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अलविदा कल्याण: राम मंदिर आंदोलन की नींव के नेता, नींव देखी पर शिखर नहीं देख पाए

Sat, 21 Aug 2021 11:09 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 21 Aug 2021 11:09 PM IST
सार

कल्याण सिंह के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बनने से लेकर, शिक्षक, सियासी किरदार, जनसंघ व भाजपा नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री और फिर राज्यपाल बनने की कहानी में कई पड़ाव हैं। तरह-तरह के रंग हैं और पात्रों के अलग-अलग ढंग हैं। 

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kalyan singh leader of the foundation of ram temple movement saw the foundation but could not see the completed ram mandir
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का निधन - फोटो : amar ujala

विस्तार

लंबे समय से बीमार चल रहे यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह ने लखनऊ के संजय गांधी स्नात्कोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में शनिवार को अंतिम सांस ली। अयोध्या के विवादित ढांचे को गिराने के वक्त यूपी के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह भाजपा के कद्दावर नेताओं में से एक थे। उनका कद पार्टी में भी काफी विशाल था। उन्होंने राजनीति में अपनी एक अलग छवि बनाई। 

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90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन में तो उनकी ऐसी सक्रियता रही कि उन्हें अपनी सीएम कुर्सी तक कुर्बान करनी पड़ गई थी। राम मंदिर आंदोलन के सूत्रधार कल्याण सिंह ही थे। उनकी बदौलत यह आंदोलन यूपी से निकला और देखते-देखते पूरे देश में बहुत तेजी से फैल गया। उन्होंने हिंदुत्व की अपनी छवि जनता के सामने रखी। इसके साथ ही उन्हे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भी साथ मिला जिससे आंदोलन ने और जोर पकड़ लिया। इन सबके बीच सुप्रीम कोर्ट ने नौ नवंबर 2019 को श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद पांच अगस्त को प्रधानमंत्री ने मंदिर का भूमि-पूजन कर मंदिर निर्माण की नींव रखी। तब से राम मंदिर का निर्माण कार्य जारी है। लेकिन कल्याण सिंह की किस्मत में मंदिर का वास्तविक स्वरूप देखना नहीं लिखा था और आज वह इस दुनिया को छोड़कर चले गए।
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कल्याण सिंह के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बनने से लेकर, शिक्षक, सियासी किरदार, जनसंघ व भाजपा नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री और फिर राज्यपाल बनने की कहानी में कई पड़ाव हैं। तरह-तरह के रंग हैं और पात्रों के अलग-अलग ढंग हैं। यह कहानी सिर्फ कल्याण पर नहीं घूमती है बल्कि राम जन्मभूमि आंदोलन और 90 की कारसेवा के बाद देश व प्रदेश की राजनीति में आए बदलावों को भी बताती हुई चलती है। यही वह वजह भी है कि प्रदेश ही नहीं देश के राजनीतिक इतिहास में कल्याण अपनी भूमिका से एक ऐसी जगह बना लेते हैं जिनकी चर्चा किए बिना देश व प्रदेश के राजनीतिक इतिहास पर चर्चा पूरी ही नहीं हो सकती। 

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