और आनंद मिश्रा, सहायक अभियंता सुनील कुमार, गिरीश चंद्र शर्मा, अमर कुमार मिश्रा, आरएस सिंह, अनिल कुमार और संजय शुक्ला तथा अवर अभियंता जय प्रकाश नारायण, रवींद्र कुमार श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमोद पांडेय, अंबरीश कुमार शर्मा, शिवानंद शुक्ला और हेमंत कुमार के नाम शामिल बताए गए थे। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में संजय शुक्ला और प्रमोद पांडेय समेत कुछ इंजीनियर निलंबन के खिलाफ हाईकोर्ट से स्थगन आदेश हासिल कर चुके हैं।
इसलिए हुई थी कार्रवाई
जांच में सामने आया था कि जिस भवन में हादसा हुआ, उसका नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था, जबकि मौके पर निर्माण व्यावसायिक उपयोग के अनुरूप किया गया। अवैध निर्माण के खिलाफ 2016 में जारी ध्वस्तीकरण आदेश तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव ने निरस्त कर दिया था।
जांच के अनुसार, उस समय भवन का निर्माण प्लिंथ स्तर तक ही हुआ था। भवन मालिक की ओर से आवासीय निर्माण का शपथपत्र दिए जाने के आधार पर ध्वस्तीकरण आदेश वापस लिया गया। इसके बाद निर्माण किस तरह आगे बढ़ा, इसकी प्रभावी निगरानी नहीं की गई।

बाद में बेसमेंट के साथ तीन मंजिला भवन खड़ा हो गया और उसमें व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं। इसके बावजूद एलडीए के स्तर से समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। अग्निकांड के बाद हुई जांच में अवैध निर्माण और विभागीय लापरवाही से जुड़े ये तथ्य सामने आए।
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