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यूपी कैबिनेट के आज के महत्वपूर्ण फैसले : रेलवे की जमीन पर होगा निर्माण, आवास विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने दी मंजूरी

Mon, 25 Jan 2021 10:50 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 25 Jan 2021 10:50 PM IST
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Important decisions of UP cabinet today: Construction will be done on railway land, Cabinet approves proposal of Housing Department
जेवर एयरपोर्ट
रेलवे की जमीनों पर किसी तरह के निर्माण के लिए भू-उपयोग बदलवाने की बाध्यता को प्रदेश सरकार ने समाप्त कर दिया है। हालांकि  निर्माण कार्य महायोजना के मुताबिक ही कराना होगा और निर्माणकर्ता को वाह्य विकास शुल्क देना होगा। आवास एवं शहरी नियोजन के प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी दे दी गई है। मौजूदा समय में ‘उप्र नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973’ में प्रावधान के मुताबिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत रेलवे की जमीन पर आवासीय या पीपीपी मॉडल से व्यावसायिक निर्माण के लिए भू-उपयोग को बदलवाना अनिवार्य है।
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प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कैंट रेलवे स्टेशन की जमीन समेत अन्य स्थानों पर निर्माण कराने में यह प्रावधान आड़े आ रहा था। इसके लिए आवास विभाग को एक प्रस्ताव भेजा गया, जिस पर विभाग ने अधिनियम में भू-उपयोग परिवर्तन की बाध्यता से छूट दिए जाने के प्रावधान को संशोधित करने का प्रस्ताव कैबिनेट में रखा था। अब कैबिनेट की मंजूरी से रेलवे द्वारा अपने जमीन पर व्यावसायिक निर्माण कराने पर उस क्षेत्र में वाह्य अवस्थापना सुविधाओं व यातायात का दबाव बढ़ेगा। इसलिए नियमानुसार वाह्य विकास शुल्क देना होगा।
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जेवर एयरपोर्ट पर रनवे की संख्या दो से बढ़ाकर पांच करने की मंजूरी

नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, जेवर पर अब दो की जगह पांच रनवे बनाए जाएंगे। योगी कैबिनेट की सोमवार को आयोजित बैठक में रनवे की संख्या दो से बढ़ाकर पांच करने और एयरपोर्ट विस्तार के लिए 2053 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की की मंजूरी दी गई।

नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट जेवर में रनवे की संख्या दो से छह करने का प्रस्ताव दिया गया था। रनवे की संख्या बढ़ाने के लिए  परामर्शदाता कंपनी प्राइसवाटर हाउस कूपर्स से सर्वे कराया गया।  कंपनी ने रनवे की संख्या पांच तक करने की रिपोर्ट प्रस्तुत की है। योगी कैबिनेट ने परामर्शदाता कंपनी की रिपोर्ट का अनुमोदन करते हुए एयरपोर्ट पर पांच रवने तक बनाने की मंजूरी दी।

साथ ही एयरपोर्ट विस्तार के लिए पहले चरण में 1365 हेक्टेयर भूमि और दूसरे चरण में आवश्कतानुसार 2053 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की मंजूरी फंड उपलब्ध होने की शर्त पर दी है। कैबिनेट ने एयरपोर्ट विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण, भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले लोगों के पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए भी मंजूरी दी है। परियोजना के लिए समय-समय पर आवश्यक निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अधिकृत किया है।

नागरिक उड्डयन विभाग के निदेशक सुरेंद्र कुमार ने बताया कि जेवर एयरपोर्ट पर फिलहाल दो से बढ़ाकर तीन रनवे बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि तीसरा रनवे विशेष रूप से कार्गो विमानों के लिए होगा। तीसरे रनवे के लिए 1365 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।

दो वर्ष की सजा तो सोसाइटी में सदस्यता के अयोग्य

प्रदेश में सोसाइटी के किसी सदस्य को सक्षम न्यायालय ने दो वर्ष या इससे अधिक की सजा के मामले में दोष सिद्ध करार दिया तो वह पद धारण करने के अयोग्य हो जाएगा। सोसाइटी की अचल संपत्ति भी अब बिना सक्षम न्यायालय की पूर्व अनुमति लिए हस्तांतरित नहीं की जा सकेगी। बिना अनुमति लिए सोसाइटी की अचल का हस्तांतरण गैर कानूनी होगी।

