फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   India alliance on verge of breaking in Uttar Pradesh

इंडिया गठबंधन टूट के कगार पर: कांग्रेस की मांग वाली सीटों पर SP ने उतारे प्रत्याशी ...यहां 'एकला चलो' का संदेश

Wed, 21 Feb 2024 08:15 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश दुबे Updated Wed, 21 Feb 2024 08:15 AM IST
सार

अखिलेश ने सोमवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि सीटों का बंटवारा फाइनल होने से पहले वे इस यात्रा में शामिल नहीं होंगे। इसके साथ ही उन 17 सीटों की सूची भी कांग्रेस नेतृत्व को भेज दी गई थी, जो सीटें बकौल सपा, कांग्रेस ने मांगी थीं।

विज्ञापन
India alliance on verge of breaking in Uttar Pradesh
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व कांग्रेस नेता राहुल गांधी - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन टूट के कगार पर पहुंच गया है। सपा ने कांग्रेस को जो 17 सीटें प्रस्तावित की थीं, उनमें से वाराणसी में अपना प्रत्याशी उतार दिया है, जबकि, अमरोहा व बागपत में प्रभारी देकर 'एकला चलो' के अपने इरादे साफ जाहिर कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के बीच सोमवार देर रात भी सीटों पर वार्ता हुई। कांग्रेस मुरादाबाद, बिजनौर और बलिया की सीट चाहती थी, लेकिन समाजवादी ये सीटें देने को तैयार नहीं है।

विज्ञापन

सपा अध्यक्ष अखिलेश ने राहुल गांधी की न्याय यात्रा का निमंत्रण तो स्वीकार किया, पर अपनी घोषणा के अनुसार वह रायबरेली या अमेठी में इस यात्रा में शामिल नहीं हुए। अखिलेश ने सोमवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि सीटों का बंटवारा फाइनल होने से पहले वे इस यात्रा में शामिल नहीं होंगे। इसके साथ ही उन 17 सीटों की सूची भी कांग्रेस नेतृत्व को भेज दी गई थी, जो सीटें बकौल सपा, कांग्रेस ने मांगी थीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

सूत्रों का कहना है कि सपा नेतृत्व ने मंगलवार को बातचीत में शामिल दिल्ली के कांग्रेस नेताओं को यह संदेश भिजवा दिया कि सपा को जो सीटें देनी थीं, दे दी गई हैं। अब फैसला कांग्रेस का है कि गठबंधन करना है या नहीं। बताते हैं कि मंगलवार की शाम तक कांग्रेस की ओर से इसके सिवाय कोई जवाब नहीं आया कि हमारी बातचीत (सपा व कांग्रेस) जारी है। इसके बाद सपा ने अपनी पांच प्रत्याशियों की तीसरी सूची जारी की, जिसमें वाराणसी भी शामिल है। आम तौर पर सपा जिन नेताओं को लोकसभा क्षेत्र प्रभारी नामित करती है, उन्हें ही बाद में अपना प्रत्याशी घोषित कर देती है। अमरोहा व बागपत सीटें भी कांग्रेस के लिए प्रस्तावित की गई थीं, लेकिन सपा ने बागपत में अपने पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी को प्रभारी नामित कर दिया। 

विज्ञापन

बदायूं से धर्मेंद्र की जगह शिवपाल
सपा ने अपने पांच लोकसभा प्रत्याशियों की तीसरी सूची जारी कर दी है। बदायूं से पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की जगह पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव को चुनाव मैदान में उतारा गया है। कांग्रेस को दी वाराणसी सीट पर भी सपा ने पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल को टिकट दे दिया है। 

पूर्व सांसद सलीम शेरवानी के राष्ट्रीय महासचिव के पद से इस्तीफा देने के बाद सपा ने बदायूं में अपनी रणनीति को बदलते हुए अनुभवी नेता शिवपाल सिंह यादव को उम्मीदवार बनाया है। 

पहले यहां से धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी घोषित किया गया था। कैराना से पूर्व सांसद मुनव्वर हसन की बेटी इकरा हसन, बरेली से पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन और हमीरपुर से अजेंद्र सिंह राजपूत को प्रत्याशी बनाया गया है। इस तरह से सपा के अब तक 31 प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं। 

धर्मेंद्र को दो सीटों का बनाया प्रभारी
सपा ने अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को कन्नौज और आजगमढ़, दोनों ही लोकसभा सीटों का प्रभारी बनाया गया है। सपा सूत्रों के मुताबिक, इनमें से किसी एक सीट से अखिलेश यादव खुद चुनाव लड़ेंगे। दूसरी पर धर्मेंद्र यादव को उतारा जाएगा। 

मौर्य ने सपा और विधान परिषद की सदस्यता से दिया इस्तीफा
पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को सपा और विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वे 22 फरवरी को दिल्ली में नई पार्टी का गठन करेंगे। उन्होंने इंडिया गठबंधन में ही बने रहने का एलान किया है। इस्तीफे के बाद प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने सपा के साथ-साथ भाजपा सरकार की नीतियों पर भी जमकर हमला बोला। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि 13 फरवरी को त्यागपत्र देने के बाद सपा की ओर से वार्ता की कोई पहल नहीं की गई। इसलिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे रहे हैं।

सपा को बर्बाद करने के लिए रामगोपाल ही काफी
मौर्य ने कहा कि सपा को बर्बाद करने के लिए उसके प्रमुख महासचिव रामगोपाल ही काफी हैं। राजनीति में उन्हें शिवपाल से सीख लेनी चाहिए। पल्लवी पटेल के मामले को शिवपाल ने अंदरूनी मामला बताया था, जबकि रामगोपाल ने कहा, राज्यसभा प्रत्याशियों को वोट न देने से पल्लवी की सदस्यता चली जाएगी। इससे दोनों (शिवपाल व रामगोपाल) की बातचीत के तरीके में अंतर समझा जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed