फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Institute made huge money from just one medicine.

एक दवा से CSIR ने कमाए 30,000 करोड़ रुपये

Thu, 13 Nov 2014 02:41 AM IST
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 13 Nov 2014 02:41 AM IST
विज्ञापन
Institute made huge money from just one medicine.

देश की सबसे बड़ी वैज्ञानिक संस्था काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) की सबसे बड़ी डील लखनऊ स्थित सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) में विकसित हुई हार्ट अटैक में उपयोगी दवा बनी है।

विज्ञापन


इस दवा से अब तक सीएसआईआर ने 30 हजार करोड़ रुपये कमाए हैं। स्ट्रेप्टोकाइनेज नामक यह दवा हार्ट अटैक के बाद मरीज के हृदय में रक्तसंचार को सामान्य बनाने के लिए सबसे सटीक मानी जाती है जोकि खून के थक्कों को खत्म करने का काम करती है।
विज्ञापन


स्ट्रेप्टोकाइनेज को  इंस्टीट्यूट ऑफ मॉलीक्यूलर टेक्नोलॉजी (इमटेक), चंडीगढ़ में खोजा गया था। इसके बाद सीडीआरआई में इसकी टॉक्सिसिटी जांच के अलावा विकसित करने पर काम किया गया। बुधवार को दवा की खोज करने वाले वैज्ञानिक और वर्तमान में इमटेक के निदेशक डॉ. गिरीश साहनी सीडीआरआई में आयोजित 43वें राष्ट्रीय क्रिस्टेलोग्राफी सेमिनार में शामिल हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉ. साहनी ने बताया कि इस दवा के बनने से पहले एक अमेरिकी कंपनी की ही एक इंजेक्शन 1000 यूएस डॉलर (करीब 60,000 रुपये) में बिकता था।

इस दवा के 15 ब्रांड बाजार में मौजूद

Institute made huge money from just one medicine.

इस दवा को बाजार में लाने केलिए एक अमेरिकी कंपनी ही सामने आई। इस दवा को केवल 500 रुपये में बाजार में उतारा गया। अब भी यह केवल 1100 रुपये में बिकती है। सरकारी अस्पतालों केलिए केवल 450 रुपये में मौजूद है। दूसरी ब्रांडेड कंपनियों को अपनी कीमत कम करनी पड़ी। डॉ. साहनी  ने बताया कि 2002 में सीएसआई के साथ अमेरिकी कंपनी ने 15 करोड़ यूएस डॉलर (करीब 900 करोड़ रुपये) और रॉयल्टी में डील हुई।

आज सीएसआईआर का इस दवा की टोटल मार्केट वैल्यू 30,000 करोड़ रुपये पहुंच गई है। उनका कहना था कि अब इस दवा के15 ब्रांड बाजार में मौजूद हैं। वहीं इसे अधिक प्रभावी बनाने केलिए टारगेटड क्लॉट बूस्टिंग ड्रग के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसका क्लीनिकल ट्रायल पिछले साल पूरा कर लिया गया है।

इसकी क्षमता की जांच केलिए मरीजों पर ट्रायल भी फरवरी 2014 में गुजरात के करमसद मेडिकल कालेज में शुरू कर दिया गया है। जल्दी ही यह ड्रग मरीजों के लिए उपलब्ध होगी। कार्यक्रम में आयोजक इंडियन क्रिस्टेलोग्राफी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. टीपी सिंह, सीडीआरआई निदेशक डॉ. एसके पुरी, आयोजक सचिव डॉ. राम रविशंकर मौजूद रहे।

नए युग की शुरूआत एक्सरे क्रिस्टेलोग्राफी
वैज्ञानिक ने बताया कि एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी मरीजों के लिए आधुनिक दवाएं बनाने का एक महत्वपूर्ण जरिया होगी। इससे बनने वाले 3डी स्ट्रक्चर की मदद से डायबिटीज के लिए पेनसिलिन, कैंसर, हृदय रोग और विटामिन बी12 जैसी प्रभावी ड्रग विकसित की जा सकेंगीं।

सीधे मर्ज पर हमला करेंगी भविष्य की दवाएं

Institute made huge money from just one medicine.

वरिष्ठ वैज्ञानिक और इमटेक निदेशक डॉ. गिरीश साहनी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि भविष्य की दवा सीधे मर्ज को ठीक करने वाली (टारगेट स्पेसिफिक ड्रग) होंगीं। यह काम बायो-थेरेप्यूटिक तकनीक से होगा।

यह दवाओं केविकसित होने का भविष्य होगा। वर्तमान सिस्टम से बनने वाली दवा उतनी प्रभावी नहीं होती, साथ ही शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचाती है।

इसके लिए अमेरिका, यूरोप में काम शुरू हो चुका है। भारत में अभी हालांकि कोई काम नहीं हुआ। इमटेक ने इसकी शुरुआत की है। डॉ. साहनी का कहना था कि हमारे देश में दवा को विकसित करना आसान नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed