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करीब आए, समधी तक बने फिर 'राजनीति' ने अलग कर दिया

Fri, 04 Sep 2015 02:18 AM IST
Updated Fri, 04 Sep 2015 02:18 AM IST
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 janta dal parivar break before bihar election

बिहार में समाजवादी पार्टी अलग चुनाव लड़ेगी। रामगोपाल यादव की इसी घोषणा के साथ बिहार में बना महागठबंधन तो टूटा ही,जनता परिवार के भी राजनीति मतभेद सामने आ गए।

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ज्यादा समय नहीं हुआ जब पूरा जनता परिवार एक पार्टी और एक निशान की बात कर रही थी। एक चुनाव चिहन के रूप में लालू यादव अपनी लालटेन और नितिश कुमार अपना तीर कमान रखने के लिए तैयार थे।
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लालू और नीतिश दोनों के ही बयान थे कि वह अपना चुनाव चिहन छोड़ने के लिए तैयार हैं। राजनीतिक गलियारों में ऐसे कयास थे कि साइकिल ही जनता परिवार का चुनाव चिहन हो सकती है।
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मुलायम सिंह इन जनता परिवार के मुखिया थे। ये करीबियां सिर्फ राजनीतिक नहीं थी। कभी मुलायम सिंह यादव को बिहार का वोटकटवा कहने वाले लालू यादव अब मुलायम सिंह यादव के समधी बन चुके थे। लालू की बेटी राजलक्ष्मी मुलायम के परिवार की बहू बनकर आई थी। तब लगा कि इस गठबंधन में भावनाएं भी आ गईं हैं इसलिए यह कायम रहेगा।

पर राजनीति ने कर दिया अलग

 janta dal parivar break before bihar election

राजनीति ने इस परिवार को एक बार फिर से अलग कर दिया। सीटों के बंटवारे की जब बात शुरू हुई तो गठबंधन के तीन घटक दलों जदयू, राजद और कांग्रेस को तो शामिल किया गया लेकिन समाजवादी पार्टी को कोई भी नुमाइंदा सीटों के इन बंटवारे वाली बैठकों में शामिल नहीं हुआ।

जद यू और राजद ये सोचकर चल रहे थे कि चूंकि सपा का बिहार की राजनीति में कोई महत्वपूर्ण दखल तो है नहीं इसलिए इसे जीतनी भी सीटें दी जाएंगी सपा मान जाएगी।

ऐसी खबरें भी नहीं आईं कि सपा अधिक सीटों के लिए सौदेबाजी कर रही हो। बाद में यह कहा गया कि सपा को पांच सीटें दे जा रही हैं।

समाजवादी पार्टी ने पांच ‌सीटें दिए जाने को अपना राजनीतिक अपमान माना। और उसके अनुसार वह इससे ज्यादा सीटें अकेले ही जीतकर दिखा सकती है।

क्या मोदी के डर से एक‌जुट हुआ था कुनबा

 janta dal parivar break before bihar election

बिहार चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को रोकने के लिए समाजवादी कुनबे ने मिलकर जनता परिवार बनाया था। जनता परिवार का ऐलान अप्रैल 2015 में किया गया।

जनता परिवार के बनने की घोषणा करते हुए शरद यादव ने कहा था कि एक होने का फैसला सभी दलों की आम सहमति से हुआ है। जनता परिवार की संसदीय समिति के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव बनाया गया था।

एकता की घोषणा के बाद राजद अध्यक्ष ने कहा था कि अभी देश में सांप्रदायिक शक्तियों को देखते हुए हमने इसका फैसला किया है। जनता परिवार विलय की बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जदयू अध्यक्ष शरद यादव, पार्टी महासचिव केसी त्यागी, जेडीएस अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद, सजपा प्रमुख कमल मोरारका व इनेलो नेता दुष्यंत चौटाला शामिल थे।

बैठक में शामिल होते समय बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि फायदे-नुकसान की बात नहीं है। विलय होना चाहिए ये हम सब की इच्छा थी। हम देश में सशक्त विपक्ष बनकर आएंगे। बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुए इस विलय को बिहार में मोदी रथ को रोकने की रणनीति के तौर पर देखा गया था, जबकि उत्तर प्रदेश में भी यह गठजोड़ अहम माना जा रहा था।

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