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Lucknow News: पहली जनगणना में हाथ से बनी मुहर और डाक टिकट थे प्रमाणित दस्तावेज
Wed, 25 Feb 2026 02:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Wed, 25 Feb 2026 02:39 AM IST
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राजकीय अभिलेखागार के शहीद स्मृति भवन में लगी प्रदर्शनी। -संवाद
लखनऊ। महानगर स्थित यूपी राजकीय अभिलेखागार के शहीद स्मृति भवन में मंगलवार से ‘गिनती में आओ: भारत में जनगणना का डाक इतिहास’ विषय पर अभिलेख प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। 24 से 28 फरवरी तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में भारत की जनगणना और भारतीय डाक व्यवस्था के ऐतिहासिक संबंधों को दस्तावेजों और दुर्लभ संग्रहों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
प्रदर्शनी में बताया गया है कि आजादी के बाद वर्ष 1951 में आयोजित पहली जनगणना सीमित संसाधनों के बीच संपन्न हुई थी। उस समय हाथ से बनाई गई मुहरें और डाक टिकट ही प्रमाणित दस्तावेज माने जाते थे। जनगणना प्रक्रिया में पत्राचार और डाक टिकटों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जो प्रशासनिक विश्वसनीयता का प्रमुख आधार थे।
जनगणना उपनिदेशक प्रो. विकास कुमार ने प्रदर्शनी के माध्यम से भारत में जनगणना के डाक इतिहास की विस्तृत जानकारी दी। यह प्रदर्शनी वर्ष 1951 से 2011 तक भारतीय डाक विभाग के योगदान का पुनरावलोकन प्रस्तुत करती है। डाक टिकटों, विरूपण चिह्नों और ऐतिहासिक पत्रों के संग्रह के जरिए जनगणना के विकासक्रम को नए दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास किया गया है।
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जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण उत्तर प्रदेश की निदेशक शीतल वर्मा ने बताया कि देश में पहली बार जनगणना डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी, जिसकी शुरुआत वर्ष 2027 में प्रस्तावित है। इसके लिए जून 2025 में इंटेंट जारी किया जा चुका है। जनगणना की प्रश्नावली इंटर-मिनिस्टीरियल पार्लियामेंट्री कमेटी की ओर से तैयार की जाती है, ताकि पूरे देश में समान रूप से आंकड़ों का संकलन सुनिश्चित किया जा सके। भारत की जनगणना दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभ्यास है, जिसमें देशभर में लगभग 30 लाख प्रगणक और उत्तर प्रदेश में करीब छह लाख प्रगणक भाग लेंगे।
कार्यक्रम के दौरान कथाकार वीरेंद्र सारंग ने अपने उपन्यास के संदर्भ में जनगणना से जुड़े मानवीय पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपी कहानियों, संघर्षों और संवेदनाओं को सामने लाने की प्रक्रिया भी है। संस्थान के निदेशक अमित अग्निहोत्री ने बताया कि कार्यक्रम के दूसरे सत्र में आयोजित कार्यशाला में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया।
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प्रदर्शनी में बताया गया है कि आजादी के बाद वर्ष 1951 में आयोजित पहली जनगणना सीमित संसाधनों के बीच संपन्न हुई थी। उस समय हाथ से बनाई गई मुहरें और डाक टिकट ही प्रमाणित दस्तावेज माने जाते थे। जनगणना प्रक्रिया में पत्राचार और डाक टिकटों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जो प्रशासनिक विश्वसनीयता का प्रमुख आधार थे।
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जनगणना उपनिदेशक प्रो. विकास कुमार ने प्रदर्शनी के माध्यम से भारत में जनगणना के डाक इतिहास की विस्तृत जानकारी दी। यह प्रदर्शनी वर्ष 1951 से 2011 तक भारतीय डाक विभाग के योगदान का पुनरावलोकन प्रस्तुत करती है। डाक टिकटों, विरूपण चिह्नों और ऐतिहासिक पत्रों के संग्रह के जरिए जनगणना के विकासक्रम को नए दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास किया गया है।
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जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण उत्तर प्रदेश की निदेशक शीतल वर्मा ने बताया कि देश में पहली बार जनगणना डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी, जिसकी शुरुआत वर्ष 2027 में प्रस्तावित है। इसके लिए जून 2025 में इंटेंट जारी किया जा चुका है। जनगणना की प्रश्नावली इंटर-मिनिस्टीरियल पार्लियामेंट्री कमेटी की ओर से तैयार की जाती है, ताकि पूरे देश में समान रूप से आंकड़ों का संकलन सुनिश्चित किया जा सके। भारत की जनगणना दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभ्यास है, जिसमें देशभर में लगभग 30 लाख प्रगणक और उत्तर प्रदेश में करीब छह लाख प्रगणक भाग लेंगे।
कार्यक्रम के दौरान कथाकार वीरेंद्र सारंग ने अपने उपन्यास के संदर्भ में जनगणना से जुड़े मानवीय पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपी कहानियों, संघर्षों और संवेदनाओं को सामने लाने की प्रक्रिया भी है। संस्थान के निदेशक अमित अग्निहोत्री ने बताया कि कार्यक्रम के दूसरे सत्र में आयोजित कार्यशाला में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया।

राजकीय अभिलेखागार के शहीद स्मृति भवन में लगी प्रदर्शनी। -संवाद

राजकीय अभिलेखागार के शहीद स्मृति भवन में लगी प्रदर्शनी। -संवाद

राजकीय अभिलेखागार के शहीद स्मृति भवन में लगी प्रदर्शनी। -संवाद

राजकीय अभिलेखागार के शहीद स्मृति भवन में लगी प्रदर्शनी। -संवाद

राजकीय अभिलेखागार के शहीद स्मृति भवन में लगी प्रदर्शनी। -संवाद

राजकीय अभिलेखागार के शहीद स्मृति भवन में लगी प्रदर्शनी। -संवाद

राजकीय अभिलेखागार के शहीद स्मृति भवन में लगी प्रदर्शनी। -संवाद

राजकीय अभिलेखागार के शहीद स्मृति भवन में लगी प्रदर्शनी। -संवाद

राजकीय अभिलेखागार के शहीद स्मृति भवन में लगी प्रदर्शनी। -संवाद