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‘मुलायम सरकार की बात नहीं मानी तो मुझे जेल में डाल दिया’

Thu, 19 Nov 2015 12:50 PM IST
Updated Thu, 19 Nov 2015 12:50 PM IST
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ifs officer ramlakhan tell his story of struggle

सूबे के पूर्व प्रमुख वन संरक्षक डॉ. राम लखन सिंह 12 साल की कानूनी लड़ाई के बाद शीर्ष अदालत से बेदाग साबित हुए। कानूनी लड़ाई जीतने के बाद 1969 बैच के आईएफएस अधिकारी डॉ. राम लखन सिंह ने ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में बताया कि वर्ष 2003 में तत्कालीन मुलायम सरकार की बात नहीं मानी तो मुझे बेबुनियाद मामलों में फंसाकर जेल तक में डाल दिया गया।

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उन्होंने बताया कि तत्कालीन सरकार ने उनसे कहा कि प्रतापगढ़ के बेंती पक्षी अभ्यारण्य को गैर अधिसूचित करा दें। इसके पीछे तर्क था कि पूर्ववर्ती मायावती सरकार ने सपा के एक कद्दावर नेता रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया की जमीन इस अभ्यारण्य में छीन ली।
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डॉ. सिंह ने बताया कि चूंकि, प्रतापगढ़ के तत्कालीन कलेक्टर की रिपोर्ट में अभ्यारण्य की जमीन सरकारी बताई गई थी, इसलिए उन्होंने ऐसा करने से साफ इन्कार कर दिया। इसके बाद उन्हें 19 नवंबर 2003 को विभागाध्यक्ष के पद से हटाकर वेटिंग में डाल दिया गया। यही नहीं अगले ही दिन उनके खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश भी दे दिए गए।

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विजिलेंस को भी नहीं मिले थे सुबूत

ifs officer ramlakhan tell his story of struggle

डॉ. सिंह ने बताया कि 25 जून 2004 को उनके खिलाफ हाईकोर्ट में एक वकील से रिट याचिका दायर करवाई गई, जिसमें उन पर उक्त आरोप लगाए गए। 5 जुलाई को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया। 10 दिन बाद जेल से छूटा। फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि हाईकोर्ट की नई बेंच में उनके मामले की सुनवाई की जाए।

नई बेंच के सामने राज्य सरकार उनके खिलाफ कोई विजिलेंस रिपोर्ट नहीं दिखा सकी, जिसे उनके खिलाफ मुख्य आधार बनाया गया था। अगस्त 2011 में हाईकोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। साथ ही निचली अदालत में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट भी खारिज कर दी। इसके बाद डॉ. सिंह ने तत्कालीन राज्य सरकार को दोषी ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पॉलिटिकल बॉस की बात न मानने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया।

डॉ. राम लखन सिंह ने बताया कि अन्याय को चुपचाप बर्दाश्त करने से बड़ा कोई जुर्म नहीं है। अगर कोई गलत आरोप लगाता है तो निर्दोष साबित होकर ही चुप न बैंठें। उसे गलत भी ठहराएं। उन्होंने बताया कि जल्द ही उनकी संघर्ष की कहानी किताब के रूप में लोगों के सामने होगी।

सीएम अखिलेश की तारीफ की

डॉ. सिंह ने बताया कि 24 अगस्त को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें अपने आवास पर बुलाया था। इस दौरान इटावा की लॉयन सफारी में शेरों को बचाने के लिए लंबी बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि मौजूदा सपा सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल में वे 4-5 बार सीएम से मिल चुके हैं। वन्यजीव को लेकर सीएम का रुख काफी सकारात्मक है।

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