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केजीएमयू के एचआरएफ स्टोर पर 30% तक सस्ते मिलेंगे इम्प्लांट
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केजीएमयू के एचआरएफ स्टोर पर 30% तक सस्ते मिलेंगे इम्प्लांट
एचआरएफ का टेंडर नोटिस जारी, आठ हजार से अधिक दवाएं और सर्जिकल आइटम भी किए गए सूची में शामिल
अभी तक ये स्टोर पीजीआई के एचआरएफ टेंडर के नियम एवं शर्तों के अनुसार चल रहे थे
केजीएमयू ने हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) के मेडिकल स्टोर में इम्प्लांट उपलब्ध कराने का भी फैसला लिया है। इससे मरीजों को हृदय, नेत्र व हड्डी से जुड़े इम्प्लांट बाजार के मुकाबले 25 से 30 फीसदी तक सस्ते मिल सकेंगे। काफी जद्दोजहद के बाद सोमवार को एचआरएफ का टेंडर नोटिस जारी कर दिया गया। इसमें इम्प्लांट सहित करीब आठ हजार दवाएं व सर्जिकल आइटम शामिल किए गए हैं। इनके मूल्य को लेकर मरीजों का संशय भी खत्म हो जाएगा।
केजीएमयू के विभिन्न विभागों में अभी तक यूनिवर्सिटी सोसायटी के मेडिकल स्टोर चल रहे थे। इसके अलावा परिसर में अमृत और एक निजी मेडिकल स्टोर भी है। करीब सालभर से सोसायटी के मेडिकल स्टोर बंद करके एचआरएफ के मेडिकल स्टोर चलाए जा रहे हैं। अभी तक ये स्टोर संजय गांधी पीजीआई के एचआरएफ टेंडर के नियम एवं शर्तों के अनुसार चल रहे थे। अब केजीएमयू प्रशासन ने अपना टेंडर जारी किया है। खास बात यह है कि इसमें इम्प्लांट को भी शामिल कर लिया गया है। इससे केजीएमयू की एक बड़ी समस्या हल हो जाएगी क्योंकि इम्प्लांट न मिलने के कारण मरीजों को काफी परेशानी होती थी। इसका सर्वाधिक खामियाजा सीएम-पीएम कोष से इलाज कराने वाले, आयुष्मान मरीज, असाध्य व विपन्न मरीजों को भुगतना पड़ता है। इन मरीजों को केजीएमयू की ओर से इम्प्लांट नहीं मिल पाता है।
पहले टरकाया, विवाद बढ़ा तो अपनाया
केजीएमयू की एचआरएफ कमेटी में इंप्लांट को लेकर कई बार विवाद हो चुका है। सूत्रों के अनुसार 15 दिन पहले हुई कमेटी की बैठक में इंप्लांट को एचआरएफ में शामिल करने से इनकार कर दिया गया था। कुछ सदस्य इंप्लांट को एचआरएफ में अनिवार्य करने की दलील दे रहे थे तो ऑर्थोपेडिक्स, कार्डियोलॉजी सहित इंप्लांट से जुड़े विभागों का तर्क था कि इसे एचआरएफ में शामिल नहीं करना चाहिए। क्योंकि इम्प्लांट के विभिन्न हिस्से अलग-अलग कंपनियों के होते हैं। इनकी धातु भी अलग होती है। इस मामले को लेकर कमेटी के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई थी। ऐसे में बैठक बेनतीजा रही। दोबारा हुई बैठक में इसे शामिल करने पर सहमति बनी। सोमवार को जारी टेंडर नोटिस में कुलपति ने इम्प्लांट को शामिल करने का निर्देश दिया।
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गर्म रहता है इंप्लांट का मामला
केजीएमयू में संबंधित विभागों के डॉक्टर मनमाफिक कंपनी के इंप्लांट की मांग करते हैं। ऐसी स्थिति में विवाद की नौबत बनी रहती है। आयुष्मान, सीएम, पीएम फंड से इलाज कराने वाले मरीजों को इंप्लांट नहीं मिल पाता है। सप्ताहभर पहले इस मामले को लेकर जमकर बवाल हुआ था। विभिन्न कंपनियों के वेंडरों ने केजीएमयू को इंप्लाटं देने से इनकार कर दिया था। वेंडरों का तर्क था कि उन्हें एक निजी मेडिकल स्टोर के जरिए भुगतान किया जाता है। मेडिकल स्टोर संचालक उनका करीब 50 से 60 लाख रुपये का भुगतान रोके बैठा है।
