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कैंसर के इलाज में टेक्नोलॉजिस्ट की भूमिका अहम
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इमेज गाइडेड रेडियोथेरेपी से कैंसर का इलाज आसान
कैंसर के इलाज में टेक्नोलॉजिस्ट की भूमिका अहम
कैंसर के मरीजों के लिए अब इमेज गाइडेड रेडियोथेरेपी आ गई है। इससे कैंसर सेल की सटीक जानकारी मिल जाती है और उसे नष्ट करने में सहूलियत होती है। यह कहना है एसजीपीजीआई के रेडियोथेरेपी विभाग के प्रोफेसर नीरज रस्तोगी का। वह संस्थान में रविवार को रोल ऑफ टेक्नोलॉजिस्ट टूवर्ड क्वालिटी एश्योर्ड रेडियोथिरैपी विषय पर कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
प्रो. नीरज रस्तोगी ने कहा कि मरीजों की जांच की जिम्मेदारी रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजिस्ट की होती है। उसकी रिपोर्ट के आधार पर इलाज की दिशा तय होती है। डायग्नोसिस में जरा सी चूक पूरे इलाज की दिशा बदल देती है। तमाम विशेषज्ञों ने रेडियोथिरैपी की तमाम बारीकियों की जानकारी दी। यहां देश भर के 125 टेक्नोलॉजिस्टों ने हिस्सा लिया। इस दौरान सरोज कुमार वर्मा, पियूष वर्मा, वीरेंद्र यादव आदि मौजूद थे।
अन्य अंगों पर नहीं पड़ता प्रभाव
इमेज गाइडेड तकनीक से रेडियोथेरेपी देकर कैंसरग्रस्त सेल को नष्ट किया जाता है। इसका आसपास के अंगों पर प्रभाव नहीं पड़ता है। यही वजह है कि इस तकनीक का तेजी से प्रयोग बढ़ा है। लेकिन इसके लिए टेक्नोलॉजिस्ट का प्रशिक्षित होना जरूरी है।
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- प्रो. नीरज रस्तोगी
20 सेकंड के लिए रोकनी पड़ती है सांस
सांस लेते समय गले से लेकर मूत्राशय तक के भीतरी आंगों में गति होती है। ऐसे समय पर रेडिएशन देते वक्त खासतौर से सावधानी बरतने की जरूरत होती है। क्योंकि रेडिएशन उस वक्त ट्यूमर के साथ ही आसपास के इलाके पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि मशीन पर लिटाने के बाद मरीज को 20 सेकंड के लिए सांस रोकने के लिए कहा जाता है। इस तकनीक को रेस्पिरेटरी गाइडेड रेडियोथेरेपी कहते हैं।
- प्रो. मारिया दास
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कैंसर के इलाज में टेक्नोलॉजिस्ट की भूमिका अहम
कैंसर के मरीजों के लिए अब इमेज गाइडेड रेडियोथेरेपी आ गई है। इससे कैंसर सेल की सटीक जानकारी मिल जाती है और उसे नष्ट करने में सहूलियत होती है। यह कहना है एसजीपीजीआई के रेडियोथेरेपी विभाग के प्रोफेसर नीरज रस्तोगी का। वह संस्थान में रविवार को रोल ऑफ टेक्नोलॉजिस्ट टूवर्ड क्वालिटी एश्योर्ड रेडियोथिरैपी विषय पर कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
प्रो. नीरज रस्तोगी ने कहा कि मरीजों की जांच की जिम्मेदारी रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजिस्ट की होती है। उसकी रिपोर्ट के आधार पर इलाज की दिशा तय होती है। डायग्नोसिस में जरा सी चूक पूरे इलाज की दिशा बदल देती है। तमाम विशेषज्ञों ने रेडियोथिरैपी की तमाम बारीकियों की जानकारी दी। यहां देश भर के 125 टेक्नोलॉजिस्टों ने हिस्सा लिया। इस दौरान सरोज कुमार वर्मा, पियूष वर्मा, वीरेंद्र यादव आदि मौजूद थे।
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अन्य अंगों पर नहीं पड़ता प्रभाव
इमेज गाइडेड तकनीक से रेडियोथेरेपी देकर कैंसरग्रस्त सेल को नष्ट किया जाता है। इसका आसपास के अंगों पर प्रभाव नहीं पड़ता है। यही वजह है कि इस तकनीक का तेजी से प्रयोग बढ़ा है। लेकिन इसके लिए टेक्नोलॉजिस्ट का प्रशिक्षित होना जरूरी है।
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- प्रो. नीरज रस्तोगी
20 सेकंड के लिए रोकनी पड़ती है सांस
सांस लेते समय गले से लेकर मूत्राशय तक के भीतरी आंगों में गति होती है। ऐसे समय पर रेडिएशन देते वक्त खासतौर से सावधानी बरतने की जरूरत होती है। क्योंकि रेडिएशन उस वक्त ट्यूमर के साथ ही आसपास के इलाके पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि मशीन पर लिटाने के बाद मरीज को 20 सेकंड के लिए सांस रोकने के लिए कहा जाता है। इस तकनीक को रेस्पिरेटरी गाइडेड रेडियोथेरेपी कहते हैं।
- प्रो. मारिया दास