प्रदेश कैबिनेट ने सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम में संशोधन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी देकर कई महत्वपूर्ण बदलाव का रास्ता साफ कर दिया है। इन बदलावों से सोसाइटी कामकाज में पारदर्शिता आएगी और लोगों की मुश्किल आसान होगी। इसके अलावा सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1860 की धारा-3(2), धारा-4, धारा-25(1) में उप रजिस्ट्रार/ सहायक रजिस्ट्रार/ उप जिलाधिकारी के निर्णय के विरुद्ध अपील के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है। इससे आम लोगों को यहां से पारित आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील करनी पड़ती है। शासन ने जन सामान्य को राहत देने का हवाला  देते हुए उप रजिस्ट्रार/ सहायक रजिस्ट्रार/ उप जिलाधिकारी के निर्णय के विरुद्ध मंडलायुक्त न्यायालय में अपील की व्यवस्था कर दी है।
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गारंटी मोचन निधि के गठन को मंजूरी

प्रदेश सरकार ने 12 वें वित्त आयोग की संस्तुति व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट पर अमल करते हुए गारंटी मोचन निधि बनाने का फैसला किया है। निधि का क्रियान्वयन 2021-22 से होगा। प्रदेश कैबिनेट ने निधि स्थापित करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस निधि का रखरखाव भारतीय रिजर्व बैंक करेगा। निधि में संचित धनराशि का उपयोग केवल दी गई गारंटी के सापेक्ष देयताओं के भुगतान के लिए किया जाएगा। इसके पहले 17 राज्य इस निधि का सृजन कर चुके हैं।

कानपुर का एलटीडीसी भवन ध्वस्त होगा, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क बनाया जाएगा

पनकी कानपुर स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स परीक्षण एवं विकास केंद्र (एलटीडीसी) के पुराने भवन को ध्वस्त कर उसकी जगह सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क स्थापित किया जाएगा। योगी कैबिनेट ने सोमवार को एलटीडीसी के पुराने भवन को ध्वस्त करने और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क स्थापित करने की मंजूरी दी।

प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि एलटीडीसी का भवन 1974-75 में बनाया गया था। भवन में पिछले 20 वर्षों  से कामकाज बंद है। प्रदेश सरकार ने एलटीडीसी भवन के स्थान पर सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क स्थापित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि पार्क में कानपुर के नए युवा उद्यमी अपने उद्यम स्थापित कर सकेंगे। इससे आईटी के क्षेत्र में प्रत्यक्ष एवं प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

विधानमंडल का बजट सत्र 16 से

विधान मंडल का बजट सत्र 16 फरवरी से आहूत करने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने सोमवार को मंजूरी दे दी। यह वर्ष 2021 का पहला सत्र होगा। इसकी शुरुआत दोनों संदनों के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल के अभिभाषण से होगी। विधान मंडल के दोनों सदनों का पिछला सत्र 20 अगस्त से प्रारंभ हुआ था। 22 अगस्त को विधानसभा व विधान परिषद की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई थी।

संवैधानिक प्रावधान है कि दो सत्रों के बीच छह माह का अंतर नहीं होगा। इसलिए 22 फरवरी से पहले सत्र प्रारंभ किया जाना जरूरी था। इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों सदनों का वर्ष 2021 का प्रथम सत्र 16 फरवरी से आहूत करने के प्रस्ताव का कैबिनेट ने अनुमोदन कर दिया था। ऐसी संभावना है कि सरकार 17 फरवरी को बजट पेश कर सकती है।

निवेशकों को ऑनलाइन इसेंटिव भुगतान का फैसला

प्रदेश सरकार ने औद्योगिक नीति-2003 व 2012 के अंतर्गत निवेशकों के वित्तीय लाभ की मंजूरी ऑनलाइन देने का फैसला किया है। प्रदेश कैबिनेट ने इसके लिए नियमावली में संशोधन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पूर्व में औद्योगिक प्रोत्साहन नीति-2003 व अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति-2012 के अंतर्गत शासन द्वारा जारी वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष आवश्यक धनराशि आयुक्त एवं निदेशक कानपुर, संयुक्त/अपर आयुक्त उद्योग लखनऊ मंडल द्वारा आहरित कर पिकप/यूपीएफसी को उपलब्ध कराई जाती है। इसके बाद पिकप व यूपीएफसी द्वारा पात्र इकाइयों को ब्याजमुक्त ऋण का वितरण किया जाता है। पूर्व से क्रियान्वित हो रही इन नीतियों के अंतर्गत पात्र लाभार्थी इकाइयों को ब्याजमुक्त ऋण वितरण की ऑनलाइन कार्यवाही होगी। इससे इसेंटिव वितरण में पारदर्शिता आएगी।