मरीजों को होगा फायदा
इंप्लांट की समस्या हल करने के लिए इसे एचआरएफ में शामिल कर लिया गया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद मरीजों को एचआरएफ के स्टोर से इंप्लांट मिल सकेंगे। इससे मरीजों को काफी फायदा होगा।
- डॉ. अजय सिंह, प्रभारी एचआरएफ केजीएमयू
बाहरी लोग नहीं खरीद सकेंगे एचआरएफ की दवाएं
केजीएमयू में एचआरएफ की दवाएं बाहरी लोग नहीं खरीद सकेंगे। इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। एचआरएफ के मेडिकल स्टोर पर दवा लेते वक्त केजीएमयू का पर्चा दिखाना होगा। इस संबंध में सभी मेडिकल स्टोरों पर निर्देश से जुड़े बोर्ड भी लगा दिए गए हैं। एचआरएफ प्रभारी डॉ. अजय सिंह ने बताया कोई यहां से सस्ती दवा खरीद कर बाजार में पहुंचा सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए नई रणनीति बनाई गई है। मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे केजीएमयू के पर्चे पर ही दवाएं दें।
लोहिया की ओपीडी में खुले दो एचआरएफ काउंटर
लखनऊ। लोहिया संस्थान में मरीजों की सहूलियत के लिए ओपीडी में एचआरएफ के दो नए काउंटर खोले गए हैं। इससे मरीजों को काफी राहत मिलेगी। संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र हॉस्पिटल ब्लॉक में इमरजेंसी के पास बना है। उसे वहां से हटाया जाएगा। जन औषधि केंद्र को भी एचआरएफ स्टोर के पास स्थापित किया जाएगा। इससे मरीजों को एक ही स्थान पर आसानी से दवाएं मिल सकेंगी।
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एचआरएफ का टेंडर नोटिस जारी, आठ हजार से अधिक दवाएं और सर्जिकल आइटम भी किए गए सूची में शामिल
अभी तक ये स्टोर पीजीआई के एचआरएफ टेंडर के नियम एवं शर्तों के अनुसार चल रहे थे
केजीएमयू ने हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) के मेडिकल स्टोर में इम्प्लांट उपलब्ध कराने का भी फैसला लिया है। इससे मरीजों को हृदय, नेत्र व हड्डी से जुड़े इम्प्लांट बाजार के मुकाबले 25 से 30 फीसदी तक सस्ते मिल सकेंगे। काफी जद्दोजहद के बाद सोमवार को एचआरएफ का टेंडर नोटिस जारी कर दिया गया। इसमें इम्प्लांट सहित करीब आठ हजार दवाएं व सर्जिकल आइटम शामिल किए गए हैं। इनके मूल्य को लेकर मरीजों का संशय भी खत्म हो जाएगा।
केजीएमयू के विभिन्न विभागों में अभी तक यूनिवर्सिटी सोसायटी के मेडिकल स्टोर चल रहे थे। इसके अलावा परिसर में अमृत और एक निजी मेडिकल स्टोर भी है। करीब सालभर से सोसायटी के मेडिकल स्टोर बंद करके एचआरएफ के मेडिकल स्टोर चलाए जा रहे हैं। अभी तक ये स्टोर संजय गांधी पीजीआई के एचआरएफ टेंडर के नियम एवं शर्तों के अनुसार चल रहे थे। अब केजीएमयू प्रशासन ने अपना टेंडर जारी किया है। खास बात यह है कि इसमें इम्प्लांट को भी शामिल कर लिया गया है। इससे केजीएमयू की एक बड़ी समस्या हल हो जाएगी क्योंकि इम्प्लांट न मिलने के कारण मरीजों को काफी परेशानी होती थी। इसका सर्वाधिक खामियाजा सीएम-पीएम कोष से इलाज कराने वाले, आयुष्मान मरीज, असाध्य व विपन्न मरीजों को भुगतना पड़ता है। इन मरीजों को केजीएमयू की ओर से इम्प्लांट नहीं मिल पाता है।
