{"_id":"634a6bedac9b995e2b6f3b4c","slug":"ips-manilal-patidar-surrenders-in-lucknow-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow Court: दो साल से फरार चल रहे आईपीएस मणिलाल पाटीदार ने कोर्ट में किया आत्मसमर्पण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow Court: दो साल से फरार चल रहे आईपीएस मणिलाल पाटीदार ने कोर्ट में किया आत्मसमर्पण
Sat, 15 Oct 2022 03:29 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 15 Oct 2022 03:29 PM IST
सार
महोबा के एक व्यापारी से छह लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोपी आईपीएस मणिलाल पाटीदार ने शनिवार को लखनऊ कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। व्यापारी की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई थी जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
विज्ञापन
आईपीएस मणिलाल पाटीदार (फाइल फोटो)
- फोटो : prayagraj
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दो साल से फरार चल रहे आईपीएस अफसर मणिलाल पाटीदार ने शनिवार को लखनऊ कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है। वह महोबा के पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे तब उन्हें भ्रष्टाचार के एक मामले में निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने महोबा के एक खनन व्यापारी से छह लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। उन्हें 9 सितंबर 2020 को निलंबित किया गया था तब से वह फरार थे।
विज्ञापन
एसआईटी ने उन्हें व्यापारी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया था। उन पर महोबा कोतवाली और विजिलेंस में मुकदमा दर्ज किया गया था।
मणिलाल पाटीदार 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। एडीजी जोन प्रयागराज ने उन पर एक लाख रुपये का पुरस्कार घोषित किया था। उत्तर प्रदेश की तमाम पुलिस व एजेंसी मणिलाल पाटीदार को पकड़ने में नाकाम रही। उन्होंने आज लखनऊ में एडीजे 9 की कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया।
विज्ञापन
महोबा के खनन व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी ने 7 सितंबर 2020 को वीडियो वायरल कर पुलिस अधीक्षक पर गंभीर आरोप लगाए थे। इंद्रकांत त्रिपाठी को 9 सितंबर 2020 को संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगी थी और 14 सितंबर को कानपुर के अस्पताल में निधन हो गया था।
विज्ञापन
प्रदेश सरकार ने तत्कालीन आईजी वाराणसी विजय सिंह मीणा की अध्यक्षता में एक एसआईटी का गठन कर जांच के लिए महोबा भेजा था। बार-बार बुलाए जाने के बाद भी पाटीदार एसआईटी के सामने पेश नहीं हुए थे। एसआईटी ने अपनी जांच में पाटीदार को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी माना था।