सैनिक स्कूल के आडिटोरियम की लागत 5.64 करोड़ बढ़ी

कैप्टन मनोज पांडेय सैनिक स्कूल लखनऊ के निर्माणाधीन आडिटोरियम की क्षमता एक हजार दर्शकों की करने से आडिटोरियम की निर्माण लागत 5 करोड़ 64 लाख 63 हजार रुपये बढ़ गई है। योगी कैबिनेट ने सोमवार को आडिटोरियम की बढ़ी हुई लागत का अनुमोदन किया।

प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि  मनोज पांडेय सैनिक स्कूल के आडिटोरियम के निर्माण के लिए 12 करोड़ 96 लाख 59 हजार रुपये की मंजूरी पहले जारी की गई थी। लेकिन बाद में आडिटोरियम की क्षमता एक हजार दर्शकों की करने का निर्णय होने, विभिन्न मदों की मात्रा और दरों में वृद्धि के कारण आडिटोरियम का निर्माण पहले स्वीकृत राशि में होना संभव नहीं था। आडिटोरियम के निर्माण में 18 करोड़ 61 लाख 22 हजार रुपये खर्च का आंकलन किया गया है। इसमें 5 करोड़ 64 लाख 63 हजार रुपये की वृद्धि हुई है। योगी कैबिनेट ने आडिटोरियम में फाल्स सीलिंग के लिए 29.48 लाख, वॉल पैनलिंग के लिए एक करोड़ 30 लाख 46 हजार और वूडेन फ्लोरिंग के लिए 16 लाख 44 हजार रुपये की भी मंजूरी दी है।

अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विवि अब आठ मंजिल का बनेगा

अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के भवन निर्माण की परियोजना की पुनरीक्षित लागत 206.96 करोड़ रुपये को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। परियोजना लागत में बदलाव एकेडेमिक- प्रशासनिक ब्लॉक भवन में बेसमेंट, भूतल और तीन तल की जगह, अब बेसमेंट, भूतल और आठ तल के निर्माण के प्रस्ताव के कारण किया गया है।

इसके अलावा विश्वविद्यालय के आडिटोरियम की स्वीकृत क्षमता 1500 सीट से बढ़ाकर 2000 किए जाने, कुलपति आवास टाइप-7 और टाइप-05 के 08 आवासों को पुनरीक्षित परियोजना में शामिल किया गया है। इसी के चलते मूल लागत में वृद्धि हुई है। नई परियोजना में इटैलियन मार्बल, वुडेन फर्श, परफोरेटेड, जिप्सम बोड फाल्स सीलिंग, स्पाइडर ग्लास सिस्टम, विनियर पैनेलिंग, एकोस्टिक फैब्रिक पैनेलिंग, कारपेट फ्लोरिंग, आर्मस्ट्रॉग फाल्स सीलिंग, पॉलिश्ड चैनल फ्रेम, लैमिनेटेड पैनेलिंग, लैकर्ड ग्लास, फैब्रिक पैनेलिंग, एचवीएसी सिस्टम, बूम बैरियर व सोलर फोटो वोल्टिक सिस्टम उच्च विशिष्ट श्रेणी के शामिल किए गए हैं।

250 मेगा वॉट के तीन डाटा सेंटर पार्क और 10 डाटा सेंटर इकाइयां स्थापित होंगी

प्रदेश में 250 मेगावॉट क्षमता के तीन डाटा सेंटर पार्क और 10 डाटा सेंटर इकाइयां स्थापित की जाएंगी। डाटा सेंटर पार्क और इकाइयों में  20 हजार करोड़ का निवेश आएगा, इससे 4 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और 10 से 20 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा। योगी कैबिनेट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2021 को मंजूरी दी है।

