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Lucknow News: प्रशिक्षक नदारद...मशीनें खराब, व्यवस्थाओं की उधड़ी मिली सिलाई
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प्रशिक्षण केंद्र में खराब पड़ी मशीनें
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जितेंद्र अवस्थी
लखनऊ। राजधानी के सिलाई प्रशिक्षण केंद्र बदहाली की मार झेल रहे हैं। निशातगंज स्थित रानी बरेली कोठी के दूसरे तल पर संचालित समाज कल्याण विभाग से अनुदानित ऑल इंडिया वीमेंस कॉन्फ्रेंस सिलाई प्रशिक्षण केंद्र में दोपहर 1ः15 बजे सन्नाटा पसरा मिला। केंद्र में एक भी छात्रा मौजूद नहीं थी। छात्राओं को हुनरमंद बनाने वाली मशीनें खराब मिलीं। कमरे में दीवारों और छतों का प्लास्टर गिर रहा है। वायरिंग उखड़ी हुई मिली। खराब मशीनें बरामदे में पड़ी हुई हैं। पंखे भी सिर्फ दिखावे के लिए हैं। भवन की हालत जर्जर होने से हादसे का डर भी बना रहता है।
दाे कमरों में चल रहे प्रशिक्षण केंद्र में सिलाई का एक और दो वर्षीय कोर्स कराया जाता है। हालांकि बदहाल व्यवस्था और प्रशिक्षकों की कमी के कारण छात्राओं की संख्या भी घटती जा रही है। केंद्र पर मौजूद शिक्षिका अलका राय और बाबू विनोद त्रिपाठी ने बताया कि केंद्र में हर साल 21 सीटों पर प्रवेश लिया जाता है। इस वर्ष सिर्फ सात प्रवेश हुए हैं। यहां प्रधानाचार्य, तीन प्रशिक्षक, एक बाबू और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मिलाकर सात पद स्वीकृत हैं। हालांकि मौजूदा समय में केंद्र में एक ही प्रशिक्षिका है। केंद्र में प्रधानाचार्य तक नहीं हैं। बाबू ने बताया कि केंद्र में 25 सिलाई मशीनें हैं, जिनमें अधिकांश खराब हैं।
तीन शिक्षकों पर 42 छात्राओं को हुनरमंद बनाने का जिम्मा
माली खां सराय चौक में संचालित महिला उद्योग केंद्र में छात्राएं सिलाई और कढ़ाई कोर्स में 42 सीटों पर प्रवेश लिया जाता है। इन छात्राओं को हुनरमंद बनाने का जिम्मा प्रधानाचार्य नीलम और दो प्रशिक्षकों पर है। प्रधानाचार्य ने बताया कि एक वरिष्ठ प्रशिक्षक का पद रिक्त है। केंद्र में बाबू मनीष तिवारी की तैनाती है।
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लखनऊ। राजधानी के सिलाई प्रशिक्षण केंद्र बदहाली की मार झेल रहे हैं। निशातगंज स्थित रानी बरेली कोठी के दूसरे तल पर संचालित समाज कल्याण विभाग से अनुदानित ऑल इंडिया वीमेंस कॉन्फ्रेंस सिलाई प्रशिक्षण केंद्र में दोपहर 1ः15 बजे सन्नाटा पसरा मिला। केंद्र में एक भी छात्रा मौजूद नहीं थी। छात्राओं को हुनरमंद बनाने वाली मशीनें खराब मिलीं। कमरे में दीवारों और छतों का प्लास्टर गिर रहा है। वायरिंग उखड़ी हुई मिली। खराब मशीनें बरामदे में पड़ी हुई हैं। पंखे भी सिर्फ दिखावे के लिए हैं। भवन की हालत जर्जर होने से हादसे का डर भी बना रहता है।
दाे कमरों में चल रहे प्रशिक्षण केंद्र में सिलाई का एक और दो वर्षीय कोर्स कराया जाता है। हालांकि बदहाल व्यवस्था और प्रशिक्षकों की कमी के कारण छात्राओं की संख्या भी घटती जा रही है। केंद्र पर मौजूद शिक्षिका अलका राय और बाबू विनोद त्रिपाठी ने बताया कि केंद्र में हर साल 21 सीटों पर प्रवेश लिया जाता है। इस वर्ष सिर्फ सात प्रवेश हुए हैं। यहां प्रधानाचार्य, तीन प्रशिक्षक, एक बाबू और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मिलाकर सात पद स्वीकृत हैं। हालांकि मौजूदा समय में केंद्र में एक ही प्रशिक्षिका है। केंद्र में प्रधानाचार्य तक नहीं हैं। बाबू ने बताया कि केंद्र में 25 सिलाई मशीनें हैं, जिनमें अधिकांश खराब हैं।
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तीन शिक्षकों पर 42 छात्राओं को हुनरमंद बनाने का जिम्मा
माली खां सराय चौक में संचालित महिला उद्योग केंद्र में छात्राएं सिलाई और कढ़ाई कोर्स में 42 सीटों पर प्रवेश लिया जाता है। इन छात्राओं को हुनरमंद बनाने का जिम्मा प्रधानाचार्य नीलम और दो प्रशिक्षकों पर है। प्रधानाचार्य ने बताया कि एक वरिष्ठ प्रशिक्षक का पद रिक्त है। केंद्र में बाबू मनीष तिवारी की तैनाती है।

प्रशिक्षण केंद्र में खराब पड़ी मशीनें

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