{"_id":"6a10b8c1fd8c30870a0939dd","slug":"kalakunja-affiliated-with-bhatkhande-cultural-university-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1750284-2026-05-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से संबद्ध हुआ कलाकुंज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से संबद्ध हुआ कलाकुंज
विज्ञापन
भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय
लखनऊ। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक अहम पहल करते हुए गोमती नगर स्थित कलाकुंज संस्थान को गायन, वादन और नृत्य के विभिन्न डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए अस्थायी मान्यता प्रदान की है। यह मान्यता शैक्षणिक सत्र 2029-30 तक प्रभावी रहेगी।
संस्थान में शास्त्रीय गायन, सितार, गिटार, वायलिन, बांसुरी, तबला, कथक और भरतनाट्यम जैसे विषयों में दो-वर्षीय डिप्लोमा कोर्स संचालित होंगे। इसके अलावा ढोलक, लोक संगीत और सुगम संगीत के विशेष डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी चलाए जाएंगे। वहीं की-बोर्ड और स्पेनिश गिटार में छह माह के सर्टिफिकेट कोर्स की भी सुविधा मिलेगी। कलाकुंज का संचालन निदेशक अर्चा अग्रवाल के नेतृत्व में किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत कला और संस्कृति को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। ऐसे संस्थान भारतीय संगीत और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विज्ञापन
कोर्सेस का विवरण इस प्रकार है
पाठ्यक्रम विषय
द्विवर्षीय डिप्लोमा शास्त्रीय गायन, सितार, गिटार, वायलिन,
बांसुरी, तबला, कथक, भरतनाट्यम,
सुगम संगीत
एक वर्षीय डिप्लोमा ढोलक, लोक संगीत
6 माह सर्टिफिकेट कोर्स की-बोर्ड, स्पेनिश गिटार
विज्ञापन
संस्थान में शास्त्रीय गायन, सितार, गिटार, वायलिन, बांसुरी, तबला, कथक और भरतनाट्यम जैसे विषयों में दो-वर्षीय डिप्लोमा कोर्स संचालित होंगे। इसके अलावा ढोलक, लोक संगीत और सुगम संगीत के विशेष डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी चलाए जाएंगे। वहीं की-बोर्ड और स्पेनिश गिटार में छह माह के सर्टिफिकेट कोर्स की भी सुविधा मिलेगी। कलाकुंज का संचालन निदेशक अर्चा अग्रवाल के नेतृत्व में किया जा रहा है।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत कला और संस्कृति को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। ऐसे संस्थान भारतीय संगीत और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विज्ञापन
कोर्सेस का विवरण इस प्रकार है
पाठ्यक्रम विषय
द्विवर्षीय डिप्लोमा शास्त्रीय गायन, सितार, गिटार, वायलिन,
बांसुरी, तबला, कथक, भरतनाट्यम,
सुगम संगीत
एक वर्षीय डिप्लोमा ढोलक, लोक संगीत
6 माह सर्टिफिकेट कोर्स की-बोर्ड, स्पेनिश गिटार