प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि वर्तमान में देश का अधिकांश डाटा देश के बाहर संरक्षित किया जा रहा है। डाटा सेंटर पार्क और डाटा सेंटर इकाइयों की स्थापना के लिए प्रदेश की डाटा सेंटर नीति नहीं थी। प्रदेश सरकार ने प्रदेश में डाटा सेंटर नीति लागू करने का निर्णय किया है।

उन्होंने बताया कि डाटा नीति लागू होने के बाद प्रदेश में 20 हजार करोड़ के निवेश से 250 मेगावॉट क्षमता के तीन डाटा सेंटर पार्क और 10 डाटा सेंटर इकाइयां स्थापित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि नीति के तहत डाटा सेंटर पार्क और डाटा सेंटर इकाइयों को निवेश पर नियमानुसार सब्सिडी, बैंकों से लिए कर्ज के ब्याज पर अनुदान , भूमि खरीद पर स्टांप ड्यूटी में छूट और ऊर्जा से संबंधित वित्तीय प्रोत्साहन और गैर वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे। बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्र में अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे। प्रस्तावित नीति के तहत मिलने वाली छूट नीति की अधिसूचना जारी होने की तिथि से पांच वर्ष या प्रदेश सरकार की ओर से कोई नीति लाने तक (दोनों में से जो पहले हो) दी जाएगी।

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना की छतरी की नीचे आईं तीन नलकूप योजनाएं

प्रदेश में पहले से संचालित उथले, मध्यम व गहरे नलकूपों की योजनाओं को एक करते हुए मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना की छतरी के नीचे ले आया गया है। सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। लाभार्थियों केचयन की प्रक्रिया भी तय कर दी गई है।

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना में उथले नलकूपों के लाभार्थियों का चयन ग्राम पंचायत की खुली बैठक में किया जाएगा। कृषकों का चयन प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में पंजीकृत किसानों को ही होगा। ऐसा न होने पर लाभार्थी किसानों का पंजीकरण पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल पर अपलोड कराना होगा। ऐसे किसान जो उद्यान या कृषि विभाग की संचालित सूक्ष्म सिंचाई पद्धति या प्रधानमंत्री कुसुम योजना का लाभ लेने के लिए कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीयन कराएंगे, उन किसानों को बोरिंग कार्य के लिए वरीयता दी जाएगी।

उथले बोरिंग योजना में 30 मीटर गहराई तक, मध्यम में 31-60 मीटर गहराई तक और गहरी बोरिंग योजना में 61-90 मीटर गहराई तक की बोरिंग का निर्माण किया जाएगा। उथले बोरिंग योजना में सामान्य श्रेणी के किसानों को 5 हजार रुपये, सीमांत के लिए 7 हजार और अनुसूचित जाति के लिए 10 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। साथ ही पंपसेट पर क्रमश: 4500 रुपये, 6000 रुपये और 9000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। 25 प्रतिशत लाभार्थियों को एचडीपीई पाइप पर अधिकतम 3 हजार रुपये अनुदान दिया जाएगा।

इसी तरह से मध्यम गहरी बोरिंग पर 75 हजार रुपये और जल वितरण प्रणाली के लिए 10 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा। इसी तरह से गहरी बोरिंग पर 1.10 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। इन योजनाओं में ऊर्जीकरण के लिए 68 हजार रुपये भी दिए जाएंगे। मध्यम गहरी एवं गहरी बोरिंग योजना में सामग्री का क्रय जेम पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। सभी नलकूपों की अनिवार्य रूप से जियो टैगिंग कराई जाएगी।

ग्रेटर नोएडा में हाईटेक इंडस्ट्रीज को मिलेगा प्रोत्साहन

प्रदेश सरकार ने दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत हाईटेक इंडस्ट्रीज को प्रोत्साहन देने का फैसला किया है। कैबिनेट ने इसके लिए भू-उपयोग व एफएआर (एफएआर) में परिवर्तन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। निर्णय के मुताबिक हाइटेक इंडस्ट्रीज को एक की जगह अब दो एफएआर मंजूर किया जाएगा। इसके अलावा 2.5 एफएआर जरूरत के अनुसार बढ़ाने की अनुमति मिल सकेगी। इससे वहां हाईटेक इंडस्ट्रीज के लिए 300 एकड़ जमीन उपलब्ध हो सकेगी। अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने बताया कि इससे वहां मांग के अनुसार उद्योगों की स्थापना के लिए भूखंड उपलब्ध हो सकेंगे।