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पहले टरकाया, विवाद बढ़ा तो अपनाया
केजीएमयू की एचआरएफ कमेटी में इंप्लांट को लेकर कई बार विवाद हो चुका है। सूत्रों के अनुसार 15 दिन पहले हुई कमेटी की बैठक में इंप्लांट को एचआरएफ में शामिल करने से इनकार कर दिया गया था। कुछ सदस्य इंप्लांट को एचआरएफ में अनिवार्य करने की दलील दे रहे थे तो ऑर्थोपेडिक्स, कार्डियोलॉजी सहित इंप्लांट से जुड़े विभागों का तर्क था कि इसे एचआरएफ में शामिल नहीं करना चाहिए। क्योंकि इम्प्लांट के विभिन्न हिस्से अलग-अलग कंपनियों के होते हैं। इनकी धातु भी अलग होती है। इस मामले को लेकर कमेटी के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई थी। ऐसे में बैठक बेनतीजा रही। दोबारा हुई बैठक में इसे शामिल करने पर सहमति बनी। सोमवार को जारी टेंडर नोटिस में कुलपति ने इम्प्लांट को शामिल करने का निर्देश दिया।
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गर्म रहता है इंप्लांट का मामला
केजीएमयू में संबंधित विभागों के डॉक्टर मनमाफिक कंपनी के इंप्लांट की मांग करते हैं। ऐसी स्थिति में विवाद की नौबत बनी रहती है। आयुष्मान, सीएम, पीएम फंड से इलाज कराने वाले मरीजों को इंप्लांट नहीं मिल पाता है। सप्ताहभर पहले इस मामले को लेकर जमकर बवाल हुआ था। विभिन्न कंपनियों के वेंडरों ने केजीएमयू को इंप्लाटं देने से इनकार कर दिया था। वेंडरों का तर्क था कि उन्हें एक निजी मेडिकल स्टोर के जरिए भुगतान किया जाता है। मेडिकल स्टोर संचालक उनका करीब 50 से 60 लाख रुपये का भुगतान रोके बैठा है।
मरीजों को होगा फायदा
इंप्लांट की समस्या हल करने के लिए इसे एचआरएफ में शामिल कर लिया गया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद मरीजों को एचआरएफ के स्टोर से इंप्लांट मिल सकेंगे। इससे मरीजों को काफी फायदा होगा।
- डॉ. अजय सिंह, प्रभारी एचआरएफ केजीएमयू
बाहरी लोग नहीं खरीद सकेंगे एचआरएफ की दवाएं
केजीएमयू में एचआरएफ की दवाएं बाहरी लोग नहीं खरीद सकेंगे। इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। एचआरएफ के मेडिकल स्टोर पर दवा लेते वक्त केजीएमयू का पर्चा दिखाना होगा। इस संबंध में सभी मेडिकल स्टोरों पर निर्देश से जुड़े बोर्ड भी लगा दिए गए हैं। एचआरएफ प्रभारी डॉ. अजय सिंह ने बताया कोई यहां से सस्ती दवा खरीद कर बाजार में पहुंचा सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए नई रणनीति बनाई गई है। मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे केजीएमयू के पर्चे पर ही दवाएं दें।
लोहिया की ओपीडी में खुले दो एचआरएफ काउंटर
लखनऊ। लोहिया संस्थान में मरीजों की सहूलियत के लिए ओपीडी में एचआरएफ के दो नए काउंटर खोले गए हैं। इससे मरीजों को काफी राहत मिलेगी। संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र हॉस्पिटल ब्लॉक में इमरजेंसी के पास बना है। उसे वहां से हटाया जाएगा। जन औषधि केंद्र को भी एचआरएफ स्टोर के पास स्थापित किया जाएगा। इससे मरीजों को एक ही स्थान पर आसानी से दवाएं मिल सकेंगी।