खून से रंग गई थीं जनता एक्सप्रेस की सीटें
बछरावां स्टेशन के पास भीषण दुर्घटना की शिकार हुई जनता एक्सप्रेस की जनरल बोगी को जब भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने काटकर उसमें फंसे लोगों को निकालना शुरू किया तो इसकी सीटें पूरी तरह खून से रंग गई थी।
नीले रंग की गद्दी पूरी तरह लाल हो चुकी थी। खून से रंगी सीटें और गमछे चीख-चीख कर बयां कर रहे थे कि हादसे का जख्म कितना गहरा होगा।
आईटीबीपी के जवानों ने जनता एक्सप्रेस की जनरल बोगी में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया तो उसमें से निकलने वाला हर सामान खून से रंगा हुआ था। जिन सीटों पर बैठकर और सोकर यात्री यात्रा कर रहे थे, वो खून से रंग गई थीं।
लोहे की रॉड, सीट की गद्दी, यात्रियों के शॉल व बैग पूरी तरह लाल हो चुके थेे। इन सीटों को काटकर जब आईटीबीपी के जवानों ने बाहर निकालना शुरू किया तो हर किसी का कलेजा बैठ गया।
बूंद-बूंद कर यात्रियों के जिस्म से निकलता रहा लहू
घटनास्थल के पास ट्रैक पर पड़े गमछे, कपड़े और बैग खून से सने हुए थे। कोच से भी खून रिस-रिस कर बह रहा था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोच के पिचकने के बाद यात्रियों के जिस्म से एक-एक बूंद खून निकलता चला गया और लोग तड़प-तड़प कर मौत की नींद सोने को मजबूर हो गए।
भाई की सलामती का फोन आया तो मिला चैन
अपने भाई अमित की तलाश में बछरावां स्टेशन पहुंचे मनोज कुमार को उनका बैग तो मिला लेकिन भाई की कोई खोज-खबर नहीं मिली। बैग लेकर वे रेलवे की मेडिकल वैन की ओर दौड़े तो वहां तैनात आरपीएफ जवानों ने बताया कि घायलों को सीएचसी भेजा गया है।
वहां पहुंचने पर भी कुछ नहीं पता चला तो मनोज वापस घटनास्थल पर पहुंचे। इसी बीच अमित के नंबर से फोन आया कि वे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं। हाथ और पैर में मामूली चोट है। भाई की सलामती की खबर मिलने के बाद मनोज तुरंत ट्रॉमा के लिए निकल गए।