फिर मिलेगा प्रधानाचार्य बनने का मौका
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माध्यमिक शिक्षा परिषद से सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के पदों का फिर से साक्षात्कार शुरू होगा। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया है।
यहां से अनुमति मिलने के बाद साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें ही यह स्पष्ट होगा कि पूर्व में प्रधानाचार्य के पदों के लिए हुए साक्षात्कार रद्द किए जाएंगे या उसे सही माना जाएगा।
आयोग ने वर्ष 2013 में लेक्चरर और प्रधानाचार्य के पदों के लिए आवेदन मांगे थे। आयोग ने प्रधानाचार्य के 909 पदों के लिए साक्षात्कार शुरू किया तो वह विवादों में आ गया। तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. आशाराम पर आरोप भी लगे।
स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति
शासन ने मामले में हस्तक्षेप करना चाहा तो तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष ने उसे मानने से इन्कार कर दिया। विधानसभा में भी इसको लेकर जमकर हंगामा हुआ।
राज्य सरकार ने आयोग के लिए स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी है। इसलिए आयोग चाहता है कि प्रधानाचार्य के पदों के लिए साक्षात्कार शुरू कर भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाए।
इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंत्री महबूब अली और प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा मनोज कुमार सिंह के साथ बैठक में प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा चुका है। इसकी पुष्टि अध्यक्ष डॉ. परशुराम पाल ने भी किया है।
उन्होंने कहा है कि शासन से प्रधानाचार्य पदों के लिए साक्षात्कार की अनुमति मांगी गई है। इसमें ही यह स्पष्ट होगा कि पूर्व में लिए गए साक्षात्कार का क्या करना है।
कर्मियों को पेंशन देगा आयोग
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग में कार्यरत कर्मचारियों को पेंशन आयोग ही देगा। प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस पर सहमति बन गई है।
उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन वर्ष 1982 में हुआ था। इसमें रखे गए कर्मचारी अब रिटायर होने लगे हैं।
इसलिए आयोग के अध्यक्ष ने शासन से इस संबंध में सुझाव मांगा था, जिस पर स्थिति साफ कर दी गई कि आयोग ही पेंशन देगा।