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लोहिया संस्थान : ओपीडी से इमरजेंसी तक दौड़, हासिल कुछ नहीं
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लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में ओपीडी और इमरजेंसी के बीच दौड़ लगाने के बावजूद मरीजों का दर्द कम नहीं हो रहा है। मंगलवार को भी यह सिलसिला जारी रहा। किडनी की समस्या से पीड़ित लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर निवासी सुरेश को लेकर यहां पहुंचे परिवारीजन दिन भर इमरजेंसी व ओपीडी के बीच चक्कर काटते रहे। उन्हें भर्ती करने के लिए पर्चा तो बना, लेकिन शाम को बेड खाली न होने की बात कह लौटा दिया गया।
भर्ती का पर्चा बना, पर नहीं मिला बेड
सुरेश ने बताया कि किडनी की बीमारी का इलाज लोहिया संस्थान से ही चल रहा था। मंगलवार को अचानक समस्या बढ़ने पर घरवाले उन्हें लेकर लोहिया संस्थान पहुंचे तो ओपीडी में दिखाने के लिए आरटीपीसीआर की निगेटिव जांच रिपोर्ट मांगी गई। इतने कम समय में जांच रिपोर्ट संभव नहीं थी। इसलिए घरवाले इमरजेंसी लेकर पहुंचे, लेकिन वहां भी इलाज नहीं मिला। काफी मान-मनौव्वल के बाद भर्ती करने के लिए पर्चा तो बना दिया, लेकिन बाद में बेड खाली न होने की बात कह शाम चार बजे बाहर कर दिया गया।
दो दिन से ऑक्सीजन सपोर्ट पर मरीज, नहीं मिला बेड
दिल और किडनी की समस्या से पीड़ित बहराइच निवासी जोहरा को मंगलवार को भी बेड नहीं मिल सका। वह सोमवार को लोहिया संस्थान लाए गए और मंगलवार शाम तक इमरजेंसी में पड़े रहे। हालांकि, इस दौरान ऑक्सीजन सपोर्ट की व्यवस्था बनाए रखी गई। मरीज को दूसरे सेंटर ले जाने की डॉक्टरों की सलाह के बाद तीमारदार इसकी तैयारी में लगे थे।
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ओपीडी में चाहिए आरटीपीसीआर रिपोर्ट, इमरजेंसी में बेड नहीं
लोहिया संस्थान में मरीजों को इलाज न मिल पाने में बेड की कमी के साथ आरटीपीसीआर जांच की अनिवार्यता भी अहम कारण है। ओपीडी में दिखाने के लिए मरीज व तीमारदार दोनों को आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट जरूरी है। यहां रोजाना काफी ऐसे गंभीर मरीज आते हैं जिनके पास यह रिपोर्ट नहीं होती है। ऐसे में वे इमरजेंसी का रुख करते हैं। इससे सारा दबाव इमरजेंसी पर ही आ जाता है।
ऑर्थोपेडिक की व्यवस्था नहीं
लोहिया संस्थान में अभी तक ऑर्थोपेडिक विभाग की व्यवस्था नहीं है। आमतौर पर एक्सीडेंट में घायल होने पर चोट के साथ ही कई बार मरीजों की हड्डियां भी फ्रैक्चर होती हैं, लेकिन यहां ऑर्थोपेडिक विभाग न होने से मरीज को वापस कर दिया जाता है।
सुरक्षा के लिए जांच
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रवक्ता डॉ. श्रीकेश सिंह का कहना है कि संस्थान की ओपीडी में लोगों की सुरक्षा के लिए ही आरटीपीसीआर जांच की अनिवार्यता रखी गई है। जहां तक संभव होता है हर मरीज को इलाज दिया जाता है। बेड न होने की सूरत में विशेष परिस्थिति में ही मरीज को रेफर करते हैं।
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भर्ती का पर्चा बना, पर नहीं मिला बेड
सुरेश ने बताया कि किडनी की बीमारी का इलाज लोहिया संस्थान से ही चल रहा था। मंगलवार को अचानक समस्या बढ़ने पर घरवाले उन्हें लेकर लोहिया संस्थान पहुंचे तो ओपीडी में दिखाने के लिए आरटीपीसीआर की निगेटिव जांच रिपोर्ट मांगी गई। इतने कम समय में जांच रिपोर्ट संभव नहीं थी। इसलिए घरवाले इमरजेंसी लेकर पहुंचे, लेकिन वहां भी इलाज नहीं मिला। काफी मान-मनौव्वल के बाद भर्ती करने के लिए पर्चा तो बना दिया, लेकिन बाद में बेड खाली न होने की बात कह शाम चार बजे बाहर कर दिया गया।
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दो दिन से ऑक्सीजन सपोर्ट पर मरीज, नहीं मिला बेड
दिल और किडनी की समस्या से पीड़ित बहराइच निवासी जोहरा को मंगलवार को भी बेड नहीं मिल सका। वह सोमवार को लोहिया संस्थान लाए गए और मंगलवार शाम तक इमरजेंसी में पड़े रहे। हालांकि, इस दौरान ऑक्सीजन सपोर्ट की व्यवस्था बनाए रखी गई। मरीज को दूसरे सेंटर ले जाने की डॉक्टरों की सलाह के बाद तीमारदार इसकी तैयारी में लगे थे।
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ओपीडी में चाहिए आरटीपीसीआर रिपोर्ट, इमरजेंसी में बेड नहीं
लोहिया संस्थान में मरीजों को इलाज न मिल पाने में बेड की कमी के साथ आरटीपीसीआर जांच की अनिवार्यता भी अहम कारण है। ओपीडी में दिखाने के लिए मरीज व तीमारदार दोनों को आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट जरूरी है। यहां रोजाना काफी ऐसे गंभीर मरीज आते हैं जिनके पास यह रिपोर्ट नहीं होती है। ऐसे में वे इमरजेंसी का रुख करते हैं। इससे सारा दबाव इमरजेंसी पर ही आ जाता है।
ऑर्थोपेडिक की व्यवस्था नहीं
लोहिया संस्थान में अभी तक ऑर्थोपेडिक विभाग की व्यवस्था नहीं है। आमतौर पर एक्सीडेंट में घायल होने पर चोट के साथ ही कई बार मरीजों की हड्डियां भी फ्रैक्चर होती हैं, लेकिन यहां ऑर्थोपेडिक विभाग न होने से मरीज को वापस कर दिया जाता है।
सुरक्षा के लिए जांच
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रवक्ता डॉ. श्रीकेश सिंह का कहना है कि संस्थान की ओपीडी में लोगों की सुरक्षा के लिए ही आरटीपीसीआर जांच की अनिवार्यता रखी गई है। जहां तक संभव होता है हर मरीज को इलाज दिया जाता है। बेड न होने की सूरत में विशेष परिस्थिति में ही मरीज को रेफर करते हैं।