{"_id":"6a9498cbd983dfc10106e8bd","slug":"if-a-persons-heartbeat-stops-their-life-can-be-saved-by-administering-cpr-lucknow-news-c-13-lko1070-1896854-2026-08-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: किसी व्यक्ति की धड़कन थम जाए तो सीपीआर देकर बचा सकते हैं जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: किसी व्यक्ति की धड़कन थम जाए तो सीपीआर देकर बचा सकते हैं जान
विज्ञापन
प्रतीकात्मक।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। किसी व्यक्ति की सांस थम जाने पर शुरुआती चंद मिनट बहुत अहम होते हैं। ऐसे समय में सीपीआर देकर व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। इसे देखते हुए अब स्कूली विद्यार्थियों को भी जीवन बचाने की यह कला सिखाई जा रही है। रविवार को निरालानगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज के प्रेक्षागृह में केजीएमयू के हृदय संजीवनी कार्यक्रम का डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने शुभारंभ किया। इस दौरान 150 से अधिक विद्यार्थियों को सीपीआर और बेसिक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण दिया गया।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि छात्रों को आपात स्थिति में फर्स्ट रिस्पॉन्डर के तौर पर तैयार करना है। बच्चों को सीपीआर जैसी तकनीकी प्रक्रिया याद कराने के लिए कविता का सहारा लिया गया। यह अनोखी पहल अधिक कारगर साबित होगी। विशेषज्ञों ने जीवनरक्षक प्रक्रिया को लयबद्ध पंक्तियों में समझाया, ताकि घबराहट की स्थिति में भी बच्चे इसके क्रम को आसानी से याद रख सकें। केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि स्वास्थ्य जागरूकता को अस्पतालों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
हर विद्यार्थी को इतना सक्षम बनाया जाना चाहिए कि आपात स्थिति में चिकित्सकीय मदद पहुंचने तक किसी की जान बचाने के लिए जरूरी कदम उठा सके। ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह ने कहा कि सीपीआर में मरीज की छाती को दोनों हाथों से तेज-तेज जल्द-जल्दी 30 बार दबाना होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि छात्रों को आपात स्थिति में फर्स्ट रिस्पॉन्डर के तौर पर तैयार करना है। बच्चों को सीपीआर जैसी तकनीकी प्रक्रिया याद कराने के लिए कविता का सहारा लिया गया। यह अनोखी पहल अधिक कारगर साबित होगी। विशेषज्ञों ने जीवनरक्षक प्रक्रिया को लयबद्ध पंक्तियों में समझाया, ताकि घबराहट की स्थिति में भी बच्चे इसके क्रम को आसानी से याद रख सकें। केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि स्वास्थ्य जागरूकता को अस्पतालों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
विज्ञापन
हर विद्यार्थी को इतना सक्षम बनाया जाना चाहिए कि आपात स्थिति में चिकित्सकीय मदद पहुंचने तक किसी की जान बचाने के लिए जरूरी कदम उठा सके। ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह ने कहा कि सीपीआर में मरीज की छाती को दोनों हाथों से तेज-तेज जल्द-जल्दी 30 बार दबाना होता है।
विज्ञापन