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खराब आंखें बन रही हैं मौत का कारण, पढ़ें ये काम की जानकारी

Thu, 14 Jul 2016 11:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनू
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनू Updated Thu, 14 Jul 2016 11:13 AM IST
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improving lives by improving sight conference

विश्व में करीब ढाई अरब लोग दृष्टि दोष की समस्या से पीड़ित हैं। इसमें 55 करोड़ लोग भारत में हैं। स्कूल जाने वाले 41 फीसदी बच्चों की पढ़ाई आंखें कमजोर होने से प्रभावित हो रही है। दृष्टि दोष से पीड़ित लोगों का समय पर सही इलाज हो और उन्हें चश्मा दिया जाए तो आंखों की रोशनी को और खराब होने से बचाया जा सकता है। 

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आंखें सुरक्षित रहेंगी तो समाज के साथ देश-प्रदेश और व्यक्ति का विकास संभव है। आंखों की रोशनी खराब होने से देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो रहा है। आंखों की रोशनी व्यक्ति के साथ देश के विकास से जुड़ी है। इसके  खराब होने से आदमी काम करने में असमर्थ रहता है। इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ने के साथ ही देश के विकास पर पड़ रहा है। 
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ये निष्कर्ष अमेरिका के विजन इम्पैक्ट इंस्टीट्यूट और एरिसॉल की ओर से ‘अनकरेक्टेड रिफ्रैक्टिव एरर’ विषय पर किए गए शोध में सामने आए हैं। बुधवार को ‘इंप्रूविंग लाइव्स बाई इंप्रूविंग साइट विषय पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी विजन इम्पैक्ट इंस्टीट्यूट की एडवोकेसी इन इंडिया की प्रिसिंपल कंसल्टेंट शैलजा पठानिया ने दी। 
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उन्होंने बताया कि देश में स्कूल जाने वाले 41 फीसदी स्कूली बच्चों की आंखें कमजोर हैं। किसी को दूर तो किसी की पास की रोशनी कमजोर है। आंखें कमजोर रहने से सिरदर्द, पढ़ाई में मन न लगना, पढ़ने व लिखने में दिक्कत जैसी समस्याएं होती हैं। 

इससे बच्चों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। अभिभावक उनकी इस परेशानी को समय पर समझ लें और आई स्पेशलिस्ट की सलाह लें तो उनका जीवन बिगड़ने से बचाया जा सकता है। आंखों में दिक्कत का इलाज केवल ऑपरेशन नहीं है। 

चश्मा है कई परेशान‌ियों का ‌इलाज

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डेमो प‌िक
समय पर जांच के बाद चश्मा लग जाए तो भविष्य में होने वाली कई तरह की परेशानियों से बचा जा सकता है। आंख की रोशनी समय रहते सुधार ली जाए तो व्यक्ति के कार्य करने की क्षमता बढ़ जाती है। 

भारत में 42 फीसदी लोग अनकरेक्टेड रिफ्रैक्टिव एरर की समस्या से जूझ रहे हैं। सभी की समस्या दूर हो जाए तो जीडीपी में 34 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है जबकि व्यक्ति की आय 20 फीसदी तक बढ़ सकती है।

आंखों की रोशनी खराब होने से जानें भी जाती हैं। रिसर्च में पता चला है कि भारत में 42 फीसदी ड्राइवरों को आंख संबंधी परेशानी है। 59 फीसदी हादसे दृष्टि दोष के कारण होते हैं। 

इस तरह के हादसे में प्रतिवर्ष 138 हजार लोग अपनी जान गंवाते हैं। 45 फीसदी वरिष्ठ नागरिक आंख की रोशनी कमजोर होने से सात से आठ बार किसी हादसे का शिकार होते हैं। 
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