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...तो भारत को मिल जाता दूसरा नोबेल पुरस्कार
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 04 Mar 2014 09:42 AM IST
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‘भारत के युवाओं में बहुत क्षमता है। विज्ञान के क्षेत्र में ये यूथ कुछ कर दिखाएंगे। बस, संसाधन इनके आड़े आ रहे हैं।
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अगर संसाधन मिले होते तो वर्ष 2009 में वेंकी रामाकृष्णन भारत के नाम पर नोबेल अवार्ड जीतते, लेकिन उन्होंने यह अवार्ड इंग्लैंड के लिए हासिल किया।’
यह कहना है हाल ही में केमिस्ट्री में नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. रॉबर्ट ह्यूबर का। वे सोमवार को सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) में आयोजित एक सेमिनार में बोल रहे थे।
क्रिस्टलोग्राफी के विशेषज्ञ जर्मनी के प्रो. रॉबर्ट का कहना था कि केमिस्ट्री के क्षेत्र में वेंकी रामाकृष्णन को 2009 में नोबेल पुरस्कार मिला।
उनकी शुरुआती पढ़ाई भारत में ही हुई थी, मगर संसाधनों की कमी और अवसर नहीं मिल पाने के चलते उन्हें भारत छोड़ना पड़ा।
अगर संसाधन मिले होते तो यह नोबेल पुरस्कार भारत की झोली में होता। उन्होंने कहा, विकासशील देश विज्ञान के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं।
खासकर भारत के युवा वैज्ञानिक बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। मेरे साथ लखनऊ के ही युवा वैज्ञानिक डॉ. रविशंकर काम कर रहे हैं।
क्रिस्टलोग्राफी पर उन्होंने उम्दा काम किया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विकसित देश के वैज्ञानिक हो तो नोबेल मिलेगा, यह धारणा गलत है।
उन्हें अवार्ड मिले लंबा समय हो चुका है यह बात सही है, लेकिन ये युवा वैज्ञानिक जल्दी ही भारत को नोबेल पुरस्कार दिलाएंगे।
मुझे उन पर पूरा भरोसा है। इसमें थोड़ा वक्त जरूर लगेगा, लेकिन भारत जल्दी ही दूसरा सीवी रमन पैदा करेगा।
नोबेल विजेताओं से मिलेगी लखनऊ की पूजा
सीडीआरआई में रिसर्च स्कॉलर पूजा जडिया जर्मनी में आयोजित 64वीं लिंदाओ नोबेल लॉरेट मीट के लिए चुनी गई हैं।
पूजा ने भारत से चुने गए 25 युवा वैज्ञानिकों में जगह बनाई है। 29 जून से चार जुलाई तक चलने वाली इस मीटिंग में करीब 30-40 नोबेल पुरस्कार विजेता शामिल होंगे।
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इस दौरान युवा वैज्ञानिकों को उनके अनुभव से रूबरू होने का मौका मिलेगा। पूजा वर्तमान में सीडीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. आमिर नजीर की लैब में अपनी पढ़ाई कर रही हैं।
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