निजी भूमि पर दोगुनी रॉयल्टी की दर से मिलेगा खनन पट्टा

प्रदेश में निजी भूमि पर बालू, मौरंग, बजरी, बोल्डर उप खनिज के खनन के लिए दोगुनी रॉयल्टी की दर से भूमि मालिक को खनन पट्टा जारी किया जाएगा। योगी कैबिनेट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश उप खनिज (परिहार) नियमावली-1963 में संशोधन कर उत्तर प्रदेश उप खनिज (परिहार) (53वां संशोधन) नियमावली-2021 को मंजूरी दी है।

हरदोई के बेरिया घाट मेला को मिला राज्य मेला का दर्जा
सरकार ने हरदोई के बेरिया घाट मेला को ‘राज्य मेला’ का दर्जा देने का फैसला किया है। इसके बाद मेले के आयोजन पर खर्च होने वाली धनराशि सरकार वहन करेगी। नगर विकास विभाग के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
मेले के धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के महत्व को देखते हुए सरकार ने यह फैसला किया है। इससे मेला में आने वाले लोगों को जहां बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, वहीं मेला क्षेत्र में अवस्थापना सुविधाओं का भी तेजी से विकास हो सकेगा। इस मेले में हर साल करीब 5 लाख श्रद्धालु आते हैं। अब तक मेले के आयोजन का खर्च होने वाली धनराशि की व्यवस्था डीएम और जिला पंचायत संयुक्त रूप से करते थे। लेकिन मेले को राज्य मेला का दर्जा मिलने के बाद मेले की सभी व्यवस्था के लिए सरकार द्वारा धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। मेला आयोजन से संबंधित सभी प्रबंध अब डीएम के स्तर पर किया जाएगा।

24 नहरों का रखरखाव कर सकेगा उत्तराखंड सिंचाई विभाग

कैबिनेट ने उत्तराखंड राज्य की सीमा में ऊधम सिंह नगर की 20 नहरें और हरिद्वार की चार नहरों के रखरखाव की जिम्मेदारी उत्तराखंड सिंचाई विभाग को देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत कुल 24 नहरों को नहर के शीर्ष से 100 मीटर और नहरों की जितनी लंबाई यूपी में पड़ती है, उसका रखरखाव उप्र. सिंचाई विभाग करेगा। शेष नहर की लंबाई का अनुरक्षण उत्तराखंड सिंचाई विभाग करेगा। उप्र. सिंचाई विभाग की बिना पूर्व लिखित अनुमति के नहरों के स्वरूप और हाइड्रोलॉजी में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा।

बिना लीज रेंट फ्रेट कॉरिडोर के लिए जमीन देगा वन विभाग
डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के निर्माण के दायरे में आ रही गौतमबुद्धनगर की ग्राम गुलिस्तानपुर में वन विभाग की 11.609 हेक्टेयर भूमि के हस्तांतरण में लीज रेंट में छूट देने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। यह प्रस्ताव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने भेजा था।

डैम पुनर्वास सुधार परियोजना को मंजूरी
विश्व बैंक सहायतित डैम पुनर्वास सुधार परियोजना फेज-2 और फेज-3 के तहत बांधों की सुरक्षा से संबंधित परियोजना को कैबिनेट ने अनुमोदन दे दिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य चयनित बांधों और उससे जुड़ी परिसंपत्तियों का पुनर्वास, सुधार एवं आधुनिकीकरण है। परियोजना दो चरणों में लागू होगी। प्रत्येक चरण का कार्यकाल 5 वर्ष होगा। 70 प्रतिशत बैंक ऋण और 30 प्रतिशत राज्यांश होगा। इस योजना के दायरे में यूपी के 39 बांध आएंगे। इनमें बुंदेलखंड क्षेत्र के 11, विंध्य क्षेत्र के 17, देवीपाटन क्षेत्र के 5, रूहेलखंड क्षेत्र के 2 और उत्तराखंड के 4 बांध हैं। इन पर 1249 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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