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सिंचाई विभाग ने किया अलर्ट, वरना झेलेंगे गंभीर जल संकट
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शहर की करीब 10 लाख आबादी पानी के लिए कठौता झील पर निर्भर है। चिंताजनक पहलू यह है कि झील में टूटफूट और सिल्ट जमा होने से पानी रिजर्व रखने की इसकी क्षमता घट गई है। वहीं कठौता को पानी देने वाली शारदा सहायक पोषक नहर को सिंचाई विभाग अगले साल करीब 60 दिनों के लिए बंद रखेगा। ऐसे में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। सिंचाई विभाग ने चेतावनी जारी कर जलकल विभाग और एलडीए को वैकल्पिक इंतजाम करने को कहा है।
सिंचाई विभाग के द्वादश मंडल के अधीक्षण अभियंता कुमार मंगलम ने पत्र भेजकर बताया है कि पोषक नहर की क्षमता बढ़ाने के लिए वर्ष 2022-2023 में नहर से सिल्ट हटाने के अलावा गेटों के अनुरक्षण, लाइनिंग की मरम्मत, पक्के कार्यों को दोबारा कराए जाने की जरूरत है। ऐसे में नहर बंदी वर्तमान में 28 दिन की जगह 45 से 60 दिन की हो सकती है। वहीं इस साल की नहर की सफाई का इन दिनों चालू है। इसके लिए छह नवंबर तक नहर को बंद रखा जाएगा।
सिंचाई विभाग का कहना है कि कठौता झील में भी काफी टूटफूट है। वहीं सिल्ट भी जमा है। ऐसे में झील की संग्रहण क्षमता कम है। ऐसे में जरूरी है कि मौजूदा झील की क्षमता बढ़ाने पर काम हो। ऐसा नहीं होने पर नहर बंदी के दौरान पानी रिजर्व करने के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने होंगे। खुद जलकल विभाग के अधिकारियों का मानना है कि कठौता झील में अधिकतम 28 दिन का ही पानी रिजर्व रखा जा सकता है। वहीं झील की क्षमता कम होने से यह रिजर्व अवधि 15 से 20 दिन ही रह जाती है।
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नलकूपों की क्षमता पहले ही कम
गोमतीनगर और इंदिरानगर में लगे जलकल विभाग के नलकूपों की क्षमता पहले ही भूगर्भ जलस्तर के नीचे जाने की वजह से कम हो गई है। खुद जानकारों का कहना है कि 40 प्रतिशत तक पानी की आपूर्ति इससे कम हुई है।
एलडीए को ही करना होगा इंतजाम
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता का कहना है कि 1985 में हुए शासनादेश के मुताबिक कठौता झील में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी एलडीए की है। किसी वजह से अगर नहर बंद करनी पड़ती है तो जहां जलकल विभाग को पूर्व सूचना देनी होती है, वहीं एलडीए को पानी रिजर्व करने के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने होंगे। एलडीए सचिव पवन गंगवार का कहना है कि मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह को जरूरी कार्रवाई के लिए कहा गया है।
50 नलकूपों की भी व्यवस्था
जलकल विभाग के महाप्रबंधक एसके वर्मा का कहना है कि कठौता झील से इंदिरानगर और गोमतीनगर एरिया को पानी की आपूर्ति होती है। वैसे तो नहर बंदी के दौरान पूरी तरह कठौता झील पर ही निर्भर नहीं रहते हैं। इन इलाकों में लगे 50 नलकूपों का उपयोग भी पानी की आपूर्ति के लिए किया जाता है। हालांकि, यह हकीकत है कि झील से पूरी होने वाली जरूरत नलकूप से पूरी नहीं हो सकती। जल संकट खड़ा नहीं हो इसके लिए जरूरी इंतजाम पूर्व में ही कराए जाएंगे।
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सिंचाई विभाग के द्वादश मंडल के अधीक्षण अभियंता कुमार मंगलम ने पत्र भेजकर बताया है कि पोषक नहर की क्षमता बढ़ाने के लिए वर्ष 2022-2023 में नहर से सिल्ट हटाने के अलावा गेटों के अनुरक्षण, लाइनिंग की मरम्मत, पक्के कार्यों को दोबारा कराए जाने की जरूरत है। ऐसे में नहर बंदी वर्तमान में 28 दिन की जगह 45 से 60 दिन की हो सकती है। वहीं इस साल की नहर की सफाई का इन दिनों चालू है। इसके लिए छह नवंबर तक नहर को बंद रखा जाएगा।
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सिंचाई विभाग का कहना है कि कठौता झील में भी काफी टूटफूट है। वहीं सिल्ट भी जमा है। ऐसे में झील की संग्रहण क्षमता कम है। ऐसे में जरूरी है कि मौजूदा झील की क्षमता बढ़ाने पर काम हो। ऐसा नहीं होने पर नहर बंदी के दौरान पानी रिजर्व करने के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने होंगे। खुद जलकल विभाग के अधिकारियों का मानना है कि कठौता झील में अधिकतम 28 दिन का ही पानी रिजर्व रखा जा सकता है। वहीं झील की क्षमता कम होने से यह रिजर्व अवधि 15 से 20 दिन ही रह जाती है।
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नलकूपों की क्षमता पहले ही कम
गोमतीनगर और इंदिरानगर में लगे जलकल विभाग के नलकूपों की क्षमता पहले ही भूगर्भ जलस्तर के नीचे जाने की वजह से कम हो गई है। खुद जानकारों का कहना है कि 40 प्रतिशत तक पानी की आपूर्ति इससे कम हुई है।
एलडीए को ही करना होगा इंतजाम
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता का कहना है कि 1985 में हुए शासनादेश के मुताबिक कठौता झील में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी एलडीए की है। किसी वजह से अगर नहर बंद करनी पड़ती है तो जहां जलकल विभाग को पूर्व सूचना देनी होती है, वहीं एलडीए को पानी रिजर्व करने के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने होंगे। एलडीए सचिव पवन गंगवार का कहना है कि मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह को जरूरी कार्रवाई के लिए कहा गया है।
50 नलकूपों की भी व्यवस्था
जलकल विभाग के महाप्रबंधक एसके वर्मा का कहना है कि कठौता झील से इंदिरानगर और गोमतीनगर एरिया को पानी की आपूर्ति होती है। वैसे तो नहर बंदी के दौरान पूरी तरह कठौता झील पर ही निर्भर नहीं रहते हैं। इन इलाकों में लगे 50 नलकूपों का उपयोग भी पानी की आपूर्ति के लिए किया जाता है। हालांकि, यह हकीकत है कि झील से पूरी होने वाली जरूरत नलकूप से पूरी नहीं हो सकती। जल संकट खड़ा नहीं हो इसके लिए जरूरी इंतजाम पूर्व में ही कराए जाएंगे।