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Israel-Iran War:खाड़ी देशों में बारूद के धमाके, बाजारों में बढ़ी महंगाई, व्यापारी बोले- होने लगी स्टॉक की कमी

Mon, 09 Mar 2026 09:51 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Mon, 09 Mar 2026 09:51 AM IST
सार

खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण बाजारों में चीजों के दाम बढ़ने लगे हैं। जिस तरह के हालात हैं उससे 30-40 फीसदी तक तेल और उर्वरकों की कीमतें बढ़ने की आशंका है।

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Israel-Iran War: Explosions of gunpowder in Gulf countries, rising inflation in markets
- फोटो : amar ujala

विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े हालात के चलते खाड़ी देशों से आयात-निर्यात प्रभावित होने लगा है। वहां बरस रहे बारूद के धमाकों की गूंज का असर यहां राजधानी के बाजार पर भी पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और गैस सिलिंडर के दाम बढ़ने की आशंका के बीच व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो उर्वरकों की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है, जिससे खाद्य उत्पादन पर असर पड़ने और कीमतों में 30 से 40 फीसदी तक वृद्धि की आशंका है।
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बख्शी तालाब स्थित चंद्रभानु कृषि महाविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह के अनुसार सऊदी अरब, कत्तर, ओमान और यूएई यूरिया, सल्फर और अमोनिया के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। ईरान से आने वाला अमोनिया फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्व तैयार करने में उपयोग होता है। आपूर्ति बाधित होने से उर्वरकों की उपलब्धता कम हो सकती है, जिससे किसानों की लागत बढ़ेगी और सरकार की सब्सिडी पर भी दबाव पड़ेगा।

अभी से स्टॉक की कमी, आगे बढ़ेगा दबाव
खाद कारोबारी अनुपम अग्रवाल का कहना है कि इस समय आलू की खोदाई और सरसों की कटाई का दौर चल रहा है, जबकि नई बोआई में अभी समय है। इसके बावजूद बाजार में स्टॉक की कमी दिखाई दे रही है। खाड़ी देशों से आपूर्ति बाधित होने का असर स्पष्ट दिख रहा है। यदि सरकार को विदेश से अधिक कीमत पर खरीद करनी पड़ी तो महंगाई बढ़ना तय है, जिससे किसानों की लागत भी बढ़ेगी।

चिकनकारी : 15 करोड़ के ऑर्डर होल्ड पर, कई रद्द

ईद के मद्देनजर खाड़ी देशों से मिलने वाले ऑर्डर प्रभावित होने से लखनऊ के चिकनकारी उद्योग को बड़ा झटका लगा है। लखनऊ चिकनकारी हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल के मुताबिक करीब 15 करोड़ रुपये के ऑर्डर फिलहाल होल्ड पर चले गए हैं, जबकि कई संभावित ऑर्डर रद्द हो गए। इससे लगभग 50 करोड़ रुपये के निर्यात कारोबार पर असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि कुल निर्यात का करीब 25 फीसदी हिस्सा खाड़ी देशों को जाता है, जबकि शेष 75 फीसदी यूरोप और अमेरिका के बाजारों में भेजा जाता है।

सेला चावल का निर्यात भी प्रभावित
पांडेयगंज के गल्ला कारोबारी राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि सेला चावल का बड़ा हिस्सा ईरान को निर्यात होता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में निर्यात रुक गया है। इसका असर कीमतों पर भी पड़ा है। पहले 7000 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला सेला चावल अब करीब 6000 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने सरकार से बंदरगाहों पर पड़े माल की पेनाल्टी में राहत देने और फंसे भुगतान को बैंकों के माध्यम से जारी कराने की मांग की है।

31 मार्च तक नहीं बढ़ेगा परिवहन भाड़ा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों ने फिलहाल दाम न बढ़ाने की बात कही है, लेकिन बाजार में आशंका बनी हुई है। ट्रांसपोर्टर राज नारायण ने बताया कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ने पर परिवहन भाड़ा भी बढ़ता है। हालांकि कंपनियों से अनुबंध होने के कारण 31 मार्च तक भाड़ा नहीं बढ़ाया जाएगा, ताकि व्यापार पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

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