लखनऊ: अपने शहर आकर भावुक हुए जावेद अख्तर, कहा- बिल्ली ओवन में बच्चे दे दे तो उसे बिस्किट नहीं कहते
Javed Akhtar: जावेद अख्तर शनिवार को लखनऊ में थे। इस मौके पर उन्होंने इस शहर से जुड़ी हुई यादें ताजा की। साथ ही साथ जीवन के कुछ फलसफे भी दिए।
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गजलें सुनना और उन्हें पढ़ना, दो अलग काम हैं। गजलों की तासीर समझनी है तो उसे सुनने की जगह, पढ़िए। गजल गायकों को सीरियसली न लें। इतना ही नहीं अच्छा लिखने से पहले खूब पढ़िए। आप जो लिखना चाहते हैं, उस क्षेत्र के महारथियों को पढ़िए। ऐसा पढ़िए कि जुबान पर चढ़ जाएं। लिखने की जल्दी न करिए।
लेखन को लेकर युवाओं को कुछ ऐसी ही टिप्स शनिवार को रेपर्टवा फेस्टिवल के माहौल लॉन में गीतकार जावेद अख्तर ने दी। उन्होंने रोशन अब्बास के साथ गुफ्तगू की। जावेद अख्तर ने लखनऊ से जुड़ी यादों से लेकर जिंदगी के कई पहलुओं को साझा किया। जावेद अख्तर ने कहाकि शादीशुदा जिंदगी के लिए इंटीरियर डेकोरेशन अग्निपरीक्षा सरीखा है। पर्दे के रंगों से लेकर दीवारों के कलर तक पर पति-पत्नी की राय एक सी नहीं होती। ऐसे में जो इस अग्निपरीक्षा से गुजर गया, उसकी शादी सफल मानो। उनकी इस बात पर श्रोता हंस पड़े।
उन्होंने अपनी बेटी जोया अख्तर के लिए लिखी दोराहा को पढ़कर सुनाया। साथ ही मजाज लखनवी व कैफी आजमी को दो अलग जेनरेशन का बताया। उन्होंने माधुरी दीक्षित अभिनीत ''एक, दो, तीन...'' गीत लिखने के पीछे का किस्सा भी सुनाया। कहाकि बारामासा लोकगीत से प्रेरित है। इसमें बिरहन बताती है कि कैसे पति के बगैर एक साल बिताया। इसके अलावा उन्होंने रील्स के जमाने में कविताओं की अहमियत पर कहाकि यह अच्छा है। इंटरनेट के चलते आज कविताओं की पहुंच बढ़ गई है।
दुखों का न करें शोऑफ
गीतकार जावेद अख्तर ने कहाकि व्यक्ति को सफलता पर घमंड नहीं करना चाहिए, यह बात सब कहते हैं। पर, मैं कहता हूं कि दुखों पर भी घमंड नहीं करना चाहिए। व्यक्ति सफल होने के बाद दुखों का ऐसा शोऑफ करता है, जो शोभा नहीं देता। विफलता कोई मेडल नहीं है। ऐसे में इससे बचना चाहिए।
बच्चे आवाज हैं, गूंज नहीं...
बच्चे आवाज हैं, गूंज नहीं। जरूरी नहीं कि डॉक्टर का बेटा डॉक्टर और इंजीनियर का इंजीनियर बने। वे जो करना चाहें, करने दें। पर, ध्यान रहे। जो भी काम करें, वह उत्कृष्ट स्तर का होना चाहिए। जावेद अख्तर ने कहाकि मामूली की वैल्यू नहीं होती, एक्सीलेंस चाहिए। जूता पॉलिश करना हो या घास काटना...जब इन कामों की जरूरत हो तो लोग आपके दरवाजे पर खड़ें होने चाहिए। वह काम करें, जिससे मोहब्बत हो। पैसा कमाने के लिए काम न करें। उन्होंने कहाकि क्रिएटिविटी बारीक काम है।
''बिल्ली ओवन में बच्चे दे दे तो उसे बिस्किट नहीं कहते...''
जावेद अख्तर ने बताया कि हुआ कुछ यूं कि मेरी मां ग्वालियर चली गईं और मेरा जन्म भी वहीं हुआ। इस पर जब लोग पूछते कि मैं कहां का हूं तो खुद को लखनऊ का बताता। मैंने लखनऊ में एक लंबा अरसा गुजारा। कॉल्विन तालुकेदार से पढ़ाई की और लखनऊ को जीभरकर जिया। पर, अब लोगों को कौन समझाए कि बिल्ली ओवन में बच्चे दे दे तो उसे बिस्किट नहीं कहेंगे...।
इमरोज की पीठ पर अमृता लिखती थीं ''साहिर''
रेपर्टवा के शब्द मंच पर लक्ष्य माहेश्वरी ने अमृता प्रीतम के जीवन के किस्से सुनाए, जिन्हें दर्शकों ने खूब पसंद किया। लक्ष्य माहेश्वरी ने बताया कि आजाद भारत का पहला लिवइन रिलेशनशिप अमृता व इमरोज का था। उन्होंने यह भी बताया कि जब स्कूटर पर अमृता इमरोज के साथ बैठती थीं तो इमरोज की पीठ पर अपनी उंगलियों से साहिर का नाम लिखा करती थीं। उनके बीच उत्कृष्ट स्तर का प्रेम था, जो दुनियावी चीजों से अलग था। लक्ष्य माहेश्वरी के किस्सों ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।